रक्षा मंत्रालय
रक्षा राज्य मंत्री का संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र के द्वितीय वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यान माला में विशेष संबोधन
नवाचार, आत्मनिर्भरता और नागरिक-सैन्य समन्वय द्वारा भारत को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया
प्रविष्टि तिथि:
01 SEP 2026 5:05PM by PIB Delhi
रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने 1 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित द्वितीय वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यान माला में राष्ट्र निर्माण में अगली पीढ़ी की क्षमता का लाभ उठाने विषय पर विशेष संबोधन दिया।
रक्षा राज्य मंत्री ने अपने संबोधन में बदलते वैश्विक सुरक्षा परिवेश में सैन्य बलों में तालमेल -अंतर्संचालनीयता, एकीकरण, नागरिक-सैन्य समन्वय तथा सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली के महत्व पर बल दिया। श्री सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारत निरंतर अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाते हुए आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि रक्षा बलों की प्रतिबद्धता, आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल से सशक्त एवं सुरक्षित भारत का मजबूत आधार तैयार हुआ है।

भारत की युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए श्री सेठ ने कहा कि भारतीय युवा- रक्षा, उद्योग, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, कृषि, प्रौद्योगिकी और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आकांक्षा मेक इन इंडिया से बढ़कर अब मेक फॉर द वर्ल्ड हो गई है, जो आयात पर निर्भरता समाप्त कर देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के निर्माण और इनके निर्यात के बदलाव को दर्शाती है।
रक्षा राज्य मंत्री ने भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्वदेशी उद्योगों की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए भविष्य के युद्धों की तैयारी में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिकी और उन्नत प्रौद्योगिकियों में राष्ट्रीय क्षमता मजबूत बनाने पर जोर दिया।
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चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में अब सीमा और क्षेत्र की रक्षा के अलावा आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, समुद्री रक्षा, महत्वपूर्ण आधारभूत अवसंरचना, आपूर्ति श्रृंखला की रक्षा सहित भ्रामक सूचनाओं से सुरक्षा भी शामिल है। ऑपरेशन सिंदूर सहित हाल के अभियानों की चर्चा करते हुए उन्होंने समन्वित योजना और सैन्य तालमेल के साथ इसे अंजाम देने के महत्व पर जोर दिया।
थल सेना उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन सहित अन्य वक्ताओं ने असैन्य-सैन्य संयोजन, बहु-क्षेत्रीय युद्ध, उभरती प्रौद्योगिकियों, एकजुटता और समन्वय तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए भारत की तैयारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। व्याख्यानों में 2047 में विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ बढ़ रहे देश में राष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरदर्शी, एकीकृत और नवाचार-संचालित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया।
रक्षा राज्यमंत्री ने इस अवसर पर "एन एरा इन ऑलिव ग्रीन: जनरल अनिल चौहान, ड्यूटी, लीडरशिप एंड लेगेसी" नामक पुस्तक का भी विमोचन किया।
द्वितीय वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यानमाला एकीकृत रक्षा स्टाफ (सिद्धांत, संगठन और प्रशिक्षण) उप प्रमुख वाइस एडमिरल राजेश धनखड़ के समापन भाषण के साथ संपन्न हुई।
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पीके/केसी/एकेवी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2305667)
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