विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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मोदी सरकार की सक्षमकारी नीतियों से भारत का उभरता क्वांटम इकोसिस्टम मजबूत हुआ: डॉ. जितेंद्र सिंह


सहायक इकोसिस्टम भारत के क्वांटम स्टार्टअप्स को निर्माण, विस्तार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का आत्मविश्वास प्रदान कर रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह


भारत ने आठ वर्षीय मिशन के लिए निर्धारित 2,000 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले लगभग तीन वर्षों में 1,000 किलोमीटर का क्वांटम सुरक्षित संचार हासिल किया: डॉ. जितेंद्र सिंह


राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम स्टार्टअप्स को सहायता 17 से बढ़कर 26 हुई; सरकार बुनियादी ढांचे, वित्तपोषण और उद्योग संबंधों का निर्माण कर रही है: डॉ. जितेंद्र सिंह


भारत में क्वांटम संचार और सेंसिंग में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने तथा क्वांटम कंप्यूटिंग में आत्मनिर्भर बनने की क्षमता है: डॉ. जितेंद्र सिंह


विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित प्रगति क्यू-फाउंड्री स्टार्टअप्स, उद्योग, निवेशकों, निर्माताओं और रणनीतिक उपयोगकर्ताओं को एक साथ लाकर क्वांटम प्रौद्योगिकी के उपयोग में तेजी ला रही है


प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026 में डॉ. जितेंद्र सिंह ने 10 नई क्वांटम प्रौद्योगिकियों, 9 स्टार्टअप्स और रणनीतिक साझेदारियों का शुभारंभ किया

प्रविष्टि तिथि: 30 SEP 2026 6:46PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि मोदी सरकार की सक्षमकारी नीतियों से भारत का उभरता क्वांटम इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है, जिससे उन्नत प्रौद्योगिकियों में उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए अधिक अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास वैज्ञानिक प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और उद्योग की तैयारी है, लेकिन अब नीति निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराया गया सक्षमकारी वातावरण हितधारकों को क्वांटम प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में निर्माण और विस्तार करने का आत्मविश्वास प्रदान कर रहा है।

नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026 – राष्ट्रीय क्वांटम मिशन सह-विकास एवं उद्यम साझेदारी बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन एक नए दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें सरकार, वैज्ञानिक संस्थान, स्टार्टअप्स, उद्योग, निवेशक, राज्य और रणनीतिक उपयोगकर्ता स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अन्य देशों में विकसित क्वांटम प्रौद्योगिकियों का केवल उपभोक्ता बनकर नहीं रहेगा, बल्कि देश में इन प्रौद्योगिकियों के विकास और उन्हें वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए क्षमताओं, बुनियादी ढांचे, प्रतिभा और उद्यमों का निर्माण कर रहा है।

मंत्री ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत प्रगति की गति को रेखांकित करते हुए कहा कि इस मिशन की योजना आठ वर्षों के लिए बनाई गई थी, लेकिन भारत ने लगभग तीन वर्षों में ही 1,000 किलोमीटर का क्वांटम सुरक्षित संचार हासिल कर लिया है, जबकि आठ वर्षों की अवधि के लिए 2,000 किलोमीटर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय के आधे से भी कम समय में लक्ष्य का आधा हिस्सा हासिल करना क्वांटम इकोसिस्टम के भीतर विकसित की गई क्षमता को दर्शाता है और अधिक गति तथा दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का विश्वास प्रदान करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र के प्रयास के रूप में संरचित किया गया है। इसके तहत भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली में चार विषयगत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों के 152 शोधकर्ता एक साथ काम कर रहे हैं। ये केंद्र क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री एवं उपकरणों के क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों में हासिल की गई प्रगति दर्शाती है कि भारत के पास अब क्वांटम संचार और क्वांटम सेंसिंग में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने तथा क्वांटम कंप्यूटिंग में आत्मनिर्भर बनने का अवसर है। मंत्री ने कहा कि इन केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स से उभर रही प्रौद्योगिकियां पहले से ही इस महत्वाकांक्षा के लिए एक मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्टार्टअप्स को सरकार का समर्थन केवल वित्तपोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन, प्रौद्योगिकी सत्यापन, उद्योग साझेदारियां और ग्राहकों तक पहुंच के अवसर भी शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्वांटम स्टार्टअप्स को उद्योग और निवेशकों के साथ निरंतर जुड़ाव की आवश्यकता है, जिसमें पूंजी, तकनीकी सत्यापन, सह-विकास, खरीद और बाजार तक पहुंच शामिल हैं। उन्होंने राज्यों से भी स्टार्टअप्स द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन करने तथा उनके उपयोग और खरीद की संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया, ताकि आशाजनक उद्यम टिकाऊ बन सकें।

