गृह मंत्रालय
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण एवं कार्यप्रणाली दोनों में आमूल-चूल परिवर्तन आया है

पहले आपदा को केवल राहत एवं पुनर्वास की दृष्टि से देखा जाता था, आज हम जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली व Zero Casualty’, के एक नए युग में हम आगे बढ़ रहे हैं

हमने कई आपदाओं का Zero Casualty के साथ सफलतापूर्वक सामना किया, जो एक बड़ी उपलब्धि है

मोदी सरकार का लक्ष्य आपदा रोधी गांव और आपदा रोधी शहर बनाना है, इसे प्राथमिकता में रखते हुए आगे बढ़ना होगा

NIDM आज अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है, इसमें विश्वविद्यालयों को जोड़कर नए क्षितिज तलाशने होंगे

पर्यावरण संरक्षण, जोखिम न्यूनीकरण, रेजिलियंस और व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के कारण भारत धीरे-धीरे विश्व में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है

प्रशिक्षण और गाइडलाइन से आगे बढ़कर आपदा के सामने डटकर खड़े होने की व्यवस्था निर्मित करने में भी 'होल ऑफ गवर्नमेंट' अप्रोच की दिशा में आगे बढ़ें

ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान के नए प्रयोगों के दौर में NIDM और NDMA दोनों की सार्थकता और आवश्यकता आने वाले दिनों में और बढ़ेगी

आपदा प्रबंधन के लिए बने मोबाइल एप्लिकेशन को उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा तक प्रचारित किया जाए

मोदी जी ने आपदा निधि के वितरण को भी वैज्ञानिक प्रक्रिया के साथ संचालित करने का निर्णय लिया

जिस प्रकार आपदा से निपटने में ‘Whole of Government’ अप्रोच अपनाई, उसी प्रकार आपदा प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाने में भी हमें इसी अप्रोच के साथ आगे बढ़ना होगा

मोदी सरकार में SDRF के फंड में लगभग चार गुना और NDRF के फंड में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई

मोदी जी ने आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण मे परिवर्तन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष बल दिया है

एक समय NIDM कृषि भवन के एक कोने में सिमटा हुआ था, अटल जी ने इसे गृह मंत्रालय के अधीन लाकर नया जीवन दिया और मोदी जी ने इसमें प्राण फूंककर भूमि आवंटित की, आज NIDM का बदला हुआ स्वरूप पूरे देश के सामने है

सभी स्टेकहोल्डर अपने-अपने विभाग में इन एजेंडों के क्रियान्वयन के लिए एक फोकस्ड सेल बनाएं और विभाग प्रमुख हर तीन माह में एक बार बैठक कर इसे प्राथमिकता दें

प्रविष्टि तिथि: 10 SEP 2026 6:08PM by PIB Delhi

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव, भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) के निदेशक और NIDM के कार्यकारी निदेशक सहित कई केन्द्रीय मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली दोनों में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन की संपूर्ण कार्यप्रणाली को बदलकर ‘Zero Casualty’ का लक्ष्य निर्धारित किया और देश को इस स्थिति तक पहुँचाया। हमने कई आपदाओं का Zero Casualty’  के साथ सफलतापूर्वक सामना भी किया है जो एक बड़ी उपलब्धि है। श्री शाह ने कहा कि पहले आपदा को केवल राहत एवं पुनर्वास की दृष्टि से देखा जाता था। आज हम जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा Zero Casualty’  — इन तीनों स्तंभों के साथ एक नए युग में प्रवेश कर चुके हैं। यह हम सबके लिए गर्व का विषय है। इसी दिशा में ‘Whole of Government’ अप्रोच हमारी कार्य-संस्कृति का अभिन्न अंग बनता जा रहा है। आपदा आने पर सरकार के सभी विभाग सक्रिय रूप से कार्य करते हैं ,अब हमें नए अनुसंधान के बल पर इस प्रक्रिया को और तीव्रता से आगे बढ़ाना चाहिए और सतत निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। जिस प्रकार आपदा से निपटने में ‘Whole of Government’ अप्रोच अपनाई गई है, उसी प्रकार आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में भी हमें ‘Whole of Government’ अप्रोच के साथ आगे बढ़ना होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण में आए परिवर्तन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि आपदा की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय अंततः पर्यावरण संरक्षण ही है। पर्यावरण संरक्षण, जोखिम न्यूनीकरण, रेजिलियंस (लचीलापन) और व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि—इनके कारण भारत धीरे-धीरे विश्व में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है। मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment), प्रो-प्लैनेट पीपल और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) जैसी पहल आपदा रोकथाम में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। गृह मंत्री ने कहा कि ‘शून्य हताहत’ (Zero Casualty) दृष्टिकोण को केवल आपदा स्थल पर ही लागू नहीं करना है। आपदा घटित होने से रोककर भी  Zero Casualty प्राप्त की जा सकती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सभी राष्ट्रध्यक्षों से हटकर ऐसे सुरक्षित एवं संतुलित विश्व की कल्पना की है।

