ग्रामीण विकास मंत्रालय
उच्चस्तरीय अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल और यूएनडीपी ने भूमि प्रबंधन में भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भूमि संसाधन विभाग के साथ चर्चा की
भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने आर्थिक क्षमता को अनलॉक करने और नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए ‘भारत लैंड स्टैक’ और ‘भू-आधार’ को परिवर्तनकारी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) टूल के रूप में रेखांकित किया
तकनीकी विश्लेषण ने डीआईएलआरएमपी की उपलब्धियों को दर्शाया: 40.58 करोड़ से अधिक भूमि भूखंडों (लैंड पार्सल) को आवंटित किया गया 'भू-आधार' (यूएलपीआईएन) और भूमि अभिलेखों का लगभग शत-प्रतिशत कंप्यूटरीकरण पूरा
अफ्रीकी संघ, इथियोपिया, मलावी, रवांडा, सिएरा लियोन और जाम्बिया के प्रतिनिधियों ने नक्शा (NAKSHA) के तहत प्रौद्योगिकी अपनाने, ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण और शहरी भूमि मानचित्रण का अवलोकन किया
प्रविष्टि तिथि:
27 AUG 2026 6:34PM by PIB Delhi
अफ्रीकी संघ आयोग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, छह अफ्रीकी देशों (इथियोपिया, मलावी, रवांडा, सिएरा लियोन और जाम्बिया) के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने भू-प्रशासन में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) पर एक गहन तकनीकी संवाद के लिए कर्तव्य भवन-3, नई दिल्ली स्थित भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर), का दौरा किया।
इस अध्ययन यात्रा का उद्देश्य भूमि प्रशासन में भारत के अग्रणी डिजिटल परिवर्तन का अध्ययन करना था। इसमें मुख्य रूप से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी), यूनीक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन/ भू-आधार), नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एनजीडीआरएस) और शहरी बस्तियों के लिए 'नक्शा' (NAKSHA) पहल पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बुनियादी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में भूमि अभिलेख: आर्थिक मूल्य का सृजन
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए भूमि संसाधन विभाग के सचिव, श्री नरेंद्र भूषण ने औपनिवेशिक व पुरानी भूमि प्रशासनिक प्रणालियों से भारत के आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल इकोसिस्टम की ओर परिवर्तनकारी विकास यात्रा का रेखांकित विवरण दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जिस प्रकार डिजिटल पहचान ने आधार के माध्यम से भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की आधारशिला के रूप में कार्य किया, उसी प्रकार 14 अंकों का भू-आधार (यूएलपीआईएन) जिओस्पेशियल भूमि पहचान के रूप में अगला क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।
प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सचिव ने कहा:
“किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था में भूमि सबसे बड़ी और सबसे बुनियादी संपत्ति श्रेणी है। पारंपरिक प्रणालियों में, स्पष्ट स्थानिक स्वामित्व (स्पेशियल टाइटल्स) और इंटरऑपरेबिलिटी के बिना, भूमि का एक बड़ा हिस्सा डेड कैपिटल बना रहता है, जिसका लाभ नागरिक नहीं उठा पाते। डीआईएलआरएमपी और 'भारत लैंड स्टैक' के तहत हमारा दृष्टिकोण एक अटूट डिजिटल ट्रस्ट आर्किटेक्चर तैयार करना है। जीयो-रेफरेंस्ड भूमि अभिलेखों, सर्किल दरों, पंजीकरण और इंकंब्रेंसेस को एक एकीकृत इंटरऑपरेबल में जोड़कर, हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहाँ सबसे वंचित नागरिक या ग्रामीण भूस्वामी भी निर्बाध रूप से औपचारिक ऋण और मॉर्टगेज सुविधाओं का लाभ उठा सकता है। यह अनुभव और ढांचा अफ्रीका के हमारे साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए उपलब्ध है, ताकि पूरे ग्लोबल साउथ में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित समावेशी विकास को गति दी जा सके।“
तकनीकी गहन विश्लेषण: डीआईएलआरएमपी और बहु-स्तरीय 'भारत लैंड स्टैक'
तकनीकी सत्रों के दौरान, भूमि संसाधन विभाग के निदेशक (भूमि रिकॉर्ड), श्री अमित कुमार सिंह ने डीआईएलआरएमपी को संचालित करने वाले व्यापक सुधारों और तकनीकी ढांचे का एक समग्र विवरण प्रस्तुत किया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सामने रखी गई मुख्य बड़ी उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- देश भर में 99.90 प्रतिशत 'रिकॉर्ड्स ऑफ़ राइट्स' का कंप्यूटरीकरण पूरा।
- 97.43 प्रतिशत कैडस्ट्रल नक्शों (भू-मानचित्रों) का डिजिटलीकरण, जिसमें से 76.16 प्रतिशत भूखंडों (लैंड पार्सल) का पूर्ण जियो-रेफरेंसिंग संपन्न।
- कैडस्ट्रल नक्शों और अधिकार अभिलेखों के बीच 85.24 प्रतिसत स्पेशियल-टेक्स्टुअल एकीकरण हासिल।
- 40.58 करोड़ से अधिक भूखंडों को 14-अंकीय अल्फान्यूमेरिक 'भू-आधार' (यूएलपीआईएन) आवंटित।
- 98.96 प्रतिशत उप-पंजीयक कार्यालयों (एसआरओ) का कंप्यूटरीकरण, जिसमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा केंद्रीयकृत एनजीडीआरएस प्लेटफॉर्म अपनाया गया और 17 राज्य अपने राज्य-विशिष्ट डिजिटल पंजीकरण सॉफ्टवेयर का संचालन कर रहे हैं।
- राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) के तहत 94.11 प्रतिशत राजस्व न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण, जिससे संपत्ति के रिकॉर्ड पर रीयल-टाइम मुकदमेबाजी अंकन (मुकदमों की प्रविष्टि) संभव हुई।
प्रतिनिधिमंडल को 'भारत लैंड स्टैक' का विस्तृत अवलोकन कराया गया—यह एक एकीकृत, जीआईएस -आधारित फेडरेटेड आर्किटेक्चर है जो उपग्रह/ड्रोन इमेजरी, जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल सीमाओं, अधिकार अभिलेखों, संपत्ति पंजीकरण डेटा, मास्टर प्लानिंग/ज़ोनिंग नियमों, भवन निर्माण स्वीकृतियों, प्रतिबंधों/मुकदमों, सर्किल दरों और टैनेंसी विवरणों को एक साथ संयोजित करता है, ताकि सत्यता का एक एकल व प्रामाणिक डिजिटल स्रोत प्रदान किया जा सके।

