जनजातीय कार्य मंत्रालय
तमिलनाडु में जनजातीय कार्यक्रम
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 12:43PM by PIB Delhi
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा को सूचित किया कि सरकार तमिलनाडु सहित पूरे देश में अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जनजातीय कार्य मंत्रालय, तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ मिलकर कई योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य में जनजातीय बस्तियों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई केंद्रीय क्षेत्र की और केंद्रीय-प्रायोजित योजनाएं कार्यान्वित करता है। जारी की गई धनराशि और कार्यान्वित योजनाओं का विवरण निम्नानुसार है:
|
क्र.सं.
|
योजना / कार्यक्रम
|
वित्तीय वर्ष 2023-24
एफआर (करोड़ रूपये)
|
लाभार्थी
|
वित्तीय वर्ष 2024-25
एफआर (करोड़ रूपये)
|
लाभार्थी
|
वित्तीय वर्ष 2025-26
एफआर (करोड़ रूपये)
|
लाभार्थी
|
|
1
|
मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति
|
3.62
|
17,557 छात्र
|
0.6
|
19,178 छात्र
|
8.13
|
19,514 छात्र
|
|
2
|
मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति
|
20.00
|
25,216 छात्र
|
25.00
|
28,273 छात्र
|
26.33
|
31,239 छात्र
|
|
3
|
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस)
|
10.99
|
2,226 छात्र
|
17.39
|
8 ईएमआरएस में 11,530 छात्र नामांकित हुए।
|
-
|
-
|
|
4
|
अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान
|
6.50
|
-
|
20.20
|
-
|
8.00
|
-
|
|
5
|
पीवीटीजी का विकास
|
-
|
-
|
-
|
-
|
27.23
|
-
|
|
6
|
पीएम-जनमन - बहुउद्देश्यीय केंद्र
|
5.20
|
-
|
20.67
|
-
|
-
|
-
|
|
7
|
एनएसटीएफडीसी (ऋण, लघु ऋण और कौशल विकास)
|
32.66
|
7,327 लाभार्थी
|
12.10
|
6,437 लाभार्थी
|
9.29
|
6,183 लाभार्थी
|
|
8
|
स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान
|
3.77
|
98,098 लाभार्थी
|
1.89
|
146,040 लाभार्थी
|
4.89
|
79,713 लाभार्थी
|
|
9
|
उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी)
|
-
|
26 छात्र
|
-
|
27 छात्र
|
-
|
28 छात्र
|
|
10
|
अजजा छात्रों के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (एनएफएसटी)
|
-
|
20 छात्र
|
-
|
19 छात्र
|
-
|
17 छात्र
|
|
11
|
राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (एनओएस)
|
-
|
-
|
-
|
-
|
-
|
-
|
|
12
|
टीआरआई को सहायता
|
-
|
-
|
2.00
|
-
|
1.15
|
-
|
|
13
|
डीएजेजीयूए
|
-
|
-
|
0.20
|
-
|
0.02
|
-
|
|
14
|
पीएम-जनमन - वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके)
|
37 वीडीवीके; 2,403 लाभार्थी
|
|
15
|
प्रधान मंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) - वीडीवीके
|
8 वीडीवीके; 2,400 लाभार्थी
|
तमिलनाडु में पिछले तीन वर्षों के दौरान मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं के तहत शामिल जनजातीय लाभार्थियों का ज़िले-वार ब्यौरा नीचे दिया गया है।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस):
तमिलनाडु में चल रहे 8 ईएमआरएस की ज़िले-वार स्थिति और नामांकन (2025-26) निम्नानुसार हैं:
|
क्र.सं.
