इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
भाषिनी, करंट एआई और कल्पा इंपैक्ट ने VYOMA इनोवेशन चैलेंज का समापन किया, भारत के लिए ओपन-सोर्स एआई समाधान दर्शाए
आईआईआईटी-दिल्ली में आयोजित फाइनल में चार नवाचारों को मान्यता दी गई, 10 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया
प्रविष्टि तिथि:
16 SEP 2026 4:05PM by PIB Delhi
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के डिजिटल इंडिया कार्पोरेशन (डीआईसी) के तहत डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीज़न (डीआईबीडी) ने करंट एआई और कल्पा इम्पैक्ट के साथ मिलकर आईआईआईटी-दिल्ली में VYOMA इनोवेशन चैलेंज का फ़ाइनल आयोजित किया। इसमें अलग-अलग भारतीय संदर्भों के लिए ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर के व्यावहारिक एप्लिकेशन विकसित करने वाले शोधकर्ता, छात्र और स्टार्टअप शामिल हुए।
इस चैलेंज में हिस्सा लेने प्रतिभागियों को सुनो सूत्र पर आगे काम करने के लिए कहा गया। सुनो सूत्र एक ओपन-सोर्स, कई बहुभाषीय हैंडहेल्ड एआई रेफरेंस डिज़ाइन है, जिसे भाषिनी और करंट एआई ने मिलकर बनाया है। साथ ही, उन्हें यह भी पता लगाना था कि एआई हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को जनहित से जुड़े कामों और स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल के लिए कैसे ढाला जा सकता है।
VYOMA इनोवेशन चैलेंज के फाइनल में 10 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने वर्किंग प्रोटोटाइप दिखाए। इन समाधानों में स्वास्थयवाएं, कृषि, कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच, कानूनी सेवाएँ और सुविधाओं तक पहुंच जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल थे। ये समाधान भारत की विविध जरूरतों और असल दुनिया की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए एआई की क्षमता को दिखाते हैं।

फाइनल में 10 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया, जिसके बाद जूरी ने उनसे सवाल पूछे और फीडबैक दिया। टीमों ने अपने समाधान पेश किए और दिखाया कि कैसे ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर को अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों की खास चुनौतियों को हल करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह चैलेंज ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर, बहुभाषीय एआई और एज एआई से जुड़े बड़ी व्यवस्था को भी एक साथ लाया। इसमें हिस्सा लेने वालों ने हार्डवेयर ऑप्टिमाइज़ेशन, मॉडल क्वांटाइज़ेशन, एक्यूरेसी और अच्छे आइडिया को असल दुनिया में लागू करने के तरीकों पर विशेषज्ञों के साथ बातचीत की।
फाइनल में, मंत्रालय की वैज्ञानिक 'जी' कविता भाटिया ने कहा: "भारत वैश्विक एआई का सिर्फ उपभोक्ता बने रहने के बजाय, तेज़ी से अपनी ज़रूरतों के हिसाब से ओपन और जनहित वाली तकनीक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन सफलता का असली पैमाना यह नहीं है कि यह लैब या पायलट प्रोजेक्ट में क्या काम करता है, बल्कि यह है कि असल दुनिया में लाखों नागरिकों के लिए ये कितना मददगार साबित हो सकता है। VYOMA ओपन-सोर्स हार्डवेयर और भाषिनी की भाषा क्षमताओं को एक साथ लाता है, ताकि एआई को नागरिकों के और करीब लाया जा सके। इसके समाधान स्थानीय स्तर पर काम कर सकते हैं, ऑफलाइन चल सकते हैं, बैंडविड्थ पर निर्भरता कम कर सकते हैं और निजता की सुरक्षा कर सकते हैं। सस्ती, हाथ में पकड़ी जा सकने वाली डिवाइस पर अपनी भाषाओं में एआई को चलाने में सक्षम बनाकर, यह पहल दिखाती है कि कैसे तकनीक ज्यादा निजी, सुलभ और आम लोगों के लिए काम की चीज़ बन सकती है।"
मंत्रालय के वैज्ञानिक 'ई', तरुण पांडे ने कहा: "VYOMA जैसे हैकाथॉन युवा अन्वेषकों, शोधकर्ताओं और तकनीक विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए एक अहम मंच देते हैं, ताकि वे लोगों के कल्याण के लिए नई तकनीक के वास्तविक इस्तेमाल विकसित कर सकें। यह पहल नवाचार को बढ़ावा देने, देश की अपनी एआई क्षमताओं को मजबूत करने और भारत की अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा करने वाली समावेशी भाषा तकनीक को सक्षम बनाने के लिए भाषिनी की प्रतिबद्धता को दिखाती है। इस चैलेंज से निकले समाधानों में सुलभ, ओपन और स्थानीय रूप से प्रासंगिक एआई तकनीक की व्यापक व्यवस्था में योगदान करने की क्षमता है।"
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ, अमिताभ नाग ने कहा: "भाषा समावेशिता का एक हिस्सा है, लेकिन आखिरी छोर तक पहुँचना दूसरा हिस्सा है। VYOMA की शुरुआत ओपन, ऑफलाइन हार्डवेयर की खोज की ज़रूरत से हुई, जो एआई को और अधिक समावेशी बना सके, खासकर विविध और संपर्क की कमी वाले माहौल में। इन टीमों से हमने जो देखा है, वह यह है कि ओपन हार्डवेयर को वास्तविक दुनिया में काम आने वाले समाधानों में बदला जा सकता है। यह आज एक मील का पत्थर है, लेकिन यह एक नई यात्रा की शुरुआत भी है। अब ध्यान यूज़र फीडबैक, सहयोग और सीखने की गति के माध्यम से इन समाधानों को बेहतर बनाने पर होना चाहिए।"
फ़िनाले में सुनो सूत्र के रेफरेंस डिज़ाइन को दिखाया गया और VYOMA इनोवेशन चैलेंज के विकास, हिस्सा लेने वाली टीमों द्वारा विकसित नए इस्तेमाल के तरीकों और ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर तथा एम्बेडेड एआई इकोसिस्टम की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा की गई।
VYOMA इनोवेशन चैलेंज में चार नवाचारों को विजेता के तौर पर चुना गया। हर विजेता टीम को उनके नवाचार और जनहित में उनके इस्तेमाल की संभावना के लिए इनाम की राशि दी गई।

