गृह मंत्रालय
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल में राजभाषा विभाग ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं
'हिंदी शब्द-सिंधु' में 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द जुड़ने से राजभाषा हिंदी और लचीली बनी
‘हिंदी शब्द-सिंधु’ अब 8 लाख शब्दों तक पहुँचा, 2029 तक यह विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश बनेगा
भाषाई विवाद खड़ा करने वालों को गृह मंत्री का संदेश – बच्चे अपनी मातृभाषा में ही भारत को सही ढंग से समझ सकते हैं
मोदी सरकार भारतीय भाषाओं को शासन, विज्ञान और साहित्य में एक-दूसरे से जोड़कर उन्हें और समृद्ध बना रही है
राजभाषा हिंदी का जुड़ाव देशभर की सभी भाषाओं से है, मैं गुजराती भाषी हूँ, फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर काम करने में हिंदी के कारण कभी कोई कठिनाई नहीं हुई
माँ के दुलार और बहन-भाई के प्यार को मातृभाषा के सिवाय कोई समझ नहीं सकता
मोदी सरकार ने मातृभाषा के साथ एक और भारतीय भाषा सीखने को बल दिया, क्योंकि दूसरी भारतीय भाषा सीखने का अर्थ है 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' से जुड़ना
जब व्यक्ति अपनी मातृभाषा में सोचता, विश्लेषण करता और सृजन करता है, तो उसका परिणाम सदैव बेहतर होता है
राजभाषा विभाग ने वीर सावरकर जी के गढ़े अनेक शब्दों को 'हिंदी शब्द सिंधु' में जोड़ने का काम किया
भाषाएँ अनेक रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं, भावना भारतीय रहनी चाहिए; बोलियाँ अनेक रहें, भारत की आवाज़ एक रहनी चाहिए
मोदी सरकार में 2019 से अब तक राजभाषा समिति के चार खंड राष्ट्रपति जी को सौंप दिए गए हैं और पाँचवाँ खंड तैयार है
AI आधारित ‘कंठस्थ 2.0’ को पाँच करोड़ से अधिक वाक्यों के साथ विदेशियों के लिए भी खोला
केन्द्रीय गृह मंत्री ने राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्कार भी प्रदान किए
गृह मंत्री ने ‘शिव अनादि हैं, अनंत हैं’, ‘भारतीय ज्ञानतंत्र : स्रोत और स्वरूप’, ‘अँधेरों से उजालों तक’, ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित ‘राजभाषा भारती’ की विशेष स्मारिका, तथा ‘वंदे मातरम के 150 अध्याय’ प्रकाशनों का विमोचन किया
प्रविष्टि तिथि:
14 SEP 2026 5:14PM by PIB Delhi
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस, उप-मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे एवं श्रीमती सुनेत्रा पवार, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय एवं श्री बंडी संजय कुमार और राजभाषा विभाग की सचिव श्रीमती अंशुली आर्या सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मणिकंचन योग है कि आज हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी दोनों है। उन्होंने कहा कि विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश भारतीय भाषाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे और मार्ग की बाधाओं का हरण करेंगे। गृह मंत्री ने इस अवसर पर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्मरण करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक महाराज ने की थी। उन्होंने कहा कि तिलक महाराज ने इस देश की नब्ज सही पकड़ी थी। उन्होंने गहराई से समझा था कि इस देश में जागरूकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद इसकी संस्कृति और इसके इतिहास के माध्यम से ही लाया जा सकता है। इसलिए उन्होंने गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाने की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि देखते-देखते ये दोनों उत्सव पूरे देश में मनाए जाने लगे। इन दोनों उत्सवों से अंग्रेजों को बहुत परेशानी हुई। तिलक महाराज ने इन दोनों उत्सवों के माध्यम से देशभक्ति का बड़ा ज्वार पैदा किया। श्री शाह ने कहा कि महाराष्ट्र की भूमि परंपराओं और विशाल सोच की भूमि है। उन्होंने कहा कि जब भक्ति आंदोलन हुआ, तब महाराष्ट्र की भूमि के अनेक संतों ने ऐसी रचनाएं कीं, जिनसे देशभर में भक्ति आंदोलन को बल मिला। यह छत्रपति शिवाजी महाराज जी की भूमि है, जिन्होंने स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा को स्वराज का मूल अंग बनाया। शासन में मराठी को महत्व देकर उन्होंने अपनी भाषा का कोष निर्मित किया। इसी माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज और हिंदवी स्वराज के काल तक यहाँ का शासन चलता रहा।