|
जिले
|
ब्लॉक / तालुका
|
नामांकन 2025-26
|
|
1
|
कल्लाकुरिची (विल्लुपुरम)
|
कालरायन हिल्स (चिन्नासलेम)
|
322
|
|
2
|
कांचीपुरम (चेंगलपट्टू)
|
तिरूपोरूर
|
266
|
|
3
|
नमक्कल
|
कोल्ली हिल्स
|
441
|
|
4
|
सलेम
|
पेद्दनाइकेनपालयम
|
461
|
|
5
|
सलेम
|
येरकौड
|
318
|
|
6
|
नीलगिरि
|
उधगमंडलम
|
248
|
|
7
|
तिरुवन्नामलाई
|
जावथू पहाड़ियाँ
|
470
|
|
8
|
तिरुपत्तूर
|
कांदिली
|
383
|
आजीविका: ट्राइफेड के ज़रिए लागू किए गए 'वन धन विकास केंद्र' (वीडीवीके) और 'प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन' (पीएमजेवीएम) का उद्देश्य छोटे वन उत्पादों और गैर-कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाना है; अब तक पीएमजेवीएम के तहत तमिलनाडु में 8 वीडीवीके (120.00 लाख रुपये स्वीकृत, 7 संचालित, 246.78 लाख रुपये की बिक्री) बनाए गए हैं, और पीवीटीजी परिवारों के लिए पीएम-जनमन के तहत 37 और वीडीवीके (120.15 लाख रुपये स्वीकृत, 29 संचालित, 64.53 लाख रुपये की बिक्री) बनाए गए हैं, जिनसे कुल मिलाकर 4,800 से ज़्यादा 'वन धन एसएचजी' सदस्य जुड़े हैं; इसके अलावा, 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम' (एनएसटीएफडीसी) के ज़रिए सावधि ऋण, लघु ऋण और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके तहत तमिलनाडु में 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान क्रमशः 1,087.13 लाख रुपये, 3,265.67 लाख रुपये और 1,210.39 लाख रुपये के ऋण बांटे गए, जिनसे क्रमशः 3,403, 7,327 और 6,437 अजजा लाभार्थियों को फ़ायदा हुआ।
स्वैच्छिक संगठन (एनजीओ) को अनुदान: तमिलनाडु – "अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए काम करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को सहायता-अनुदान" योजना के तहत स्वास्थ्य में एनजीओ को सहायता-अनुदान।
|
क्र.सं.
|
जिले
|
परियोजना का स्वरूप
|
2023-24
|
2024-25
|
2025-26
|
|
|
लाभार्थी
|
लाभार्थी
|
लाभार्थी
|
|
1
|
कोयंबटूर
|
जीआईए - 10 या उससे ज़्यादा बिस्तरों वाला अस्पताल
|
18,217
|
18,825
|
18,825
|
|
2
|
कोयंबटूर
|
जीआईए – सचल औषधालय/बहु सेवा सचल इकाइयां
|
22,517
|
43,820
|
27,624
|
|
3
|
नीलगिरि (मुख्यालय: उधगामा
|
जीआईए - 10 या उससे ज़्यादा बिस्तरों वाला अस्पताल
|
33,941
|
50,131
|
-
|
|
4
|
नीलगिरि (मुख्यालय: उधगामा
|
जीआईए - गैर-आवासीय विद्यालय
|
-
|
-
|
-
|
|
5
|
सलेम
|
जीआईए - 10 या उससे ज़्यादा बिस्तरों वाला अस्पताल
|
10,403
|
13,310
|
13,310
|
|
6
|
सलेम
|
जीआईए – सचल औषधालय/बहु सेवा सचल इकाइयां
|
13,020
|
19,954
|
19,954
|
|
|
|
कुल
|
98,098
|
146,040
|
79,713
|
विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत लाभार्थी निम्नानुसार हैं:
योजना का नाम: अजजा छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति (शीर्ष श्रेणी)
|
जिले का नाम
|
वित्तीय वर्ष 2023-24
|
वित्तीय वर्ष 2024-25
|
वित्तीय वर्ष 2025-26
|
|
लाभार्थी
|
लाभार्थी
|
लाभार्थी
|
|
चेन्नई
|
3
|
4
|
4
|
|
कोयंबटूर
|
1
|
1
|
2
|
|
कुड्डालोर
|
2
|
0
|
0
|
|
धर्मपुरी
|
5
|
5
|
3
|
|
कल्लाकुरिची
|
1
|
2
|
3
|
|
कृष्णागिरी
|
1
|
0
|
0
|
|
नागपट्टिनम
|
1
|
1
|
0
|
|
नमक्कल
|
1
|
2
|
2
|
|
पेरम्बलूर
|
0
|
1
|
0
|
|
सलेम
|
4
|
6
|
10
|
|
तंजावुर
|
0
|
0
|
1
|
|
नीलगिरि
|
3
|
1
|
3
|
|
तिरुवल्लूर
|
0
|
2
|
2
|
|
तिरुवरुर
|
1
|
0
|
0
|
|
तिरुचिरापल्ली
|
0
|
0
|
0
|
|
तिरुपथुर
|
0
|
1
|
1
|
|
तिरुवन्नामलाई
|
3
|
1
|
2
|
योजना का नाम: अजजा छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (एनएफएसटी)
|
जिले का नाम
|
वित्तीय वर्ष 2023-24
|
वित्तीय वर्ष 2024-25
|
वित्तीय वर्ष 2025-26
|
|
लाभार्थी
|
लाभार्थी
|
लाभार्थी
|
|
अरियालूर
|
|
|
|
|
चेन्नई
|
1
|
0
|
0
|
|
कोयंबटूर
|
1
|
2
|
1
|
|
कुड्डालोर
|
2
|
2
|
1
|
|
धर्मपुरी
|
1
|
2
|
1
|
|
डिंडीगुल
|
0
|
0
|
0
|
|
इरोड
|
0
|
0
|
0
|
|
कल्लाकुरिची
|
0
|
0
|
0
|
|
कन्नियाकुमारी
|
1
|
1
|
0
|
|
मदुरै
|
1
|
0
|
0
|
|
नमक्कल
|
4
