कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गेट्स फाउंडेशन के साथ कृषि, पोषण सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका एवं जलवायु-लचीले विकास में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर बल दिया
मैं कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में दक्षिण-दक्षिण (South-South) सहयोग को भी मजबूत करने में गेट्स फाउंडेशन की रुचि का स्वागत करता हूँ।- श्री शिवराज सिंह चौहान
भारत और गेट्स फाउंडेशन कृषि नवाचारों को ग्लोबल साउथ के देशों तक पहुंचाने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे- श्री शिवराज सिंह चौहान
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के अनुरूप भारत अपने कृषि नवाचारों को ग्लोबल साउथ के साथ साझा करेगा- श्री चौहान
"विकसित भारत 2047" के लक्ष्य की दिशा में भारत आगे बढ़ रहा है- श्री शिवराज सिंह चौहान
श्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला सशक्तिकरण/ग्रामीण उद्यमिता/‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देने हेतु सहयोग बढ़ाने पर बल दिया
प्रविष्टि तिथि:
27 AUG 2026 4:41PM by PIB Delhi
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन में गेट्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री मार्क सुज़मैन के साथ मुलाकात की। इस दौरान कृषि, ग्रामीण विकास, पोषण सुरक्षा, पशुधन, डिजिटल कृषि, महिला सशक्तिकरण तथा जलवायु-लचीली आजीविका के क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर व्यापक चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान श्री चौहान ने कहा कि कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों के साथ गेट्स फाउंडेशन का सहयोग कई वर्षों से निरंतर मजबूत हुआ है और इसके सकारात्मक परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने खाद्य, पोषण और आजीविका सुरक्षा को आगे बढ़ाने में भारत और गेट्स फाउंडेशन की साझेदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और गेट्स फाउंडेशन के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2031 तक प्रभावी रहने वाला यह समझौता कृषि अनुसंधान एवं नवाचार सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा तथा दोनों पक्षों के बीच साझेदारी को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण रूपरेखा उपलब्ध कराएगा।
श्री चौहान ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को सुदृढ़ करने में गेट्स फाउंडेशन की रुचि का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में विकसित अनेक कृषि एवं ग्रामीण विकास संबंधी नवाचार एशिया, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के अनुरूप भारत अपने अनुभवों और सफलताओं को विश्व समुदाय के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पोषण सुरक्षा को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताते हुए मंत्री ने कहा कि फल एवं सब्जियों जैसी बागवानी फसलों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने पोषण-संपन्न किस्मों के विकास, सुरक्षित एवं टिकाऊ खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने तथा न्यूट्रिशन गार्डन एवं किचन गार्डन को ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण तथा आधुनिक तकनीक से जोड़ने को सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
श्री चौहान ने कहा कि पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और प्रसंस्करण (Processing) के क्षेत्र में निवेश एवं सहयोग से फसल क्षति को कम करने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के लिए नर्सरी, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं पौध सामग्री उत्पादन जैसे उद्यमों को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों के रूप में रेखांकित किया।
पशुधन क्षेत्र को भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने पशु उत्पादकता, पशु स्वास्थ्य, आनुवंशिक सुधार (Genetic Improvement) तथा जलवायु-लचीली पशुधन प्रणालियों को भविष्य की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।
उन्होंने कहा कि उन्नत रोग निगरानी (Advanced Disease Surveillance), अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल एपिडेमियोलॉजी, नेक्स्ट-जनरेशन वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स और जीनोमिक्स प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में गेट्स फाउंडेशन के साथ सहयोग पशु रोगों से निपटने की देश की तैयारी को और मजबूत कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने क्लाइमेट-स्मार्ट लाइवस्टॉक सिस्टम, मीथेन उत्सर्जन में कमी, टिकाऊ चारा एवं फॉडर प्रणालियों तथा प्रिसिजन लाइवस्टॉक फार्मिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेंसर और डिजिटल एडवाइजरी सिस्टम्स के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) और “वन हेल्थ” दृष्टिकोण को ऐसा क्षेत्र बताया जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग की विशेष आवश्यकता है।
श्री चौहान ने प्राकृतिक खेती और जलवायु-लचीली कृषि को भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल फसलें और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि प्रणालियों पर अनुसंधान, प्रमाणीकरण और विस्तार में सहयोग अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कृषि क्षेत्र में केवल नई तकनीकों के विकास पर ही नहीं, बल्कि पहले से प्रमाणित और सफल तकनीकों के व्यापक विस्तार (Scaling) पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठन (FPOs), स्वयं सहायता समूह (SHGs), कस्टम हायरिंग सेंटर, निर्माता एवं सेवा प्रदाता इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
श्री चौहान ने कहा कि गेट्स फाउंडेशन के साथ मिलकर प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, मांग आकलन, व्यवसाय मॉडल, आपूर्ति श्रृंखला, प्रशिक्षण और प्रभाव मूल्यांकन का ऐसा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिससे प्रमाणित तकनीकों का किसानों के बीच तेजी से प्रसार हो सके।
महिला सशक्तिकरण को कृषि परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए मंत्री ने कहा कि ICAR द्वारा महिला-अनुकूल कृषि अनुसंधान, महिला-हितैषी कृषि प्रौद्योगिकियों, पोषण-संवेदनशील कृषि तथा महिला किसानों की क्षमता निर्माण पर व्यापक कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इन प्रयासों को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
डिजिटल कृषि को सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र बताते हुए श्री चौहान ने कहा कि AI, रिमोट सेंसिंग, GIS, ड्रोन तथा डिजिटल निर्णय सहायता प्रणालियों के माध्यम से अनुसंधान और किसान परामर्श सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में विकसित डिजिटल समाधान अन्य विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
ग्रामीण विकास क्षेत्र पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय और गेट्स फाउंडेशन के बीच जनवरी 2020 में हस्ताक्षरित गैर-वित्तीय MoU को जून 2023 में तीन वर्षों के लिए विस्तारित किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में नए समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श जारी है।
श्री चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से एक मजबूत सामुदायिक संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है और अब सरकार का लक्ष्य केवल समूहों का गठन नहीं, बल्कि महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने “लखपति दीदी” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ लखपति दीदी तैयार करना है तथा महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में विकसित करना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि SHG नेटवर्क अब केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता, उत्पादन, बाजार संपर्क और स्थानीय आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
“विकसित भारत 2047” के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि ग्रामीण भारत इस परिवर्तन का केंद्र है। उन्होंने गरीबी-मुक्त, रोजगार-युक्त और बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण गांवों के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
श्री चौहान ने DAY-NRLM के अंतर्गत संचालित ‘रूरल रेजिलिएंस एंड प्रॉस्पेरिटी प्रोग्राम’ तथा अन्य सामुदायिक पहलों के बेहतर अभिसरण (Convergence) की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में जलवायु-लचीली आजीविकाएं सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगी।
मुलाकात के अंत में श्री चौहान ने कहा कि विज्ञान-आधारित, प्रमाणित तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल समाधानों को बड़े पैमाने पर किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, आय वृद्धि, जलवायु अनुकूलन और सतत कृषि विकास के लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने गेट्स फाउंडेशन को निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि दोनों पक्षों के बीच साझेदारी भविष्य में और अधिक सशक्त होगी तथा कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री अतीश चंद्र तथा दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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आरसी, एमएस, डीके
(रिलीज़ आईडी: 2303783)
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