VYOMA इनोवेशन चैलेंज में सम्मानित जूरी द्वारा चुने गए शीर्ष चार विजेता थे: टीम आशा सहायक, टीम श्रवण, टीम संग्रह–अपना साथी और टीम सहायक मित्र– A.V.E.R.A. (ऑटोनॉमस वॉयस-इनेबल्ड एज रूरल एडवाइज़र)।
VYOMA इनोवेशन चैलेंज, सुनो सूत्र के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है, जिसे फरवरी 2026 में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में पेश किया गया था। इसका मकसद ओपन-सोर्स, कई भाषाओं वाले और इंसानों पर केंद्रित एआई हार्डवेयर को बढ़ावा देना है। रेफरेंस डिज़ाइन को नए डेवलपर्स तक पहुँचाकर, इस चैलेंज का मकसद अलग-अलग वातावरण, इस्तेमाल के तरीकों और लागू करने की स्थितियों के हिसाब से प्रयोग और बदलाव को बढ़ावा देना था।

इस चुनौती से आगे बढ़कर, VYOMA का मकसद ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के लिए एक ओपन इकोसिस्टम बनाने में योगदान देना है। साथ ही, यह बहुभाषी और एज एआई को आगे बढ़ाना चाहता है, जिसे भारत की अलग-अलग भाषाई, तकनीकी और कार्य करने योग्य स्थितियों के हिसाब से ढाला जा सके।
इस फाइनल इवेंट ने प्रैक्टिकल, आसानी से इस्तेमाल होने वाले और स्थानीय स्तर पर काम के एआई समाधान विकसित करने के लिए अन्वेषकों, शोधकर्ताओं, सरकारी हितधारकों और इकोसिस्टम पार्टनर्स को एक साथ लाने में एक अहम भूमिका निभाई।
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीज़न (डीआईबीडी) के बारे में
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) का डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीज़न (डीआईबीडी), एआई-पावर्ड बहुभाषीय डिजिटल समावेश के लिए एक राष्ट्रीय प्रणाली बना रहा है। भाषिनी 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉइस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। यह 800 से ज़्यादा सरकारी वेबसाइट्स को चलाता है, इसने 9 बिलियन से ज़्यादा एआई इन्फेरेंस (अनुमान/प्रोसेसिंग) किए हैं और रोज़ाना 24 मिलियन से ज़्यादा एआई इन्फेरेंस प्रोसेस करता है, जिससे लैंग्वेज एआई के ज़रिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ज़्यादा सुलभ बनाने में मदद मिलती है। नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी (एनएचएलटी) ग्लोबल साउथ में सबसे बड़े इन्फेरेंसिंग प्लेटफार्म में से एक है, जो सरकारी और जनता के लिए उपलब्ध डिजिटल सेवाओं में लैंग्वेज एआई के बढ़ते इस्तेमाल को मदद करता है।
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पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2310918)
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