|
5
|
7
|
|
पेरम्बलूर
|
1
|
1
|
0
|
|
रानीपेट
|
0
|
0
|
0
|
|
सेलम
|
4
|
4
|
2
|
|
नीलगिरि
|
0
|
0
|
1
|
|
तिरुवल्लूर
|
0
|
0
|
1
|
|
तिरुवरुर
|
0
|
0
|
0
|
|
तिरुचिरापल्ली
|
1
|
1
|
0
|
|
तिरुपथुर
|
0
|
1
|
1
|
|
तिरुवन्नामलाई
|
1
|
0
|
0
|
|
थूथुक्कुडी
|
1
|
1
|
1
|
|
वेल्लोर
|
2
|
0
|
0
|
|
विलुप्पुरम
|
2
|
2
|
1
|
|
विरुधुनगर
|
1
|
0
|
1
|
अजजा छात्रों के लिए राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति (एनओएस)
अजजा छात्रों के लिए एनओएस (राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति) योजना के तहत, पिछले तीन सालों में तमिलनाडु राज्य से किसी भी छात्र का चयन नहीं किया गया।
जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही प्रमुख योजनाओं के ब्यौरे निम्नानुसार हैं:
i. अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति: यह योजना कक्षा IX-X में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए लागू है। माता-पिता की सभी स्रोतों से आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। दिवा छात्रों को 225 रुपये प्रति माह और छात्रावास में रहने वालों को 525 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति वर्ष में 10 महीने की अवधि के लिए दी जाती है। छात्रवृत्ति राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के माध्यम से संवितरित की जाती है। पूर्वोत्तर और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू और कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्र जहाँ यह अनुपात 90:10 है को छोड़कर, सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 75:25 है। बिना विधायिका वाले संघ राज्यक्षेत्रों के लिए साझाकरण पद्धति (पैटर्न) 100% केंद्रीय हिस्सा है।
ii. अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति: इस योजना का उद्देश्य मैट्रिकोत्तर या माध्यमिकोत्तर स्तर पर अध्ययन कर रहे अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। माता-पिता की सभी स्रोतों से आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले अनिवार्य शुल्क की प्रतिपूर्ति संबंधित राज्य शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित सीमा के अधीन की जाती है और अध्ययन के पाठ्यक्रम के आधार पर 230 रुपये से 1200 रुपये प्रति माह तक की छात्रवृत्ति राशि का भुगतान किया जाता है। योजना राज्य सरकारों और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों द्वारा कार्यान्वित की जाती है। पूर्वोत्तर और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू तथा कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्र जहां यह अनुपात 90:10 है को छोड़कर, सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तपोषण अनुपात 75:25 है। बिना विधायिका वाले संघ राज्यक्षेत्रों के लिए साझाकरण पद्धति (पैटर्न) 100% केंद्रीय हिस्सा है।
अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति एवं छात्रवृत्ति: यह जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इस योजना के अंतर्गत दो उप-योजनाएं हैं, अर्थात्:
iii. क. अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना (पूर्व में शीर्ष श्रेणी छात्रवृत्ति योजना के नाम से विदित): इस योजना के अंतर्गत, प्रबंधन, चिकित्सा, अभियांत्रिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, विधि (कानून) आदि जैसे पेशेवर क्षेत्रों में चयनित उत्कृष्ट श्रेणी के सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों में स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने हेतु छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। मंत्रालय द्वारा अधिसूचित 265 संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 6.0 लाख रुपये से अधिक न हो, ऐसे सभी अनुसूचित जनजाति के छात्र छात्रवृत्ति प्राप्त करने के पात्र हैं। यह योजना वर्ष 2007-08 से प्रारंभ की गई है।
