ग्रामीण विकास मंत्रालय
भूमि संसाधन विभाग ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान की शुरुआत की, जिसमें स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया गया
प्रविष्टि तिथि:
17 SEP 2026 9:47PM by PIB Delhi
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) ने 17 सितंबर 2026 से 'स्वच्छता ही सेवा' पहल की शुरुआत की है, जो स्वच्छता, उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन और जनसेवा की संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है।
यह पहल स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर बल देती है, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने कार्यालयों व आसपास के परिसरों को स्वच्छ रखने तथा एक स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसका ध्यान केवल कार्यस्थल की स्वच्छता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर की उन आदतों पर भी केंद्रित है जो कचरा फैलाने की प्रवृत्ति को कम करने तथा स्वच्छता व्यवस्था में सुधार लाने में सहायक हो सकती हैं।
स्वच्छता और जन-भागीदारी के महत्व पर बल देते हुए भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण ने कहा, “स्वच्छता का अर्थ केवल अपने आसपास के वातावरण को साफ करना ही नहीं है, बल्कि यह उन साझा स्थानों की जिम्मेदारी लेना भी है जिनका हम उपयोग करते हैं। 'स्वच्छता ही सेवा' का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देगा जब हममें से प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता को अपने दैनिक आचरण का हिस्सा बनाएगा। कचरा न फैलाकर, अपने कार्यस्थलों व पड़ोस को स्वच्छ रखकर और यह सुनिश्चित करके कि अपशिष्ट का उत्तरदायी तरीके से प्रबंधन हो, हम एक स्वच्छ और स्वस्थ भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकते हैं।”
विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों से स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा अपने दैनिक जीवन में सरल व टिकाऊ आदतों को अपनाने का आह्वान किया है। यह पहल लोगों को स्वच्छता का पूरा दायित्व केवल सफाई कर्मचारियों पर छोड़ने के बजाय, अपने आसपास के वातावरण की जिम्मेदारी खुद संभालने के लिए प्रोत्साहित करती है।
यह कार्यक्रम प्लास्टिक कचरे और ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक कचरे) के उत्तरदायी प्रबंधन के महत्व पर भी प्रकाश डालता है। कर्मचारियों को अपने घरों और कार्यालयों में अनुपयोगी वस्तुओं की पहचान करने तथा उनके पुन: उपयोग, मरम्मत, रीसायकल या उत्तरदायी निस्तारण के विकल्पों को खोजने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी में योगदान दिया जा सके।
यह पहल इस बात पर भी बल देती है कि स्वच्छता अनिवार्य रूप से जनसेवा से जुड़ी हुई है। इसका मुख्य संदेश कचरा कम से कम उत्पन्न करना, इधर-उधर कूड़ा फेंकने से बचना और ऐसी प्रणालियों का समर्थन करना है जो कचरे के रीसायकल और पुन: उपयोग को संभव बनाती हैं। संबोधन में प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने के उदाहरणों को भी रेखांकित किया गया, जो उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर प्रैक्टिस की अपार संभावनाओं को दर्शाते हैं।
विभाग ने अपने कार्मिकों से आग्रह किया है कि वे स्वच्छ कार्यस्थल बनाए रखकर, अपने आसपास के वातावरण को कूड़ा-कर्कट से मुक्त रखकर तथा अपने घरों व समुदायों में भी ऐसी ही आदतों को बढ़ावा देकर एक मिसाल कायम करें।
'स्वच्छता ही सेवा' इस विचार को सुदृढ़ करने का प्रयास करती है कि स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी है और व्यक्तिगत स्तर पर उठाए गए छोटे-छोटे कदम, जब सामूहिक रूप से अपनाए जाते हैं, तो एक बड़े बदलाव में योगदान दे सकते हैं। यह पहल जिम्मेदार नागरिकता, जनसेवा और सतत अभ्यासों को बढ़ावा देने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुकूल है।


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(रिलीज़ आईडी: 2311737)
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