जल शक्ति मंत्रालय
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पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा 12वां जिला कलेक्टर पेयजल संवाद आयोजित


छह जिलों ने स्रोत स्थिरता, सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों द्वारा व्यवहार परिवर्तन, शिकायत निवारण तंत्र और अभिसरण पर नवोन्मेषी प्रथाएं प्रदर्शित की

प्रविष्टि तिथि: 15 SEP 2026 5:36PM by PIB Delhi

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा 12 वां जिला कलेक्टर पेयजल संवाद आयोजित किया। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों/जिला मजिस्ट्रेटों/उपायुक्तों के साथ जल जीवन मिशन द्वितीय चरण के कार्यान्वयन में तेजी लाने और सर्वोत्तम प्रथा साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया।

संवाद की अध्यक्षता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने की । राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोआन और राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी संवाद में उपस्थित रहे।

इस अवसर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग सचिव ने जलजीवन मिशन द्वितीय चरण के तहत योजना की प्रगति, सेवा वितरण, जल गुणवत्ता और जल स्रोत की स्थिरता की समीक्षा के लिए जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की नियमित मासिक बैठकों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्धारित परीक्षण अवधि और उचित दस्तावेज़ीकरण के बाद पूर्ण हो चुकी योजनाएं जल अर्पण कार्यक्रम द्वारा ग्राम पंचायतों को सौंप दी जानी चाहिए, जिससे सामुदायिक स्वामित्व और सतत संचालन एवं रखरखाव को बढ़ावा मिले। उन्होंने जिलों से कहा कि वे जल अर्पण समारोहों, जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति बैठकों और जिला जल एवं स्वच्छता मिशन समीक्षाओं में सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों को सक्रिय रूप से शामिल करें ताकि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों में पारदर्शिता और जन विश्वास बढ़ाया जा सके। उन्होंने जलजीवन मिशन द्वितीय चरण निधि के समय पर उपयोग, भौतिक और वित्तीय प्रगति की सटीक रिपोर्टिंग और सेवा अंतराल दूर करने के लिए जिला एवं राज्य सुधार योजनाओं की तैयारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। श्री मीणा ने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे जल स्रोत स्थिरता उपायों की योजना बनाने में निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) के उपयोग को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण परिवारों के लिए भरोसेमंद और सतत पेयजल सेवा सुनिश्चित करने के लिए योजना क्रियान्वयन, जल गुणवत्ता और संवहनीयता उपायों की नियमित निगरानी आवश्यक है।

छह चयनित जिलों - मध्य प्रदेश के शहडोल, जम्मू -कश्मीर के सांबा, पश्चिम बंगाल के हुगली, छत्तीसगढ़ के धमतरी, पंजाब के फतेहगढ़ साहिब और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उत्तरी एवं मध्य अंडमान जिले के संबंधित जिला कलेक्टरों/जिला मजिस्ट्रेटों/जिला आयुक्तों ने प्रगति और सर्वोत्तम प्रथा प्रस्तुत की ताकि अन्य जिलों को जलजीवन मिशन द्वितीय चरण के सुदृढ़ कार्यान्वयन में सहायता और अनुभव से सीख मिले। संबंधित जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त द्वारा प्रस्तुतियों के माध्यम से छह जिलों
द्वारा साझा की गई नवोन्मेषी सर्वोत्तम प्रथाएं निम्नानुसार हैं:

  • शहडोल, मध्य प्रदेश- जिला कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने बताया कि जल आपूर्ति योजनाओं के लिए सिविल और विद्युत कार्य काफी हद तक पूरे हो गए हैं और शेष कार्य नवंबर 2026 तक आरंभ होने की उम्मीद है। सभी एकल ग्राम योजनाओं और बहु ​​ग्राम योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा पर जोर दिया गया है। 544 पूर्ण एकल ग्राम योजनाओं में से 405 पहले ही सौंपे जा चुके हैं, जबकि जल अर्पण कार्यक्रम के माध्यम से 2 अक्टूबर 2026 को 35 और पूर्ण योजनाएं सौंपे जाने की योजना है। जिले ने दिसंबर 2026 तक सभी ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को पूरा करने और उन्हें संचालित करने तथा 26 जनवरी 2027 तक जिले को पूर्णतः कार्यशील घोषित करने का लक्ष्य रखा है। जिले ने सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का भी प्रदर्शन किया, जिनमें ओवरहेड टैंक की सफाई और रखरखाव के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, यूपीआई और नेट बैंकिंग द्वारा जल और स्वच्छता शुल्क संग्रह के लिए ऑनलाइन तंत्र और ग्राम पंचायत के नेतृत्व में संचालन और रखरखाव बेहतर बनाने की प्रणालियां शामिल हैं। ये पहल ग्रामीण पेयजल अवसंरचना में पारदर्शिता, सेवा वितरण, राजस्व संग्रह और दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार लाने में सहायक हैं।