ख. अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु उच्चतर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति योजना: स्नातकोत्तर उपाधि पूर्ण करने के पश्चात भारत में पीएच.डी. करने वाले मेधावी अनुसूचित जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए यह जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। यह योजना वर्ष 2005-06 से प्रारंभ की गई है। प्रतिवर्ष पीएच.डी. हेतु नई अध्येतावृत्तियों की कुल संख्या 750 होगी। स्नातकोत्तर उपाधि में न्यूनतम 55% अंक वाले तथा 36 वर्ष की आयु तक के अनुसूचित जनजाति के छात्र इस योजना के अंतर्गत अध्येतावृत्ति हेतु आवेदन करने के पात्र हैं। अध्येतावृत्ति की राशि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की दरों के समकक्ष है।
iv. अनुसूचित जनजाति के छात्रों हेतु राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति: यह जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके अंतर्गत मेधावी अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों को विदेश में शीर्ष 1000 रैंक (नवीनतम क्यूएस विश्व रैंकिंग के अनुसार) वाले संस्थानों/विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। यह योजना वर्ष 1954-55 से प्रारंभ की गई है। यह योजना विदेश में स्थित भारतीय दूतावासों/मिशनों, विदेश मंत्रालय के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। प्रतिवर्ष बीस छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। जिन अनुसूचित जनजाति के छात्रों की परिवारिक आय 6.0 लाख रुपये से अधिक नहीं है, वे इस योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति हेतु आवेदन करने के पात्र हैं।
v. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: माननीय प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 उपाय शामिल हैं और इसका उद्देश्य पाँच वर्षों में 63,843 गाँवों में बुनियादी ढांचे के अंतरों को दूर कर छात्रावासों, आंगनवाड़ी सुविधाओं और सचल चिकित्सा इकाइयों जैसी सामाजिक अवसंरचना प्रदान करना और 30 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में वन धन केंद्र की स्थापना करके 5 करोड़ से अधिक जनजातियों को आजीविका के अवसर प्रदान करना है। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय 79,156 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा: 56,333 करोड़ रूपये और राज्य हिस्सा: 22,823 करोड़ रूपये) है।
vi. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन): सरकार ने 18 राज्यों और 1 संघ राज्यक्षेत्र में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य तीन वर्षों में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुँच, सड़क और दूरसंचार सम्पर्क, गैर-विद्युतीकृत आवासों का विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन उद्देश्यों को 9 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित छात्रावासों और सचल चिकित्सा इकाइयों (एमएमयू) सहित 11 उपायों के माध्यम से पूरा करने की योजना है। पीएम जनमन का कुल बजटीय परिव्यय 24,104 करोड़ रुपये (केंद्र का हिस्सा: ₹15336 करोड़ और राज्य का हिस्सा: ₹8768 करोड़) है।
vii. संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) के प्रावधान (परंतुक) के तहत, अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन के स्तर को बेहतर बनाने और जनजातीय लोगों के कल्याण हेतु अनुसूचित जनजाति आबादी वाले राज्यों को अनुदान जारी किए जाते हैं। यह एक क्षेत्र विशेष कार्यक्रम है और राज्यों को 100% अनुदान प्रदान किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, पेयजल, स्वच्छता आदि के क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे की गतिविधियों में अंतर को पाटने के लिए अनुसूचित जनजाति आबादी की महसूस की गई आवश्यकताओं के आधार पर राज्य सरकारों को निधियां जारी की जाती हैं।