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज कार्यक्रम में हिंदी शब्द संसाधन, हिंदी टंकण और आशुलिपि के प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। गृह मंत्री ने राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्कार भी प्रदान किए। उन्होंने राजभाषा कीर्ति सम्मान और राजभाषा गौरव पुरस्कार प्राप्त करने वालों को बधाई दी। श्री शाह ने कहा कि आज ‘शिव अनादि हैं, अनंत हैं’, ‘भारतीय ज्ञानतंत्र : स्रोत और स्वरूप’, ‘अँधेरों से उजालों तक’, राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित राजभाषा विभाग की पत्रिका ‘राजभाषा भारती’ की विशेष स्मारिका, तथा ‘वंदे मातरम के 150 अध्याय’ जैसे प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ कोई साधारण गीत नहीं है। यह घनघोर गुलामी के कालखंड में भारतीय चेतना को जागृत करने का बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी का महान प्रयास था। उन्होंने अपनी कविता से भारत की सोई हुई चेतना को झकझोरने का काम किया। ‘आनंदमठ’ में लिखा गया उनका गीत ‘वन्दे मातरम्’ देखते-देखते पूरे भारत में स्वतंत्रता की उद्घोषणा बन गया। ‘वन्दे मातरम्’ की इस उद्घोषणा के जरिए बंकिमचंद्र जी ने न केवल स्वतंत्रता प्राप्ति की उत्कंठा और तीव्र भावना को जागृत किया, बल्कि भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव भी डाली। श्री शाह ने कहा कि दुर्भाग्य से बाद में ‘वन्दे मातरम्’ के टुकड़े कर दिए गए। स्वतंत्रता के बाद भी इसे इसके पूर्ण स्वरूप में स्वीकार करने में देश की संसद को लगभग 80 वर्ष लग गए। उन्होंने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी जी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ को पुनः उसके पूर्ण स्वरूप और पूर्ण गौरव के साथ सरकारी समारोहों में गाए जाने की पहल की।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष और छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम आगामी दिनों में राजभाषा और भारतीय भाषाओं की यात्रा को आगे बढ़ाएंगे। महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति को नमन करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यहाँ मराठी का सम्मान है और होना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ही सबसे पहले मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। महाराष्ट्र की भूमि पर कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़, वारली सहित अनेक भाषाओं का भी विकास हुआ, उन्हें सम्मान और स्वीकृति भी मिली। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में महाराष्ट्र ही सबसे बड़ा बहुभाषी प्रदेश है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्रियों को महाराष्ट्र शासन में सभी को स्वीकार करने वाला तंत्र स्थापित करने पर बधाई भी दी।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने आचार्य विनोबा भावे को उद्धृत करते हुए कहा कि “यदि मैंने हिंदी का सहारा न लिया होता, तो कश्मीर, असम और केरल के गाँव-गाँव जाकर भूदान-ग्रामदान का क्रांतिपूर्ण संदेश अपनी जनता तक न पहुँचा सकता। यदि मैं किसी अन्य भाषा का सहारा लेता, तो गाँवों में काम ही नहीं कर पाता। राजभाषा ही थी जिसने मुझे हर गाँव के साथ संवाद करना सिखा दिया।” गृह मंत्री ने कहा कि राजभाषा का यह जुड़ाव देशभर की सभी भाषाओं के साथ है, क्योंकि ये सभी भाषाएँ सदियों से देश की बोलचाल में रही हैं और सैकड़ों वर्षों से परस्पर व्यवहार में हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद गुजरात से आते हैं और गुजरात में हिंदी नहीं, गुजराती बोली जाती है। किंतु जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का दायित्व दिया गया, तब देशभर में काम करने में उन्हें कोई कठिनाई नहीं हुई, क्योंकि वह हिंदी समझते और बोलते हैं। उन्होंने कहा कि राजभाषा ने उन्हें देशभर में कार्य करने का बहुत बड़ा अवसर दिया।