  • सांबा, जम्मू-कश्मीर की उपायुक्त श्रीमती आयुषी सूडान ने सांबा को जल जीवन मिशन के तहत एक आदर्श जिले के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि उन्होंने बताया कि विविध भौगोलिक परिस्थितियों और भूजल स्रोतों पर निर्भरता की वजह से जिले को जल प्रबंधन संबंधी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू-कश्मीर जल मिशन के तहत, जिले में निर्धारित सेवा स्तरों के साथ कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन कवरेज लगभग 23 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है, जिसमें लगभग 35 हजार नए नल कनेक्शन जोड़े गए हैं। जल शोधन संयंत्रों, ट्यूबवेल, कुओं, पंपिंग स्टेशनों और भंडारण अवसंरचना द्वारा जिले में 130 जल आपूर्ति योजनाएं लागू की गई हैं। श्रीमती आयुषी सूडान ने प्रमुख चुनौतियों में कठिन पहाड़ी भूभाग, गिरता भूजल स्तर, जल स्रोतों की स्थिरता संबंधी चिंताएं, बिजली आपूर्ति की कमी, भूमि संबंधी मुद्दे और जल आपूर्ति प्रणालियों की उच्च परिचालन और रखरखाव आवश्यकताओं की चर्चा की। इन चुनौतियों के समाधान के लिए, जिले में स्थानीय जलभूवैज्ञानिक स्थितियों के आधार पर स्थान-विशिष्ट समाधान अपनाए गए हैं। सांबा उपायुक्त ने कई सफल पहल का उल्लेख किया जिनमें पूजनीय उत्तर बेहनी मंदिर में 60 साल पुराने खोदे गए कुएं का पुनरुद्धार शामिल है, जिससे अब सैकड़ों घरों को पीने का पानी मिल रहा है। उन्होंने सार्वभौमिक जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जल शोधन संयंत्रों और ट्यूबवेल के संयोजन द्वारा दूरस्थ पहाड़ी गांवों के लिए अनुकूलित योजनाओं का भी उल्लेख किया।

  • हुगली, पश्चिम बंगाल - जिला मजिस्ट्रेट श्री खुर्शीद अली कादरी ने पेयजल बुनियादी ढ़ांचे निर्माण में जिले की उल्लेखनीय प्रगति का चर्चा की। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत सतत सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिले में सामुदायिक भागीदारी, सेवा मूल्यांकन और शिकायत निवारण पर ध्यान केंद्रित किया गया। जल सेवा अभियान के अंतर्गत, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों द्वारा ग्राम स्तर पर सेवा मूल्यांकन और सत्यापन अभ्यास किए गए। उन निष्कर्षों और सुझावों को जिला सुधार योजना में शामिल कर राज्य सरकार को प्रस्तुत किया गया। श्री कादरी ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामुदायिक जागरूकता पर भी विशेष बल दिया गया जिसमें लगभग सात लाख महिलाओं को शामिल कर बैठकें, कार्यशालाएं और अभियान आयोजित किए गए। इनका उद्देश्य जल संरक्षण, कुशल जल उपयोग, स्रोत स्थिरता और जल अपव्यय में कमी लाना था। उत्तरदायित्व बढ़ाने के लिए, जिले ने एक सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया है, जिसके तहत हेल्पलाइन, ईमेल, जन प्रतिनिधियों और सरकारी मंचों सहित कई माध्यमों से शिकायतें प्राप्त की जाती हैं। हुगली जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि पेयजल संबंधी शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए प्रत्येक सप्ताह विशेष जन सुनवाई दिवस आयोजित किए जाते हैं। जल अपव्यय रोकने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए अवैध जल कनेक्शनों और अनधिकृत उपयोग के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि जन प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के साथ जिला जल एवं स्वच्छता समिति और जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं ताकि पेयजल प्रबंधन कार्यान्वयन की समीक्षा की जा सके, चिंताओं का समाधान हो और सुधार के उपाय किए जा सकें। इन प्रयासों से ग्रामीण पेयजल प्रणालियों में सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता, सेवा वितरण और जन विश्वास में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

  • छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले के जिला कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने बताया कि जल आपूर्ति प्रणाली के कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अधिकांश योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष कार्य आवश्यक मंजूरी के बाद, विशेष रूप से वन और बाघ अभ्यारण्य क्षेत्रों में, पूर्ण होने की उम्मीद है। प्रभावी संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए, योजना स्थिरता, समन्वय गतिविधियों, भुगतान संबंधी मुद्दों और सेवा वितरण में सुधार पर ध्यान केंद्रित करते हुए, नियमित रूप से महीने में दो बार जिला जल एवं स्वच्छता मिशन बैठक आयोजित की जा रही हैं। जिले ने ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सामुदायिक स्वामित्व को मजबूत बनाया है, और सेवा प्राप्ति आधार पर उपयोगकर्ता शुल्क ऑनलाइन एकत्र किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति संपत्तियों के दैनिक संचालन एवं रखरखाव का दायित्व सौंपा गया है। स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक एकजुटता द्वारा जागरूकता उत्पन्न करने पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें महिलाएं जल प्रशासन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इन पहल में शामिल सरपंचों और सामुदायिक प्रतिनिधियों में दो-तिहाई से अधिक महिलाएं हैं। एक और उल्लेखनीय सफलता दूरस्थ आदिवासी बस्ती में सौर ऊर्जा संचालित एकल ग्राम योजना रही है, जिसने दुर्गम भूभाग में पेयजल की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। लोगों ने इस पहल की व्यापक सराहना की है और इसने दर्शाया है कि कैसे सामुदायिक भागीदारी, नवीकरणीय ऊर्जा और विकेंद्रीकृत प्रबंधन सतत ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण में योगदान दे सकते हैं।

  • फतेहगढ़ साहिब, पंजाब की उपायुक्त डॉ. सोना थिंद ने जिले की 100 प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन कवरेज की सफल उपलब्धि का उल्लेख किया जिससे 429 गांवों के सभी 78,475 ग्रामीण परिवारों को नल से पानी मिल रहा है, साथ ही इससे स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित हो रही है। इसी क्रम में, जिले में सेवा गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हुए लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को प्रति दिन 70 लीटर (एलपीसी) से अधिक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जो जलजीवन मिशन के 55 लीटर प्रति दिन के मानक से अधिक है। भूजल स्तर में कमी और जल गुणवत्ता संबंधी चिंताएं दूर करने के लिए, जिले ने राजपुरा वितरिका से जल प्राप्त करने वाली एक बड़ी 12 दस लाख लीटर प्रति दिन धरातलीय जल परियोजना लागू की है। यह परियोजना 92 गांवों में जल प्रदान करती है और एक व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क द्वारा 86 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराकर फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में चिंता में कमी लाकर उन्हें लाभान्वित कर रही है। जिले ने निरंतर सेवा वितरण और शिकायतों के त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए आईओटी-आधारित रीयल-टाइम निगरानी प्रणाली (इंटरनेट से जुड़े सेंसर और उपकरणों का उपयोग कर किसी भी भौतिक प्रक्रिया, पर्यावरण या मशीन की स्थिति का तुरंत डेटा एकत्रीकरण और विश्लेषण) और एक समर्पित शिकायत निवारण तंत्र भी अपनाया है। नियमित जल आपूर्ति प्रबंधन बैठकों, ग्राम पंचायतों और ग्राम जल आपूर्ति समितियों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी और सुनियोजित योजना ने जल आपूर्ति प्रणालियों में स्थानीय स्वामित्व मजबूत बनाया है। जिले में जल गुणवत्ता निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके तहत राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं नियमित परीक्षण करती हैं और महिला नेतृत्व वाली सामुदायिक निगरानी के लिए फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग किया जाता है। धरातलीय जल अवसंरचना, डिजिटल निगरानी, ​​सामुदायिक भागीदारी और कठोर गुणवत्ता परीक्षण द्वारा जिले ने जल जीवन मिशन के तहत सुरक्षित और विश्वसनीय पेयजल सेवाएं बनाए रखने के लिए एक स्थायी मॉडल विकसित किया है।

