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सफाई कर्मचारी से लेकर मशीनों का उपयोग कर पेशेवर सफाई करने वाले उद्यमी तक: नमस्ते-सूय योजना ने हिमांशु को सुरक्षा और सम्मान से आजीविका अर्जित करने में सक्षम बनाया

प्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2026 7:27PM by PIB Delhi

समय पर प्रदान की गई वित्तीय सहायता और मशीनी उपकरणों तक पहुंच सफाई कर्मचारियों को असुरक्षित कार्यों से दूर जाने, स्वरोजगार अपनाने और गरिमापूर्ण ढंग से सुरक्षित आजीविका अर्जित करने में सक्षम बना सकती है।

ओबीसी लोहार समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 25 वर्षीय स्नातक हिमांशु ने नमस्ते योजना की स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के घटक के तहत मिली सहायता के माध्यम से इस बदलाव का अनुभव किया। गाजियाबाद के ग्राम नंदग्राम, मरियम नगर के निवासी हिमांशु अब स्वतंत्र रूप से ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन चलाते हैं और आसपास के क्षेत्रों में मशीनों से स्वच्छता सेवाएं प्रदान करते हैं।

हिमांशु ऐसे परिवार में पले-बढ़े, जहां आर्थिक कठिनाइयां रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे और परिवार को अक्सर बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। सबसे बड़े बेटे होने के नाते हिमांशु ने कम उम्र में ही अपने माता-पिता और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभाल ली। कठिन आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें अपने अधिक सुरक्षित भविष्य के सपनों को पूरा करने के साथ-साथ काम शुरू करने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने स्थानीय ठेकेदारों के अधीन स्वच्छता संबंधी कार्य शुरू किया, जिसमें कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई करना शामिल था। इस कार्य में शारीरिक थकान, अनियमित मजदूरी और ठेकेदारों पर निर्भरता जैसी चुनौतियां थीं। इस पेशे से जुड़ा सामाजिक कलंक भी उनके आत्मविश्वास और गरिमा को प्रभावित करता था, जबकि वित्तीय संसाधनों के अभाव में वे स्वतंत्र रूप से अपना काम शुरू करने में सक्षम नहीं थे।

इन चुनौतियों के बावजूद, हिमांशु स्वरोजगार अपनाने और असुरक्षित मैनुअल श्रम जारी रखने के बजाय आधुनिक स्वच्छता उपकरण चलाने के लिए प्रतिबद्ध रहे। वे अपने लिए आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सम्मान के साथ-साथ अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य चाहते थे। उनका मानना था कि यदि सफाई कर्मचारियों को उचित सहायता और अवसर प्रदान किए जाएं, तो वे स्वतंत्र उद्यमी बन सकते हैं।

एक महत्वपूर्ण बदलाव तब आया, जब हिमांशु को ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन खरीदने के लिए नमस्ते-सूय के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। अगस्त 2025 में जारी की गई इस सहायता से 10,70,400 रुपये की कुल परियोजना लागत को पूरा करने में मदद मिली, जिसमें 6,74,200 रुपये का ऋण और 3,96,200 रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी।

ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन ने हिमांशु को मशीनों से स्वतंत्र रूप से स्वच्छता सेवा का काम शुरू करने में सक्षम बनाया। मशीनों से असुरक्षित मैनुअल कार्यप्रणालियों और ठेकेदारों पर उनकी निर्भरता कम हुई तथा उनके काम की सुरक्षा, दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार हुआ। धीरे-धीरे उनके काम का विस्तार हुआ और उन्हें केवल एक मजदूर के रूप में नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण स्वच्छता सेवाएं प्रदान करने वाले एक युवा उद्यमी के रूप में पहचान मिलने लगी।

सहायता प्राप्त करने से पहले हिमांशु स्वच्छता श्रमिक के रूप में काम करते थे और उनकी आय अनियमित थी, जो परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। मशीनीकृत स्वच्छता सेवा स्थापित करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। परिचालन खर्च और 15,059 रुपये की मासिक ईएमआई का भुगतान करने के बाद भी अब वे लगभग 25,000-35,000 रुपये प्रतिमाह कमाते और बचाते हैं। वर्षा और सर्दी के मौसम में स्वच्छता सेवाओं की मांग बढ़ने के कारण उनकी आय में और वृद्धि होती है।

बढ़ी हुई आय से परिवार को घरेलू खर्च अधिक सहजता से पूरा करने और अधिक आत्मविश्वास के साथ भविष्य की योजना बनाने में मदद मिली है। हिमांशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उनके माता-पिता के चेहरों पर दिखाई देने वाली खुशी और राहत है। स्वच्छता वाहन का स्वामित्व मिलने से उनके आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।

वर्तमान में हिमांशु आसपास के क्षेत्रों में अपनी ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं और स्वच्छता सेवा के अपने कार्य का लगातार विस्तार कर रहे हैं। इस पहल ने उन्हें स्थिर और टिकाऊ आय, मशीनीकरण के माध्यम से अधिक सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, बेहतर सामाजिक सम्मान और दीर्घकालिक स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।

अपनी ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन के साथ खड़े हिमांशु, मशीनीकरण, वित्तीय सहायता और गरिमापूर्ण आजीविका के अवसरों के माध्यम से सफाई कर्मचारियों को सशक्त बनाने में नमस्ते-सूय पहल के प्रभाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी यात्रा दर्शाती है कि साहस और दृढ़ता के साथ समय पर मिली सहायता वर्षों के संघर्ष को आत्मनिर्भरता में बदल सकती है और समुदाय के अन्य लोगों को भी प्रेरित कर सकती है।

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पीके/केसी/केपी /डीए
 


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