विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन की आरंभिक चमक का मानचित्र तैयार किया, जिससे ब्रह्मांड के लिए एक नई खिड़की खुली
प्रविष्टि तिथि:
30 SEP 2026 5:17PM by PIB Delhi
भारत के शोधकर्ताओं को शामिल करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत, कनाडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट टेलीस्कोप (सीएचआईएमई टेलीस्कोप) ने पहली बार लगभग 5 अरब वर्ष पुराने ब्रह्मांड से हाइड्रोजन की चमक का स्वतंत्र रूप से पता लगाया है, जिससे ब्रह्मांडीय विस्तार और डार्क एनर्जी के नए अध्ययनों का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
कनाडा में स्थित सीएचआईएमई इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो टेलीस्कोप का निर्माण प्रारंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के वितरण का मानचित्रण करने के लिए किया गया है। इससे खगोलविद इसकी विस्तार दर की गणना कर सकते हैं और इस प्रकार डार्क एनर्जी का अध्ययन कर सकते हैं। डार्क एनर्जी को एक रहस्यमय शक्ति माना जाता है, जिसके कारण समय के साथ ब्रह्मांड के अधिक तेजी से विस्तार करने की धारणा है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) के सीएचआईएमई सहयोगियों को शामिल करने वाले एक अध्ययन में, सीएचआईएमई टेलीस्कोप ने पहली बार प्रदर्शित किया है कि वह केवल अपने स्वयं के डेटा का उपयोग करके ब्रह्मांड के सुदूर अतीत से आने वाली हाइड्रोजन गैस की मंद चमक का पता लगा सकता है।
यह सफलता वैज्ञानिकों के लिए डार्क एनर्जी के अध्ययन की अधिक तेज और कम खर्चीली पद्धति का मार्ग प्रशस्त करती है—डार्क एनर्जी को एक रहस्यमय शक्ति माना जाता है, जिसके कारण ब्रह्मांड के निरंतर बढ़ती दर से विस्तार करने की धारणा है और यह भौतिकी के सबसे बड़े अनसुलझे प्रश्नों में से एक है। यह उपलब्धि टेलीस्कोप के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसे इसी उद्देश्य से बनाया गया था। इन निष्कर्षों को आज द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में प्रस्तुत किया गया है।

चित्र: पृष्ठभूमि में मिल्की वे के साथ रात के समय सीएचआईएमई का दृश्य
सौजन्य: सीएचआईएमई सहयोग
सह-लेखक और टोरंटो विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल फेलो डॉ. अर्नब चक्रवर्ती, जिन्होंने सबसे पहले इस खोज का प्रस्ताव रखा था, ने कहा, “ब्रह्मांड में हाइड्रोजन सबसे सामान्य तत्व है और यही वह कच्चा पदार्थ है, जिससे तारों का निर्माण होता है। इसका मंद रेडियो उत्सर्जन एक ब्रह्मांडीय अनुरेखक की तरह कार्य करता है, जो यह दर्शाता है कि अंतरिक्ष में पदार्थ किस प्रकार वितरित है।”
खगोलभौतिकी समुदाय में डार्क एनर्जी की प्रकृति को लेकर परस्पर विरोधी सिद्धांत हैं। अपने स्वयं के डेटा का उपयोग करके, सीएचआईएमई इन सिद्धांतों की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकता है और उन्हें सही या गलत साबित करने में मदद कर सकता है।
सह-लेखक डॉ. मार्क हैलपर्न, ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और सीएचआईएमई के प्रधान अन्वेषक ने कहा, “यह ब्रह्मांड का अध्ययन करने की एक बिल्कुल नई तकनीक है, जिसे कनाडाई लोगों द्वारा परिकल्पित, निर्मित और वित्तपोषित एक उपकरण के माध्यम से संभव बनाया गया है।”
सह-लेखक और आरआरआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ सिंह ने कहा , “सीएचआईएमई एक अनूठा उपकरण है, जो आकाश के इसके ऊपर से गुजरने के दौरान ब्रह्मांड के एक बड़े हिस्से का स्कैन करता है। बिना किसी गतिशील पुर्जे के और उच्च सटीकता वाले माप के साथ, सीएचआईएमई हमें हर दिन रेडियो तरंगदैर्ध्य पर हमारे आकाश का एक चित्र प्रदान करता है!”