मंत्री ने कहा कि क्वांटम स्टार्टअप्स की स्थिरता के लिए उद्योग के साथ शुरुआती स्तर पर संबंध स्थापित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्वांटम प्रौद्योगिकियों के लिए पर्याप्त पूंजी और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि प्रगति क्यू-फाउंड्री और इससे जुड़ी व्यवसाय-से-व्यवसाय (बी2बी) बैठकें केवल प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय प्रौद्योगिकी सत्यापन, खरीद, सह-विकास, निवेश और साझेदारियों जैसे ठोस परिणामों को सुगम बनाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही हैं।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत अब तक 17 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान की जा चुकी है और इस कार्यक्रम में 9 अतिरिक्त स्टार्टअप्स की घोषणा की गई, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 26 हो गई है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विस्तार क्वांटम उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और आशाजनक भारतीय उद्यमों को वित्तपोषण, बुनियादी ढांचे, मार्गदर्शन तथा ग्राहकों तक पहुंच के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रमुख क्वांटम प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का शुभारंभ किया, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया और स्टार्टअप्स की घोषणा की। ये पहल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के कार्यान्वयन के अगले चरण को चिह्नित करती हैं, जिसमें अब स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के परीक्षण, सत्यापन, एकीकरण, निवेश और उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

मिशन के तहत प्रदर्शित प्रौद्योगिकी संबंधी उपलब्धियों के हिस्से के रूप में, आईआईटी मद्रास स्थित क्वांटम संचार केंद्र के एक तकनीकी समूह ने चेन्नई और बेंगलुरु के बीच बीएसएनएल के मौजूदा फाइबर नेटवर्क का उपयोग करते हुए 17 सुरक्षित नोड्स के माध्यम से एक हाइब्रिड पीक्यूसी-क्यूकेडी लिंक का सफल प्रदर्शन किया। 50 पिकोसेकंड की डेजी-चेन टाइमिंग सिंक्रोनाइजेशन तकनीक को भी शोध समुदाय के लिए ओपन-सोर्स समाधान के रूप में जारी किया गया है।

इस कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जे. बी. वी. रेड्डी के साथ वरिष्ठ वैज्ञानिकों, उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने गोलमेज चर्चा के दौरान क्वांटम स्टार्टअप्स के संस्थापकों के साथ भी बातचीत की और उनकी तकनीकी प्रगति, चुनौतियों तथा विस्तार संबंधी आवश्यकताओं की समीक्षा की। इस बातचीत का उद्देश्य स्टार्टअप्स, निवेशकों, उद्योग और संभावित उपयोगकर्ताओं के बीच संबंधों को मजबूत करना था, ताकि आशाजनक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां सत्यापन, अपनाए जाने और उपयोग की दिशा में आगे बढ़ सकें।

मंत्री ने कहा कि क्वांटम प्रोसेसर, सुरक्षित संचार प्रणालियों, उन्नत सेंसर, सामग्रियों और उपकरणों में स्वदेशी क्षमता भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर जुड़ा रहते हुए संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए और ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करनी चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों।

नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत हुई प्रगति एक मजबूत क्वांटम इकोसिस्टम के निर्माण के लिए सरकार, शिक्षा जगत, स्टार्टअप्स और उद्योग को एक साथ लाने के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह मिशन स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और इस उभरते क्षेत्र में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी के लिए आधार तैयार कर रहा है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि क्वांटम इकोसिस्टम यह दर्शा रहा है कि मौलिक विज्ञान से प्रौद्योगिकी तक पहुंचने में 10–15 वर्ष लगने वाले पारंपरिक रैखिक मॉडल में बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि चार विषयगत केंद्रों से विभिन्न प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों (टीआरएल) पर लगभग 52 प्रौद्योगिकियां विकसित हुई हैं, साथ ही 17 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्टार्टअप्स को टिकाऊ बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार करने के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उपयोग और खरीद महत्वपूर्ण होगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रगति क्यू-फाउंड्री की सफलता का आकलन अंततः उन्नत की गई प्रौद्योगिकियों, स्थापित की गई साझेदारियों, जुटाए गए निवेश, मजबूत किए गए स्टार्टअप्स और उपयोग में लाई गई स्वदेशी समाधानों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी हितधारकों से स्पष्ट प्रतिबद्धताओं, समय-सीमाओं और जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने भारत के लिए वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक क्वांटम प्रौद्योगिकियों और राष्ट्रीय क्षमता के निर्माण की नींव रखी है।

 

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