श्री अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र वीर सावरकर की भूमि है। सावरकर जी अपने समय के सबसे विद्वान भाषा-शास्त्री थे। उन्होंने अनेक ऐसे शब्दों की रचना की, जो भारतीय भाषाओं में उपलब्ध ही नहीं थे। उन सभी शब्दों को मराठी, राजभाषा और देश की अन्य भाषाओं में सहज स्वीकृति मिली। उन्होंने तिलक जी के पत्र को आत्मसात कर मराठी भाषा का शुद्धीकरण करने का कार्य भी किया। श्री शाह ने कहा कि वीर सावरकर जी ने जितने भी शब्द संशोधित किए और रचे, राजभाषा विभाग ने उन सभी को ऑनलाइन शब्दकोश ‘हिंदी शब्द-सिन्धु’ में स्वीकार कर सावरकर जी का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने सोच-समझकर ही 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार करने का निर्णय किया था। उन्होंने कहा कि जबसे मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से राजभाषा विभाग ने ढेरों उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने सबसे बड़ा कार्य नई शिक्षा नीति में किया है। मोदी जी ने प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा सीखना अनिवार्य कर दिया है। कोई भी बच्चा अपनी मातृभाषा सीखे बिना बड़ा व्यक्ति नहीं बन सकता, क्योंकि माँ के दुलार और भाई-बहन के प्यार को वह मातृभाषा के बिना समझ नहीं सकता। अपनी भूमि, अपनी भाषा, अपने धर्म, अपनी परंपराओं, अपनी संस्कृति और संस्कारों से उसका लगाव मातृभाषा के माध्यम से ही संभव है। इसलिए मोदी जी ने प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को अनिवार्य किया। गृह मंत्री ने कहा कि मातृभाषा सीखने के बाद ही बच्चा आगे बढ़ सकता है। उसकी सोच की प्रक्रिया मातृभाषा में शुरू होती है। जब व्यक्ति सोचता है, विश्लेषण करता है और निर्णय करता है, तो यदि वह यह सब मातृभाषा में करता है, तो सोच बेहतर होती है, विश्लेषण बेहतर होता है और निर्णय भी बेहतर होता है। श्री शाह ने कहा कि इसके साथ-साथ मोदी जी ने एक और भारतीय भाषा सीखना भी अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा सीखने का विरोध करने वालों को पता नहीं कि वे कितना बड़ा पाप कर रहे हैं। बच्चों को भारतीय भाषाएँ सीखनी चाहिए। दूसरी भारतीय भाषा सीखने का अर्थ है कि वह बच्चा अपने आप ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लक्ष्य से जुड़ जाएगा। अपनी मातृभाषा सीखने के साथ वह एक अन्य भारतीय भाषा भी सीखेगा, तो वह भारतीयता से अपने आप जुड़ जाएगा और सभी संकीर्ण विचारों से मुक्त होकर भारत का सच्चा सिपाही बनेगा। उन्होंने कहा कि हम भारत की हर भाषा को समृद्ध करना चाहते हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमने 2019 में तय किया था कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के हर राज्य में इसे बारी-बारी से आयोजित किया जाएगा और तब से आज यह छठा सम्मेलन है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में 2019 से अब तक राजभाषा समिति के चार खंड राष्ट्रपति जी को सौंपे जा चुके हैं, पाँचवाँ खंड अब तैयार हो चुका है। अब तक कुल 13 खंड हुए हैं, जिनमें से 4 खंड मोदी जी के शासनकाल में हुए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी जब भी विश्व के किसी बड़े मंच पर या किसी देश में गए और उन्होंने भाषण दिया, तो राजभाषा तथा भारतीय भाषाओं में ही दिया। बड़े-बड़े वैश्विक मंचों पर देश के प्रधानमंत्री को विदेशी भाषा की जगह अपनी भाषा में बोलते सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा होता है। मोदी जी ने कई देशों के विश्वविद्यालयों में भी राजभाषा पढ़ाने की व्यवस्था करवाई है। भारत सरकार के पाँच लाख से अधिक कर्मचारियों का प्रशिक्षण हो चुका है। हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘कंठस्थ 2.0’ को पाँच करोड़ से अधिक वाक्यों के साथ विदेशियों के लिए भी खोला है।
गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि लीला राजभाषा और लीला प्रवाह (LILA - Learn Indian Languages through Artificial Intelligence) के बहुत अच्छे परिणाम मिले हैं। 51,000 शब्दों से आरंभ हुआ ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ अब 8,00,000 शब्दों तक पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि 'हिंदी शब्द सिंधु' में 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्दों को जोड़ हिंदी को और लचीला बनाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक यह शब्दकोश विश्व की सभी भाषाओं में सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ हिंदी में रिक्तता थी और किसी चीज़ के लिए शब्द नहीं था, वहाँ हमने स्थानीय भाषाओं के 50,000 से अधिक शब्दों को स्वीकार कर राजभाषा को लचीला बनाया है। इसमें तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली, ओड़िया सहित अन्य भाषाएं हैं। हर भाषा से 50,000 से अधिक शब्दों को ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने ‘भारती - बहुभाषी अनुवाद सारथी’ का निर्माण किया है। साथ ही, ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की शुरुआत की गई है।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं को हम शासन और विज्ञान की भाषा बनाना चाहते हैं, साहित्य को समृद्ध करना चाहते हैं और भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे से जोड़कर उनका बड़ा संपुट तैयार करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जेईई, नीट या स्नातक प्रवेश परीक्षा हो, इन परीक्षाओं को 13 भाषाओं में आयोजित करने का कार्य भी हमने किया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि भाषाओं के बीच विवाद खड़ा करने वालों से वह कहना चाहते हैं कि बच्चा अपनी मातृभाषा में ही भारत को सही समझ सकता है। यदि वह विदेशी भाषा में समझने का प्रयास करेगा, तो भारत को समझने में भूल कर बैठेगा। इसलिए हम सब राजनीतिक मतभेद छोड़कर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से देश की जनता के लिए जो ‘पंचप्रण’ रखे हैं, उनमें एक प्रण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का भी है।
गृह मंत्री ने कहा कि भाषाओं के विषय में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर से बड़ा व्यक्तित्व कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था - “भारतीय संस्कृति और भारतीय साहित्य एक विकसित शतदल (सौ पंखुड़ियों वाले) कमल की तरह है, जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी हमारी प्रादेशिक भाषाएँ हैं। किसी भी एक पंखुड़ी के नष्ट होने से कमल का सौंदर्य नष्ट हो जाएगा। प्रादेशिक भाषाएँ रानी बनकर अपने-अपने प्रांत में विराजमान रहें और इन सभी भाषाओं के बीच हिंदी मध्यमणि बनकर इस शतदल कमल का सौंदर्य बढ़ाती रहे।” गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि कविवर रवींद्रनाथ टैगोर ने बहुत सोच-समझकर यह बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाएँ अलग-अलग स्वर अवश्य हैं, किंतु गीत एक ही है — राष्ट्रभक्ति का गीत एक है, हमारी संस्कृति का गीत एक है। भाषाएँ अनेक रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं। भावना भारतीय रहनी चाहिए। बोलियाँ अनेक रहें, पर भारत की आवाज़ एक रहनी चाहिए।
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(रिलीज़ आईडी: 2310109)
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