विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संसद प्रश्न: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 3:32PM by PIB Delhi
सरकार अपने स्थापित गवर्नेंस सिस्टम के ज़रिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के लागू होने की समय-समय पर समीक्षा करती है। इसमें मिशन गवर्निंग बोर्ड (एमजीबी), मिशन तकनीक अनुसंधान परिषद (एमटीआरसी), अन्य विशेषज्ञ समितियों और ऑन-साइट समीक्षाओं के ज़रिए निगरानी शामिल है। इसके अलावा, 10-11 अप्रैल 2026 को एक वार्षिक क्वांटम कॉन्क्लेव भी आयोजित किया गया था, जिसमें थीमैटिक हब, टेक्निकल ग्रुप, स्टार्टअप और मिशन की अन्य गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई। 2025-26 के दौरान, मिशन के तहत उल्लेखनीय प्रगति हुई, जिसमें शामिल हैं:
- अकादमिक, शोध संस्थानों और उद्योग जगत की भागीदारी के साथ चार थीमैटिक हब (टी-हब्स) को चालू करना, जिनमें 14 तकनीकी समूह और 17 प्रोजेक्ट टीमें शामिल हैं।
- क्वांटम प्रोसेसर, सेंसर, मटीरियल और डिवाइस के स्वदेशी विकास को सक्षम करने के लिए आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्ली में फैब्रिकेशन और केंद्रीय सुविधाओं सहित शोध से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं।
- स्वदेशी क्वांटम एल्गोरिदम और सॉफ्टवेयर के विकास के लिए क्वांटम एल्गोरिदम टेक्निकल ग्रुप के तहत 17 समर्पित प्रोजेक्ट टीमों की स्थापना।
- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के साथ मिलकर क्वांटम तकनीक में स्नातक माइनर और एम.टेक प्रोग्राम के ज़रिए क्षमता बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा, शिक्षा, कौशल विकास और मानव संसाधन क्षमता को मज़बूत करने के लिए देश भर में 23 क्वांटम शिक्षण लैबोरेटरी बनाई जा रही हैं।
- स्वदेशी क्वांटम तकनीक के विकास और व्यवसायीकरण के लिए 17 क्वांटम तकनीक स्टार्टअप को सहायता देकर उद्यमिता का विकास किया जा रहा है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी और क्वांटम मटीरियल और डिवाइस के क्षेत्रों में शोध और तकनीकी विकास की गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं। यह मिशन स्वदेशी क्वांटम तकनीक और ज़रूरी पुर्ज़ों के विकास में मदद करता है, जिनका इस्तेमाल सुरक्षित संचार, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, फाइनेंस, नेविगेशन और सटीक विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में हो सकता है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्वदेशी उत्पाद विकसित किए हैं, जिनकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (टीओटी) सुविधा इंडस्ट्री को दी गई है। इनमें क्वांटम रैंडम नंबर जेनरेटर (क्यूआरएनजी) और क्वांटम कंप्यूटर प्रोसेसर के लिए RFSoC-आधारित कंट्रोलर (आरसीक्यूसीपी) शामिल हैं। डीआरडीओ निम्नलिखित पहलों के ज़रिए क्वांटम तकनीक में शोध, नवाचार और उद्योग-एकेडमिया सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है:
- तकनीक विकास कोष (टीडीएफ) योजना, जो इंडियन डिज़ाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड (आईडीडीएम) फ्रेमवर्क के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास के लिए एमएसएमई और स्टार्टअप्स को ग्रांट-इन-एड यानी अनुदान सहायता प्रदान करती है।
- क्वांटम तकनीक में सहयोगी शोध को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न आईआईटी, आईआईएससी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में डीआरडीओ इंडस्ट्री एकेडेमिया सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (डीआईएसीओई) की स्थापना।
- रिसर्च सेवाओं के अधिग्रहण के लिए कॉन्ट्रैक्ट (सीएआरएस), जिसके तहत डीआरडीओ की प्रयोगशालाएँ सामान्य शोध और प्रोटोटाइप विकास के बीच की खाई को पाटने के लिए अनुसंधान करने हेतु शैक्षणिक और शोध संस्थानों को शामिल करती हैं, जिससे तकनीक को साकार करने और उत्पाद विकास में मदद मिलती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Qniverse नाम का एक यूनिफाइड क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफार्म बनाया है। यह प्लेटफार्म हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) सिस्टम से जुड़ा है और छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को कई क्वांटम हार्डवेयर प्लेटफार्म पर क्वांटम एल्गोरिदम को डिज़ाइन करने, सिमुलेट करने और चलाने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग रिसोर्स उपलब्ध कराता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), अंतरिक्ष विभाग, क्वांटम तकनीक परियोजनाओं की तकनीकी समीक्षा और निगरानी के लिए व्यवस्थित परियोजना समीक्षा प्रक्रियाओं का पालन करता है। इन प्रक्रियाओं में बेसलाइन डिज़ाइन रिव्यू (बीडीआर), प्रारंभिक डिज़ाइन रिव्यू (पीडीआर), क्रिटिकल डिज़ाइन रिव्यू (सीडीआर), स्टैंडिंग पीयर रिव्यू कमेटी (एसपीआरसी) और एक्सपर्ट रिव्यू कमेटी (ईआरसी) शामिल हैं। इसरो, आईआईएससी, आईआईटी,एनआईटी, अहमदाबाद विश्वविद्यालय और एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसआईएनपी) के साथ साझेदारी करके उद्योग जगत और एकेडेमिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। यह कौशल विकास के लिए क्वांटम तकनीक पर स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम (एसटीपी) और कार्यशाला भी आयोजित करता है। साथ ही, इसने क्वांटम-रेडी मूलभूत ढ़ांचा भी स्थापित किया है, जिसमें क्वांटम और ऑप्टिकल प्रयोगशालाएं, विशेष सब-सिस्टम प्रयोगशालाएं, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन और पेलोड व सैटेलाइट असेंबली, टेस्टिंग और लॉन्च सुविधाएं शामिल हैं।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत प्रमुख अकादमिक संस्थानों में चार थीमैटिक हब बनाए गए हैं, जो इन क्षेत्रों को कवर करते हैं:
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थीमैटिक हब
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होस्ट संस्थान
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रिसर्च का क्षेत्र
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क्वांटम कंप्यूटिंग
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IISc. बेंगलुरु (सी-डैक, कर्नाटक के सहयोग से)
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कई क्यूबिट प्लेटफॉर्म पर क्वांटम कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी, जिसमें सेमीकंडक्टिंग, फोटोनिक, न्यूट्रल एटम, इलेक्ट्रॉन स्पिन और सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट शामिल हैं; क्वांटम एल्गोरिदम; और सहायक तकनीक
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क्वांटम कम्युनिकेशन
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IIT मद्रास (C-DOT, नई दिल्ली के सहयोग से), तमिलनाडु
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क्वांटम कम्युनिकेशन और साइबर-सिक्योरिटी तकनीक, जिसमें ट्रस्टेड-नोड-फ्री हाइब्रिड क्वांटम नेटवर्क, पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC), क्वांटम रिपीटर, ज़मीन पर फाइबर-आधारित क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) नेटवर्क और सैटेलाइट-आधारित क्वांटम कम्युनिकेशन शामिल हैं।
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क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी
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आईआईटी बॉम्बे, महाराष्ट्र
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क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी तकनीक, जिसमें NV सेंटर-आधारित सेंसर, मैग्नेटोमीटर, ग्रेविमीटर, क्वांटम-एन्हांस्ड सेंसर, क्वांटम-एन्हांस्ड इमेजिंग और सटीक माप (प्रिसिजन मेज़रमेंट) सिस्टम शामिल हैं।
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क्वांटम मटीरियल और डिवाइस
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IIT दिल्ली, नई दिल्ली
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क्वांटम मटीरियल और डिवाइस, जिसमें क्वांटम डॉट्स, स्पिनट्रोनिक मटीरियल, फोटोनिक डिवाइस और क्वांटम सिस्टम को सपोर्ट करने वाली टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
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एनक्यूएम देश भर में चलाया जा रहा एक मिशन है। इस मिशन के तहत, महाराष्ट्र में क्वांटम रिसर्च, शिक्षा और कौशल विकास को मज़बूत करने के लिए आईआईटी बॉम्बे (महाराष्ट्र) में क्वांटम सेंसिंग एंड मेट्रोलॉजी थीमैटिक हब और नागपुर के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीएनआईटी) में एक क्वांटम टीचिंग लैबोरेटरी बनाई गई है।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एनएस/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2298683)
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