श्रम और रोजगार मंत्रालय
श्रम संवाद पहल के तहत राजस्थान के भिवाड़ी में जिला स्तरीय क्षमता विकास और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
प्रविष्टि तिथि:
30 SEP 2026 7:10PM by PIB Delhi
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने एफआईसीसीआई (फि़क्की) और भिवाड़ी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सहयोग से आज राजस्थान के भिवाड़ी स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में बीएमए हाउस में श्रम संहिताओं पर जिला स्तरीय क्षमता विकास और जागरूकता कार्यक्रम “श्रम संवाद” का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों के बीच 21 नवंबर 2025 को लागू हुई श्रम संहिताओं तथा 08 मई 2026 को अधिसूचित केंद्रीय नियमों के बारे में जागरूकता पैदा करना और नए ढांचे के तहत प्रमुख प्रावधानों तथा अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को रेखांकित करना था। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें नियोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि, मानव संसाधन पेशेवर, विधि विशेषज्ञ, वित्त विशेषज्ञ तथा श्रम एवं रोजगार पारितंत्र के अन्य प्रमुख हितधारक शामिल थे।
कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों को श्रम संहिताओं, नियोक्ताओं के दायित्वों और भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
उद्घाटन संबोधन भिवाड़ी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (बीएमए) के महासचिव श्री योगेश जैन ने दिया। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री आशुतोष ए.टी. पेडणेकर ने मुख्य संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों तथा देशभर में ‘जिला स्तरीय क्षमता विकास और जागरूकता कार्यक्रमों’ के आयोजन के संबंध में मंत्रालय के दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

पहले तकनीकी सत्र का संचालन श्रम कल्याण आयुक्त (केंद्रीय) श्री ओम प्रकाश सिंह ने किया। उन्होंने श्रम संहिताओं, उनके उद्देश्यों और नए विधायी ढांचे के माध्यम से किए गए प्रमुख सुधारों का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया। इस सत्र से प्रतिभागियों को नियोक्ताओं और कामगारों, दोनों के लिए श्रम कानून सुधारों के व्यापक दृष्टिकोण और महत्व को समझने में सहायता मिली।

दूसरे सत्र का संचालन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अवर सचिव श्री नितेश भसीन और श्रम कल्याण आयुक्त (केंद्रीय) श्री ओम प्रकाश सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस सत्र में श्रम संहिताओं के तहत नियोक्ताओं के लिए प्रमुख अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र में वैधानिक दायित्वों और अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियों के बारे में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे प्रतिभागियों को नए ढांचे के परिचालन संबंधी पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिली।

कार्यक्रम के तहत एक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित जनों की सक्रिय भागीदारी और सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया। प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए, जमीनी स्तर की चुनौतियों को रेखांकित किया और श्रम कल्याण, नियोक्ताओं के दायित्वों तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधानों से जुड़े प्रश्न उठाए, जिससे आगे के तकनीकी सत्रों और विचार-विमर्श के लिए आधार तैयार हुआ।
तीसरा सत्र प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) पर केंद्रित था और इसका संचालन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I श्री भूपेंद्र यादव ने किया। प्रतिभागियों को रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के उद्देश्यों, पात्रता शर्तों और लाभों के बारे में जानकारी दी गई।

चौथे सत्र में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) योजना को शामिल किया गया और इसका संचालन अजमेर के कल्याण आयुक्त (केंद्रीय) श्री प्रवीण पी. मोहनदास ने किया। सत्र में योजना की प्रमुख विशेषताओं और असंगठित क्षेत्र के कामगारों तक पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा लाभ पहुंचाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम का समापन दूसरे संवादपूर्ण प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने वक्ताओं के साथ सीधे संवाद किया और श्रम संहिताओं, नियोक्ताओं के अनुपालन तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगे।

धन्यवाद ज्ञापन फि़क्की राजस्थान राज्य परिषद के सदस्य और बीएमए के पूर्व अध्यक्ष श्री सुरेंद्र सिंह चौहान ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी पहलों को निरंतर समर्थन देने का आग्रह किया, जो भिवाड़ी की देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक के रूप में स्थिति को और सुदृढ़ करने में सहायक हों।

इस कार्यक्रम ने क्षमता विकास, हितधारकों की सहभागिता और जागरूकता सृजन के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया, जिससे श्रम संहिताओं की बेहतर समझ विकसित करने तथा नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों की सूचित भागीदारी के माध्यम से इनके प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिली।
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पीके/केसी/आरटी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2317320)
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