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आर्थिक बाधाओं से इंजीनियरिंग आकांक्षाओं को पूरा करने तक


पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति की सहायता से प्रिंस यादव ने कैसे अपनी बी.टेक. की पढ़ाई की

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 6:46PM by PIB Delhi

गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुंच छात्रों को उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, सीमित आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए, अपनी ट्यूशन और रहने-सहने का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

छात्रवृत्ति से छात्रों को आर्थिक बाधाओं को दूर करने में कैसे मदद मिल सकती है, इसका उदाहरण हैं 19 वर्ष के छात्र प्रिंस यादव। वे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी से हैं और भोपाल के मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएएनआईटी) में बी.टेक.की पढ़ाई कर रहे हैं।

उनका परिवार मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है, इसलिए उन्हें भोपाल में अपनी ट्यूशन और रहने-सहने का खर्च उठाने में काफी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद, प्रिंस एक सफल इंजीनियर बनने और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान देने के लिए दृढ़ रहे, जिससे भारत प्रौद्योगिकी के मामले में आत्मनिर्भर बन सके और इसके साथ ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो सके।

वर्ष 2025-26 में, पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति  के तहत प्रिंस को 1,15,400 रुपए की आर्थिक मदद दी गई। इस मदद से उनको अपनी ट्यूशन और छात्रावास से जुड़े खर्च पूरे करने में आसानी हुई, जिससे उनके परिवार पर आर्थिक बोझ काफी कम हो गया। साथ ही, इससे उन्हें शैक्षिक ऋण लेने के दबाव के बिना अपनी उच्च शिक्षा जारी रखने और अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।

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अपनी पढ़ाई से जुड़े आर्थिक बोझ के कम होने के बाद, प्रिंस अब अधिक आत्मविश्वास के साथ एमएएनआईटी भोपाल में बी.टेक. की डिग्री कर रहे हैं। वह अच्छा सीजीपीए बनाए हुए हैं और कैंपस में टेक्निकल क्लबों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। छात्रवृत्ति से मिली सहायता से  उन्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और इंजीनियरिंग तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने लक्ष्यों को पाने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद की है।

मंत्रालय से मिली आर्थिक सहायता पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रिंस यादव ने कहा,

पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति मेरी शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़म साबित हुई। इसने मेरी ट्यूशन और हॉस्टल फ़ीस के आर्थिक बोझ को पूरी तरह से खत्म कर दिया, जिससे मैं एजुकेशन लोन की चिंता किए बिना पूरी तरह से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे पाया। अभी मैं एमएएनआईटी, भोपाल में सफलतापूर्वक अपनी डिग्री कर रहा हूं, मैं अच्छा सीजीपीए बनाए हुए हूं और कैंपस में टेक्निकल क्लबों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा हूं।

प्रिंस की कहानी यह दर्शाती है कि कैसे सही समय पर मिली छात्रवृत्ति सहायता, आर्थिक तंगी का सामना कर रहे छात्रों के लिए अत्यंत मददगार साबित हो सकती है। पीएम यशस्वी ने पढ़ाई के खर्च का दबाव कम करके, उन्हें अपनी उच्च शिक्षा जारी रखने और एक सफल इंजीनियर बनने के अपने सपने को पूरा करने में सक्षम बनाया है, जिससे वह भारत की तकनीकी प्रगति में योगदान दे पा रहे हैं और अपने परिवार की आर्थिक रूप से मदद भी कर पा रहे हैं।

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पीके/केसी/एमके


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