अगली पीढ़ी का शहरी मानचित्रण: नक्शा (NAKSHA) कार्यक्रम
शहरी भूमि अभिलेख पहल को प्रस्तुत करते हुए, भूमि संसाधन विभाग के निदेशक (भूमि रिकॉर्ड), श्री श्याम कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को 'नक्शा' - (NAKSHA) (शहरी आवासों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) पायलट कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
प्रस्तुति में उच्च-सटीकता वाली सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए संपूर्ण कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया:
- सेंटीमीटर-लेवल की सटीक लोकेशन पाने के लिए एरियल ड्रोन पर 2D नादिर कैमरे, 5-कैमरा ऑब्लिक सिस्टम और लिडार (LiDAR) सेंसर लगाना।
- जटिल शहरी इलाकों के लिए ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेजरी (ओआरआई), डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) और 3D रियलिटी मॉडल तैयार करना।
- रियल-टाइम काइनेमैटिक (आरटीके) जीएनएसएस रोवर-बेस्ड ग्राउंड ट्रूथिंग, लोगों की भागीदारी से ग्राउंड वैलिडेशन और दावों/आपत्तियों का पारदर्शी समाधान।
- पायलट चरण में बड़ी प्रगति: 150 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में से 145 में एरियल फ्लाइंग पूरी हो गई है, जिससे कानूनी रूप से मान्य शहरी (अर्बन प्रॉपर्टी) संपत्ति कार्ड जारी किए जा रहे हैं।
विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूती
प्रतिनिधिमंडल ने डिजिटल गवर्नेंस के प्रति भारत के विशाल पैमाने, तकनीकी सटीकता और ओपन-आर्किटेक्चर दृष्टिकोण की सराहना की।
चर्चाओं के दौरान, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल संरचनात्मक बदलाव, टेन्योर सिक्योरिटी और कुशल डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण चाहने वाली अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अमूल्य रूपरेखा प्रदान करता है।

अफ़्रीकी संघ आयोग के अधिकारियों ने अफ़्रीका की व्यापक डिजिटल बदलाव की रणनीतियों और डेटा गवर्नेंस फ़्रेमवर्क के लिए भारत के जियोस्पेशियल इंटीग्रेशन की अहमियत पर जोर दिया।
इसके अलावा, भाग लेने वाले साझेदार देशों—जिन्में इथियोपिया, मलावी, रवांडा, सिएरा लियोन और जाम्बिया शामिल हैं—के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने संस्थागत अनुकूलन, कानूनी सामंजस्य, डेटा गोपनीयता और भूमि मानचित्रण के लिए ड्रोन-आधारित सर्वेक्षणों की तैनाती पर इंटरैक्टिव तकनीकी चर्चाओं में भाग लिया।
संयुक्त राष्ट्र और यूएनडीपी के आगंतुक दलों ने ग्लोबल कम्युनिटी के साथ ज्ञान साझा करने के प्रति भूमि संसाधन विभाग के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की सराहना की।

बैठक का समापन विश्व स्तर पर समावेशी, पारदर्शी और मजबूत भूमि प्रशासन ढाँचों को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता-निर्माण साझेदारियों और साउथ-साउथ सहयोग को गहरा करने की पारस्परिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2304011)
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