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नमस्ते-एसयूवाई- आउटसोर्स किए गए सीवर कार्य से लेकर मशीनीकृत स्वच्छता उद्यम तक सुशील कुमार शर्मा की आजीविका बदलने की कहानी

प्रविष्टि तिथि: 25 AUG 2026 4:20PM by PIB Delhi

मशीनों के प्रयोग और किफायती तरीके से धनराशि की उपलब्धता से स्वच्छता कार्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और टिकाऊ स्वरोजगार में बदला जा सकता है। समय पर मिलने वाली सहायता से अनुभवी कर्मचारी आधुनिक मशीनें प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही सेवा वितरण में सुधार और अधिक स्थिर आजीविका सुनिश्चित भी कर सकते हैं।

राजस्थान के झुंझुनू जिले के राजुरा, पिलानी में लोयाल्का स्कूल के पास वार्ड नंबर 23 के निवासी 32 वर्षीय सुशील कुमार शर्मा ने सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की नमस्ते पहल के तहत स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के माध्यम से यह परिवर्तन होते हुए देखा है।

कला स्नातक की डिग्री प्राप्त सुशील एक साधारण परिवार से हैं और अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहते हैं। वे परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य हैं। उन्होंने अपनी तीन बहनों (जिनकी अब शादी हो चुकी है) के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाई हैं। पिता के खराब स्वास्थ्य और परिवार की आर्थिक तंगी के कारण सुशील को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और घर चलाने के लिए काम करना शुरू करना पड़ा। बाद में उन्होंने नगर पालिका विद्या विहार, पिलानी में आउटसोर्स सीवर सफाई कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया और लगभग 15,000 रुपये प्रति माह कमाते थे।

यह काम शारीरिक रूप से बहुत कठिन था और इसमें आर्थिक सुरक्षा सीमित थी। सुशील को अस्थिर रोज़गार, व्यावसायिक कठिनाइयां, पूंजी तक सीमित पहुंच और स्वच्छता कार्य से जुड़े सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद, उन्‍होंने स्वच्छता सेवाओं में सम्मानजनक स्वरोजगार स्थापित करने की आकांक्षा और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए प्रतिबद्ध बनाये रखी।

सुशील को नमस्ते योजना के अंतर्गत स्वच्छता उद्यमी योजना से सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता से वे सीवर और सेप्टिक टैंक की मशीनीकृत सफाई के लिए सक्शन टैंकर सहित एक ट्रैक्टर खरीद सके। 15 जनवरी 2026 को शुरू हुई इस परियोजना की कुल लागत 10.70 लाख रुपये थी। इसका वित्तपोषण 5.35 लाख रुपये के ऋण और 5.35 लाख रुपये की पूंजीगत सब्सिडी के माध्यम से किया गया। वाहन और उपकरण उपलब्ध होने से सुशील आउटसोर्सिंग के काम से आगे बढ़कर स्वयं को एक स्वरोजगार प्राप्त स्वच्छता उद्यमी के रूप में स्थापित कर सके।

मशीनों की सहायता से सफाई कार्य अधिक कुशल हो गए और शारीरिक रूप से श्रमसाध्य सफाई प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम हो गई। इससे सुशील को अपने काम पर अधिक नियंत्रण मिला और आजीविका का एक अधिक स्थिर और सम्मानजनक स्रोत प्राप्त हुआ।

नमस्ते-एसयूवाई के माध्यम से मिली मदद और समर्थन पर संतोष व्यक्त करते हुए सुशील कुमार शर्मा ने कहा, मेरी मासिक आय लगभग 15,000 रुपये से बढ़कर 30,000-35,000 रुपये हो गई है। बढ़ी हुई आय ने मेरी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और मुझे अपने बुजुर्ग माता-पिता का सहारा देने और परिवार की जरूरतों को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा करने में सक्षम बनाया है।

आज सुशील एक मशीनीकृत स्वच्छता उद्यम के मालिक और संचालक हैं। एक आउटसोर्स सीवर सफाई कर्मचारी से उद्यमी बनने तक के उनके सफर ने उन्हें अधिक आय, स्थिरता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान दिलाया है।

सुशील कुमार शर्मा की कहानी यह दर्शाती है कि वित्तीय सहायता, पूंजीगत सब्सिडी और आधुनिक स्वच्छता उपकरणों तक पहुंच किस प्रकार व्यावसायिक अनुभव को स्थायी उद्यम में परिवर्तित कर सकती है। उनकी सफलता स्वच्छता कर्मचारियों के बीच सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में नमस्ते-एसयूवाई पहल की भूमिका को उजागर करती है।

नमस्ते-एसयूवाई योजना के तहत दृढ़ संकल्प और समय पर मिले सहयोग के कारण सुशील अनिश्चित आउटसोर्सिंग रोजगार से निकलकर सम्मानजनक मशीनीकृत स्वरोजगार की ओर अग्रसर हुए हैं। उनकी यह कहानी लक्षित सहायता से आजीविका में सुधार लाते हुए सुरक्षित और अधिक पेशेवर स्वच्छता सेवाओं को बढ़ावा देने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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पीके/केसी/वीके/एसएस


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