सूचना और प्रसारण मंत्रालय
‘फाइल से फील्ड’ तक योजनाओं की यात्रा में हिंदी पत्रकारिता बने प्रभावी सेतु
सरकारी योजनाओं की जानकारी का केवल अनुवाद नहीं, उसकी भावना और उद्देश्य भी जनता तक पहुँचना जरूरी : सुधा श्रीमाली
सरल भाषा में सही सूचना अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं की गुंजाइश कम करती है; कृत्रिम बुद्धिमत्ता पत्रकारिता का सहयोगी साधन, विकल्प नहीं
विकसित भारत 2047 के संकल्प को जनभागीदारी से जोड़ने में हिंदी और डिजिटल माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रविष्टि तिथि:
28 SEP 2026 1:42PM by PIB Raipur
किसी सरकारी योजना की घोषणा के बाद उसका वास्तविक असर तब शुरू होता है, जब उसकी जानकारी उस व्यक्ति तक पहुँचे, जिसके लिए वह योजना बनाई गई है। योजना की जटिल भाषा को आम आदमी की समझ में आने वाली सरल भाषा में बदलना और उसे सही संदर्भ के साथ लोगों तक पहुँचाना ही वह कड़ी है, जो ‘फाइल से फील्ड’ तक सरकारी योजनाओं की यात्रा पूरी करती है। हिंदी पत्रकारिता इस प्रक्रिया में एक प्रभावी सेतु की भूमिका निभा सकती है। यह विचार नवभारत टाइम्स की बिजनेस एडिटर सुश्री सुधा श्रीमाली ने हिंदी माह के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए।
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कार्यक्रम के प्रारंभ में अपर महानिदेशक श्री सिद्धार्थ बोडखे ने सुश्री सुधा श्रीमाली का स्वागत किया और विशेष व्याख्यान के लिए उनका अभिनंदन किया।
“सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका – विकसित भारत 2047 के संदर्भ में” विषय पर बोलते हुए सुश्री श्रीमाली ने कहा कि सरकारी सूचना को हिंदी में प्रस्तुत करना केवल शब्दों का अनुवाद करने का कार्य नहीं है। सूचना के पीछे छिपे उद्देश्य, भावना और संदर्भ को समझकर उसे जनता की जरूरत के अनुरूप प्रस्तुत करना अधिक महत्वपूर्ण है। सही जानकारी जब सरल और उपयोगी रूप में लोगों तक पहुँचती है, तो वह केवल सूचना नहीं रहती, बल्कि जनभागीदारी का माध्यम बन जाती है।
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सुश्री श्रीमाली ने कहा कि किसी योजना की घोषणा होते ही आम नागरिक के मन में कुछ बुनियादी सवाल उठते हैं—योजना क्या है, इसका लाभ किसे मिलेगा, पात्रता क्या है और लाभ लेने की प्रक्रिया क्या है? पत्रकारिता का दायित्व इन सवालों के सीधे और स्पष्ट जवाब देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि समाचार का शीर्षक और प्रस्तुति ऐसी होनी चाहिए, जिससे पाठक को पहली नजर में यह समझ आ सके कि योजना उसके लिए क्यों महत्वपूर्ण है और वह इसका लाभ कैसे उठा सकता है।
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उन्होंने कहा कि आज सूचना की दुनिया तेजी से बदल रही है। समाचार-पत्रों के साथ श्रव्य कार्यक्रम, सामाजिक माध्यम और अन्य डिजिटल माध्यमों ने सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी को पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक स्तर तक पहुँचाने की क्षमता पैदा की है। ऐसे समय में मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी विश्वसनीयता बनाए रखना है। सरल और तथ्यपरक सूचना संचार के अंतर को कम करने के साथ ही अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार की संभावना को भी कम कर सकती है।
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उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सूचना का प्रवाह केवल सरकार से मीडिया और फिर जनता तक एकतरफा नहीं होना चाहिए। पत्र सूचना कार्यालय की भूमिका मीडिया से मिलने वाली प्रतिपुष्टि को सरकार तक पहुँचाने में भी महत्वपूर्ण है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से प्राप्त सवालों, प्रतिक्रियाओं और जमीनी अनुभवों के माध्यम से सूचना संबंधी कमियों की पहचान की जा सकती है और उन्हें दूर किया जा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में पत्रकारिता की भूमिका पर उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल चुनौती के रूप में देखने के बजाय पत्रकारों के काम को अधिक प्रभावी बनाने वाले सहयोगी साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। तकनीक सूचना के विश्लेषण, प्रस्तुति और व्यापक प्रसार में मदद कर सकती है, लेकिन सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की अंतिम जिम्मेदारी पत्रकारिता की ही रहेगी।
सुश्री श्रीमाली ने कहा कि सरकारी योजनाओं की जानकारी आकर्षक भी हो और उपयोगी भी, लेकिन उसका उद्देश्य योजनाओं का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि उनकी मूल भावना और लाभ को सरल भाषा में जनता तक पहुँचाना होना चाहिए। हिंदी की व्यापक समझ और डिजिटल माध्यमों की बढ़ती पहुँच इसे और प्रभावी बनाती है। इस दृष्टि से हिंदी पत्रकारिता विकसित भारत 2047 के संकल्प को जनभागीदारी के व्यापक अभियान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पत्र सूचना कार्यलय, पश्चिम क्षेत्र की महानिदेशक (डीजी), श्रीमती स्मिता वत्स शर्मा ने अपने संबोधन में कहा, "वर्तमान डिजिटल युग में सूचनाओं की बहुत अधिकता (इंफॉर्मेशन ओवरलोड) है, इसलिए हमारा यह निरंतर प्रयास रहता है कि हम पत्रकारों के लिए आंकड़ों और सूचनाओं को छांटकर बेहद सरल रूप में प्रस्तुत करें। पत्रकारों की सुविधा के लिए हम प्रेस विज्ञप्तियों के साथ पत्र सूचना कार्यालय बैकग्राउंडर भी संलग्न करते हैं और तस्वीरों के विस्तृत कैप्शन (शीर्षक) भी लिखते हैं, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकार भी उसकी पृष्ठभूमि को आसानी से समझ सकें। इसके अलावा, विषय की व्यापक समझ सुनिश्चित करने के लिए विज्ञप्ति के साथ सोशल मीडिया लिंक्स और लाइव स्ट्रीमिंग के लिंक भी साझा किए जाते हैं।"
यह विशेष व्याख्यान पत्र सूचना कार्यालय, मुंबई द्वारा हिंदी माह के अवसर पर महानिदेशक सुश्री स्मिता वत्स शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जोन के पत्र सूचना कार्यालय और केंद्रीय संचार ब्यूरो के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से व्याख्यान में शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के निदेशक श्री मनीष गौतम ने सुश्री सुधा श्रीमाली के प्रति आभार व्यक्त किया।
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आरडीजे/केवी/पीजे
(रिलीज़ आईडी: 2315918)
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