इससे पहले, सीएचआईएमई को अपने प्रेक्षणों का अन्य टेलीस्कोपों से प्राप्त आकाशगंगा सर्वेक्षण के डेटा के साथ सहसंबंध करना पड़ता था। आकाशगंगा सर्वेक्षण इसी प्रश्न का अध्ययन करते हैं, लेकिन इसके लिए प्रकाश का उपयोग करते हुए सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण किया जाता है। इनकी लागत कई मिलियन डॉलर अधिक होती है और ये ब्रह्मांड के केवल उस हिस्से पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो तारों के निर्माण के लिए पर्याप्त रूप से गर्म और सघन है।
हाइड्रोजन द्वारा स्वयं उत्सर्जित संयुक्त रेडियो चमक का मानचित्रण करके, सीएचआईएमई इन्हीं प्रश्नों का अध्ययन अधिक बड़े पैमाने पर और ब्रह्मांड के अधिक पुराने समय में कर सकता है। यह कार्य बहुत कम लागत में किया जा सकता है और इसके लिए किसी अन्य के परिणामों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती।
साथ में प्रकाशित एक शोधपत्र में, शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया कि प्राप्त संकेत ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के वितरण के बारे में क्या जानकारी प्रदान करता है।
सह-लेखक और एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टोरल फेलो डॉ. शब्बीर शेख ने कहा, “हमारे आंकड़े बताते हैं कि इस समय ब्रह्मांड में लगभग दो प्रतिशत हाइड्रोजन उदासीन परमाण्विक रूप में था, जो मोटे तौर पर अन्य मापों के अनुरूप है। हाइड्रोजन के वितरण और उसके एकत्रीकरण को मापकर, सीएचआईएमई हमें आकाशगंगाओं के निर्माण और विकास की अपनी समझ का परीक्षण करने का एक नया तरीका प्रदान करता है।”
यह खोज किसी ‘यूरेका क्षण’ का परिणाम नहीं थी। शोधकर्ताओं ने पृष्ठभूमि के ब्रह्मांड, मानव प्रौद्योगिकी और यहां तक कि स्वयं उपकरण से उत्पन्न अत्यधिक शोर के बीच मौजूद मंद संकेत का पता लगाने के लिए नई डेटा विश्लेषण और प्रसंस्करण तकनीकों का उपयोग किया। इसके बाद उन्होंने इस खोज की पुष्टि करने के लिए एक वर्ष से अधिक समय तक इसका परीक्षण किया और यह सुनिश्चित किया कि यह सही है। यह वास्तव में स्वयं ब्रह्मांड की ओर से आया संकेत था, जब वह लगभग 5 अरब वर्ष पुराना था। यह निष्कर्ष वर्ष 2019 में 94 रातों के दौरान एकत्र किए गए प्रेक्षण संबंधी आंकड़ों पर आधारित है।
वर्तमान माप में सीएचआईएमई द्वारा संचालन शुरू होने के बाद से एकत्र किए गए आंकड़ों के केवल एक छोटे से हिस्से का उपयोग किया गया है। शोधकर्ताओं के पास अब लगभग सात वर्षों के प्रेक्षण संबंधी आंकड़े उपलब्ध हैं और वे ब्रह्मांडीय इतिहास के उन पहले के कालखंडों को भी शामिल करने के लिए विश्लेषण का विस्तार करने पर काम कर रहे हैं, जब ब्रह्मांड केवल 3 अरब वर्ष पुराना था।
प्रकाशन लिंक: DOI 10.3847/1538-4357/ae9835
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पीके/केसी/आरटी/पीके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2317264)
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