सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

“भारतीय सांकेतिक भाषा को दैनिक नागरिकता का हिस्सा बनना चाहिए”: DEPwD ने बधिर लोगों के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए ISL के व्यापक उपयोग का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 23 SEP 2026 8:00PM by PIB Delhi

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (DEPwD) की अतिरिक्त सचिव, सुश्री मनमीत कौर नंदा ने आज कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) को रोजमर्रा की नागरिक भाषा के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए और इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाना चाहिए ताकि बधिर व्यक्ति पूर्ण रूप से भाग ले सकें और गरिमा के साथ अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें। नई दिल्ली के केदारनाथ साहनी सभागार में DEPwD, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त निकाय , भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC) द्वारा आयोजित "बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा" विषय पर सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के समारोह को संबोधित करते हुए, सुश्री नंदा ने देशभर के नागरिकों के बीच भारतीय सांकेतिक भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समाज में ISLको अधिक दृश्यमान और व्यापक रूप से प्रयुक्त भाषा बनाने के महत्व पर जोर देते हुए, सुश्री नंदा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ISL से अधिक परिचित होना और इसका उपयोग करना बधिर व्यक्तियों के दैनिक जीवन में संचार, भागीदारी और समावेशन को मजबूत कर सकता है। उनके संदेश में ISL के व्यापक उपयोग को एक ऐसे वातावरण के निर्माण के केंद्र में रखा गया है जहां बधिर नागरिक संचार बाधाओं के बिना शिक्षा, अवसरों और सार्वजनिक जीवन तक पहुंच सकें।

इस समारोह में सरकारी प्रतिनिधि, बधिर व्यक्तियों के संगठन, शिक्षक, पेशेवर और अन्य हितधारक एक साथ आए और सांकेतिक भाषा के महत्व को संचार के एक आवश्यक साधन और मानवाधिकारों की प्राप्ति के मार्ग के रूप में रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में भारतीय सांकेतिक भाषा के अधिगम, शिक्षा, अनुसंधान और पहुंच को सुदृढ़ करने के लिए ISLRTC द्वारा विकसित कई नई पहल और संसाधनों का प्रदर्शन भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, भारतीय सांकेतिक भाषा विभाग (DEPwD) के संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा ने विभिन्न क्षेत्रों में ISL दुभाषियों की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों और हितधारकों को ISLRTC द्वारा विकसित आईएसएल संसाधनों का सक्रिय रूप से उपयोग करने और उनका प्रसार करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही गुणवत्तापूर्ण भारतीय सांकेतिक भाषा संसाधनों के बारे में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।

ISLRTC के निदेशक श्री कुमार राजू ने स्वागत भाषण दिया और वर्ष के दौरान केंद्र द्वारा हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों और पहल पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का कार्यक्रम में स्वागत किया। इस अवसर पर, ISLRTC के विभागाध्यक्ष (शैक्षणिक, कार्यक्रम एवं सेवाएँ) श्री हरीश सोनी ने सक्षम के राष्ट्रीय आयोजन सचिव श्री चंद्रशेखर का कार्यक्रम में स्वागत किया।

राष्ट्रीय बधिर संघ के सचिव श्री साजू स्टीफन ने वंदे मातरम के भारतीय सांकेतिक भाषा में रूपांतरण की सराहना करते हुए इसे बधिर समुदाय के लिए राष्ट्रीय गीत को सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। अखिल भारतीय बधिर संघ के महासचिव श्री रोशन कुमार ने सांकेतिक भाषा और बधिर व्यक्तियों के अधिकारों को बढ़ावा देने के वैश्विक प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए विश्व बधिर संघ के 141 देशों के संगठनों से संबंधों का उल्लेख किया। अखिल भारतीय बधिर महिला संघ की अध्यक्ष श्रीमती उमा कपूर ने ISLRTC को भारतीय सांकेतिक भाषा के क्षेत्र में अपने कार्यों को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस समारोह का एक प्रमुख आकर्षण भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) पर आधारित शैक्षिक, अनुसंधान और ज्ञान संसाधनों की एक व्यापक श्रृंखला का शुभारंभ था। बधिर शिक्षा और ISL पर पांच शोध लेखों को शामिल करते हुए जर्नल ऑफ इंडियन साइन लैंग्वेज का पहला अंक इस क्षेत्र में अनुसंधान और ज्ञान प्रसार को बढ़ावा देने के लिए जारी किया गया। साथ ही, भारतीय सांकेतिक भाषा में "वंदे मातरम" का एक संस्करण भी जारी किया गया, जिससे राष्ट्रीय गीत को भारतीय सांकेतिक भाषा के माध्यम से सुलभ बनाया जा सके।