  • उत्तरी और मध्य अंडमान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपायुक्त श्री सुशांत पाधा ने जल जीवन मिशन के तहत जिले के सभी गांवों और लगभग 24 हजार 400 परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने की उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगभग 5.2 करोड़ रुपये के परिव्यय से कुल आठ जलजीवन मिशन योजनाएं पूरी की गईं, जिससे सभी ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित हुई। जिले की विशिष्ट द्वीपीय भौगोलिक स्थिति और बार-बार ग्रीष्म ऋतु जल में कमी को देखते हुए, जल उपलब्धता की समीक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता उपायों की योजना बनाने के लिए जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की मासिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं। चर्चाओं में मौजूदा जल स्रोतों के पुनरुद्धार, तालाबों, रिंग वेल और जल शोधन संयंत्रों के निर्माण के साथ ही पर्यावरण प्रभाव आकलन की मंजूरी में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, क्योंकि जिले के व्यापक वन क्षेत्र के कारण अक्सर परियोजना कार्यान्वयन में देरी होती है। मौसमी जल संकट से निपटने के लिए, जिले ने ग्राम स्तर पर जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण कर और  अन्य विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय द्वारा स्थानीय जल सुरक्षा बढ़ाकर एक विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण अपनाया है। प्रशासन जलस्रोतों की पहचान और अध्ययन करने, भूजल की उपलब्धता आकलन करने और पुनर्भरण उपायों में सुधार के लिए इसरो के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र के साथ मिलकर काम कर रहा है। जिले में जल गुणवत्ता निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके तहत जल गुणवत्ता सूचकांक से लैस प्रयोगशालाओं द्वारा नियमित रूप से नमूनों का परीक्षण किया जाता है और पेयजल स्रोतों की निरंतर निगरानी की जाती है। डिजिटल संचार प्लेटफार्मों और स्थानीय हितधारक नेटवर्क द्वारा समर्थित एक सक्रिय शिकायत निवारण तंत्र, रिसाव-रहित सेवा वितरण पर विशेष ध्यान देने के साथ ही, शिकायतों के शीघ्र समाधान को सुनिश्चित करने में मदद करता है। द्वीपीय जिले में जल संरक्षण, सामाजिक जल लेखापरीक्षा, सामुदायिक प्रशिक्षण और प्रिंट और सोशल मीडिया द्वारा व्यापक रूप से जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि जल के दायित्वपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके और दीर्घकालिक जलस्रोत स्थिरता मजबूत की जा सके।

अपने समापन संबोधन में , राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, श्री कमल किशोर सोन ने जिलों की प्रस्तुतियों की सराहना की और सभी मिशन निदेशकों से आग्रह किया कि वे आगामी कौशल विकास और नल जल मित्र कार्यक्रम की चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने इसके लिए राज्य कौशल विकास विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने और 21 सितंबर 2026 को निर्धारित आभासी बैठक से पहले अपने सुझाव साझा करने को कहा। श्री सोन ने कहा कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 2 अक्टूबर 2026 से ग्रामीण जल आपूर्ति स्रोतों की जियो-टैगिंग शुरू करने की सलाह दी जाती है। उन्होंने 2 अक्टूबर 2026 को अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों में जल अर्पण गतिविधियां आयोजित करने और भाग लेने वाली ग्राम पंचायतों का विवरण 20 सितंबर 2026 तक विभाग के साथ साझा करने को कहा। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 2 अक्टूबर 2026 से मानसून के बाद जल आपूर्ति स्रोतों का परीक्षण शुरू करने का भी निर्देश दिया गया। जल जीवन मिशन द्वितीय चरण के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में सभी सहभागी राज्यों और जिलों के प्रयासों की सराहना के साथ बैठक संपन्न हुई।

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पीके/केसी/एकेवी/केएस


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