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राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, कोट्टायम ने होम्योपैथी में एआई के जिम्मेदार उपयोग पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया


सेमिनार में होम्योपैथिक अनुसंधान में एआई-संचालित नैदानिक निर्णय लेने में मदद,  व्यक्तिगत देखभाल और नैतिक फ्रेमवर्क पर चर्चा की गई

प्रविष्टि तिथि: 31 AUG 2026 5:44PM by PIB Delhi

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच), आयुष मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान (एनएचआरआईएमएच), कोट्टायम ने "नैदानिक अभ्यास और होम्योपैथी में कृत्रिम मेधा  (एआई) का अनुप्रयोग" विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। "बुद्धि और जूनून का संगम"  विषय के तहत आयोजित इस सेमिनार में स्वास्थ्य देखभाल और होम्योपैथिक अनुसंधान में एआई के उभरते अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श करने के लिए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और छात्रों ने भाग लिया।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। अपने संबोधन में मंत्री महोदय ने स्वास्थ्य सेवा में एआई की बढ़ती प्रासंगिकता और विशेष रूप से होम्योपैथी के क्षेत्र में इसके जिम्मेदार अनुप्रयोग पर जानकारीपूर्ण चर्चाओं के महत्व पर जोर दिया।

उद्घाटन सत्र को सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने संबोधित किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में एआई के जिम्मेदार अनुप्रयोग को सुनिश्चित करने के लिए शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों द्वारा इसकी क्षमताओं और नैतिक आयामों दोनों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

विचार-विमर्श के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि स्वास्थ्य सेवा में एआई के उपयोग को मानवीय देखरेख, वैज्ञानिक पुष्टि, डेटा की विश्वसनीयता और उचित नैतिक सुरक्षा उपायों का होना ज़रूरी है।

इस अवसर पर मनोरोग और मानसिक स्वास्थ्य में शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के साथ नौ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा अंतर-विषयक अनुसंधान और संस्थागत सहयोग के लिए सेवाभारती, एट्टुमानूर के साथ भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

एनएचआरआईएमएच के सहायक निदेशक (होम्योपैथी) एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. देबदत्त नायक ने बताया कि इस सेमिनार में भारत भर के लगभग 12 होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केरल के चिकित्सकों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। इससे स्वास्थ्य सेवा और होम्योपैथी में एआई पर शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए एक मंच मिला।

सीसीआरएच के उप महानिदेशक डॉ. के. सी. मुरलीधरन, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जनार्दनन नायर और एनएचआरआईएमएच, कोटायम की क्षेत्रीय वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ईश्वर दास ने भी सभा को संबोधित किया। तकनीकी कार्यक्रम में चार सत्र शामिल थे, जो नैदानिक निर्णय सहायता में एआई, होम्योपैथी में एआई के अनुप्रयोगों और नैदानिक-मौलिक अनुसंधान में एआई के नैतिक पहलुओं पर केंद्रित थे।

यह सेमिनार होम्योपैथिक अनुसंधान और नैदानिक अभ्यास में वैज्ञानिक नवाचार, अंतर-विषयक सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग के प्रति सीसीआरएच और एनएचआरआईएमएच, कोटायम की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पहल से शैक्षणिक और अनुसंधान नेटवर्क को और मजबूती मिलने तथा स्वास्थ्य सेवा एवं होम्योपैथी में एआई  द्वारा प्रस्तुत अवसरों और चुनौतियों पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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पीके/केसी / एसके/  डीए

 


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