प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए, बालवाटिका के लिए "संकेत वाटिका" ISL दृश्य पुस्तकें लॉन्च की गईं, साथ ही 3-6 वर्ष आयु वर्ग के बधिर बच्चों में ISL विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुस्तकें और डिजिटल संसाधन भी जारी किए गए। भारतीय सांकेतिक भाषा व्याख्या में डिप्लोमा (DISLI) और भारतीय सांकेतिक भाषा शिक्षण में डिप्लोमा (DTISL) पाठ्यक्रमों के लिए अतिरिक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री भी जारी की गई।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के सहयोग से, कक्षा 1 से 6 तक की 14 पाठ्यपुस्तकों की पाठ्यक्रम सामग्री को कवर करते हुए, पाठ्यक्रम-आधारित सार्वभौमिक शिक्षण डिजाइन (UDL) वीडियो और 100 पर्सनेलाइज्ड अड़ेप्टिव लर्निंग  (PAL) वीडियो लॉन्च किए गए। बधिर विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में सहयोग हेतु कक्षा 9 से 12 तक के लिए अवधारणा-आधारित शैक्षिक वीडियो भी शुरू किए गए।

ज्ञान को कक्षा से बाहर सुलभ बनाने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट (NBT) की 300 पुस्तकें - जिनमें कहानियां, जीवनियां और ऐतिहासिक विवरण शामिल हैं - बधिर शिक्षार्थियों और पाठकों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा में उपलब्ध कराई गईं। ISLशब्दकोश का विस्तार 11 अतिरिक्त भाषाओं में किया गया , जिससे सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में शब्दकोश उपलब्ध कराने के उद्देश्य को आगे बढ़ाया गया। ISLRTC ने पीएम ई-विद्या चैनल नंबर 31 पर डायरेक्ट एनकोडर आधारित लाइव स्ट्रीमिंग भी शुरू की , जिससे ISL आधारित शैक्षिक सामग्री तक पहुंच और भी व्यापक हो गई।

इन पहल का उद्देश्य मिलकर भारतीय सांकेतिक भाषा की शिक्षा और सुलभ शिक्षण की एक व्यापक श्रृंखला तैयार करना है - प्रारंभिक वर्षों से लेकर स्कूली शिक्षा तक - साथ ही बधिर बच्चों और छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि और भागीदारी को मजबूत करना है।

इस समारोह में भारत भर के बधिर विद्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले बधिर प्रतिभागियों की प्रतिभा और उपलब्धियों को भी सम्मानित किया गया। नौवीं भारतीय सांकेतिक भाषा प्रतियोगिता के 15 विजेताओं को कहानी सुनाने, निबंध लेखन और चुटकुले सुनाने जैसी श्रेणियों में उनकी उपलब्धियों के लिए ट्राफियां और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए ।

इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वास्तविक जीवन के अनुभवों और रचनात्मकता को मंच पर प्रस्तुत किया गया। बधिर व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली रोजमर्रा की चुनौतियों को दर्शाने वाले एक मूक अभिनय को दर्शकों ने विशेष रूप से सराहा, जिसके बाद एक नृत्य प्रस्तुति भी हुई।

सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के आयोजन ने भाषा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, संस्कृति और मानवाधिकारों को एक समावेशी समाज की साझा दृष्टि के इर्द-गिर्द एकजुट किया। शैक्षिक संसाधनों, डिजिटल सामग्री, अनुसंधान पहल और भाषा उपकरणों के अपने विस्तारित पोर्टफोलियो के माध्यम से, ISLRTC बधिर व्यक्तियों के लिए संचार, सीखने, भागीदारी और समान अवसर प्रदान करने वाले साधन के रूप में भारतीय सांकेतिक भाषा को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।

इस कार्यक्रम में सुश्री मनमीत कौर नंदा, अतिरिक्त सचिव, DEPwD; श्री राजीव शर्मा, संयुक्त सचिव, DEPwD; सुश्री ऋचा शंकर, सांख्यिकी सलाहकार, DEPwD; श्री कुमार राजू, निदेशक, ISLRTC; श्री हरीश सोनी, विभागाध्यक्ष (शैक्षणिक, कार्यक्रम एवं सेवाएँ), ISLRTC; श्री साजू स्टीफन, सचिव, राष्ट्रीय बधिर संघ; श्री रोशन कुमार, महासचिव, अखिल भारतीय बधिर संघ; श्रीमती उमा कपूर, अध्यक्ष, अखिल भारतीय बधिर महिला फाउंडेशन; श्री चंद्रशेखर, राष्ट्रीय संगठनात्मक सचिव, सक्षम; और बधिर विद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

*****

पीके/केसी/आरटी/जेएस


(रिलीज़ आईडी: 2314666) आगंतुक पटल : 19
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English