श्री अमित शाह ने कहा कि एक समय था जब NIDM का पूर्ववर्ती रूप (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र) कृषि भवन के एक कोने में लगभग निष्क्रिय पड़ा हुआ था लेकिन वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इसे नया जीवन प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। विषय की व्यापकता एवं विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस संस्थान को गृह मंत्रालय के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस संस्थान में प्राण फूँकने का महत्वपूर्ण कार्य किया। NIDM का वर्तमान स्वरूप बदली हुई एवं सुदृढ़ भूमिका के साथ देश के समक्ष आया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में NIDM और NDMA दोनों की सार्थकता एवं प्रासंगिकता और अधिक बढ़ने वाली है। ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, विज्ञान के नए-नए अनुप्रयोगों और विस्तारित क्षेत्रों के कारण नई प्रकार की आपदाओं का उदय भी संभव है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, नीति निर्धारण से लेकर प्रशिक्षण एवं कार्यान्वयन तक की जिम्मेदारी इन दोनों संस्थानों के बीच साझा रूप से विभाजित है। कुछ क्षेत्रों में दोनों संस्थान मिलकर कार्य भी कर रहे हैं।

श्री अमित शाह ने निर्देश दिए कि सभी हितधारक अपने-अपने विभागों में एजेंडे के क्रियान्वयन के लिए एक सेल गठित करें और विभागीय प्रमुख कम-से-कम तीन माह में एक बार इसकी समीक्षा बैठक अवश्य आयोजित कर इस विषय को प्राथमिकता दें।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि NDMA और NIDM को दुनिया भर में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में हो रहे शोध कार्यों का अध्ययन कर उनके निष्कर्षों को भारत में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार लागू करने का प्रयास करना चाहिए। कृषि विभाग को पाकिस्तान की तरफ से आने वाले टिड्डे दलों के हमलों (Locust Swarm Attacks) से बचाव की स्थायी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए विदेशों में अपनाए जा रहे बेहतरीन उपायों को देश में लागू किया जाना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण में गंभीरता होनी चाहिए। आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो इस विषय के प्रति सही मायने में गंभीर हों।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि NIDM एवं NDMA मिलकर देश भर के लिए दिशानिर्देश जारी करें। इनमें प्रत्येक आपदा के संबंध में क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और कैसे करना चाहिए—इसकी स्पष्ट रूपरेखा हो। NIDM प्रशिक्षण का कार्य करे और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) एवं अन्य संबंधित एजेंसियाँ मिलकर इन दिशानिर्देशों को धरातल पर उतारें।

श्री अमित शाह ने कहा कि अनुसंधान के माध्यम से आपदा के कारणों को रेखांकित करते हुए एक दस्तावेज तैयार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर प्रभावी बचाव संभव हो सकता है। प्रत्येक आपदा के बाद NDMA एवं NIDM की एक संयुक्त टीम गठित की जाए, जिसमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) को भी सम्मिलित किया जाए। ये चारों संस्थाएँ मिलकर क्षति के कारणों का अध्ययन करें, एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।

श्री अमित शाह ने कहा कि NIDM अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन, प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग का एक राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। हमें इन चारों स्तंभों को और अधिक सशक्त बनाते हुए नए क्षितिजों का विकास करना है। अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण, नीति समर्थन एवं विभागीय सहयोग—इन चारों क्षेत्रों में अभी भी अछूते क्षितिज हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में हमें स्पर्श करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि NIDM ने इस दिशा में प्रयास भी किए हैं। ज्ञान एवं सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को विभागीय साइलोस से बाहर निकालने की आवश्यकता है। हमें आने वाले दिनों में विभागीय मर्यादाओं से ऊपर उठकर समन्वित रूप से कार्य करने की आदत विकसित करनी होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आपदा निधि के वितरण को भी वैज्ञानिक प्रक्रिया के साथ संचालित करने का निर्णय लिया है। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में लगभग चार गुना और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। पिछले 11 वर्षों में लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये इस क्षेत्र में व्यय किए गए हैं, यह एक बड़ी उपलब्धि है। 20 वर्षों के पश्चात् आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन किया गया। शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की परिकल्पना की गई और उसकी स्थापना भी की गई। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर डिजिटल आपदा डेटाबेस के निर्माण की शुरुआत हुई। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) को वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। साथ ही, 16वें  वित्त आयोग ने इस कालखंड के लिए दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जो मोबाइल एप्लिकेशन विकसित की गई है, उसे प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित करने की आवश्यकता है। NIDM को सशक्त बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। हाल ही में चार एकड़ भूमि भी आवंटित की गई है। संस्थान विश्व स्तर पर एक आदर्श मॉडल संस्थान के रूप में विकसित होने का प्रयास कर रहा है और इसके दोनों परिसर सुचारु रूप से कार्य कर रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना निस्संदेह सराहनीय है लेकिन हमारी प्राथमिकता आज भी देश के पाँच लाख गाँवों पर केंद्रित होनी चाहिए। इस प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए हम विश्व से जितना सीख सकें और विश्व हमसे जितना सीख सके—इसमें कोई आपत्ति नहीं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य आपदा रोधी गांव और आपदा रोधी शहर बनाना है, इसे प्राथमिकता में रखते हुए आगे बढ़ना होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने प्रति वर्ष NIDM की कम-से-कम वर्ष में एक शीर्ष स्तरीय बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित करने का प्रावधान किया जाने के निर्देश दिया ताकि बैठकें सार्थक एवं परिणामोन्मुखी हो सकें और लिए गए निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि इसी संस्थान के माध्यम से ज्ञान को क्षमता में, क्षमता को तैयारी में और तैयारी को परिणाम में परिवर्तित करें, ताकि ‘शून्य हताहत’ (Zero Casualty) का लक्ष्य हम सभी प्राप्त कर सकें।

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RK/RR/PR/PS


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