viii. अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान: अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान योजना के अंतर्गत, मंत्रालय आवासीय विद्यालय, गैर-आवासीय विद्यालय, छात्रावास, सचल औषधालय, दस या अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, आजीविका आदि को कवर करने वाली शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में परियोजनाओं को वित्तपोषित करता है।
ix. एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस): यह योजना दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं के समकक्ष गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। ये विद्यालय जनजातीय छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु सुविधाओं के साथ-साथ आधुनिक शैक्षणिक अवसंरचना उपलब्ध कराते हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय, जनजातीय छात्र-छात्राओं को उनके अपने वातावरण में अच्छी शिक्षा देने के लिए ईएमआरएस की केंद्रीय योजना लागू कर रहा है; ईएमआरएस को नवोदय विद्यालयों के बराबर का दर्जा दिया जाएगा, जिसमें खेल और कौशल विकास के प्रशिक्षण के साथ-साथ स्थानीय कला और संस्कृति को संरक्षित करने की विशेष सुविधाएं भी होंगी।
x. प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम): यह मिशन मूल्यसंवर्धन, उद्यमिता विकास, विपणन सहायता तथा जनजातीय उत्पादक संगठनों को सुदृढ़ बनाने के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों की सतत आजीविका को बढ़ावा देता है, जिसमें लघु वनोपज तथा अन्य जनजातीय उत्पादों पर आधारित मूल्य श्रृंखलाओं पर विशेष बल दिया जाता है।
xi. वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके): वन धन विकास केंद्र, 'लघु वन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य' योजना के तहत स्थापित किए गए हैं, यह योजना ट्राइफेड के माध्यम से लागू की जाती है और इसका उद्देश्य लघु वन उपज इकट्ठा करने वालों को आजीविका में मदद करना और उपज का मूल्य बढ़ाना है।
xii. जनजातीय अनुसंधान, सूचना, शिक्षा, संचार एवं कार्यक्रम (टीआरआई-ईसीई): यह योजना जनजातीय संस्कृति के अनुसंधान, प्रलेखन, क्षमता निर्माण, संरक्षण एवं संवर्धन, जागरूकता सृजन, सूचना प्रसार तथा साक्ष्य-आधारित नीतिगत सहायता हेतु जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता प्रदान करती है।
xiii. निगरानी, मूल्यांकन, सर्वेक्षण एवं सामाजिक लेखा-परीक्षा (एमईएसएसए): यह योजना साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण तथा जनजातीय विकास पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने हेतु जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित कार्यक्रमों की निगरानी, मूल्यांकन, प्रभाव आकलन, सर्वेक्षण तथा सामाजिक लेखा-परीक्षा में सहायता करती है।
xiv. अनुसूचित जनजातियों हेतु उद्यम पूंजी निधि (वीसीएफ-एसटी): यह योजना आय-सृजनकारी उद्यमों की स्थापना एवं विस्तार हेतु अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को रियायती उद्यम पूंजी सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है।
xv. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी): जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत यह एक शीर्ष संगठन है, जिसकी स्थापना विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास हेतु की गई है और यह आजीविका सृजन के लिए विभिन्न योजनाओं को कार्यान्वित करता है। एनएसटीएफडीसी पात्र अनुसूचित जनजाति समुदायों को रियायती ऋण प्रदान करता है।
ये उपाय तमिलनाडु में जनजातीय समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आजीविका और संपर्क (कनेक्टिविटी) तक पहुँच को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इनमें शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पीएमएस, एनएफएचईएसटी, एनओएस, ईएमआरएस और अजजा लड़के-लड़कियों के लिए छात्रावास जैसी योजनाएँ शामिल हैं। पीएम-जनमन के तहत पीवीटीजी बस्तियों में एमएमयू और आयुष स्वास्थ्य केंद्रों (वेलनेस सेंटरों) के ज़रिए, और डीएजेजीयूए के तहत आयोजित स्वास्थ्य और पोषण शिविरों के ज़रिए स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत किया जाता है। डीएजेजीयूए के तहत, वीडीवीके, पीएमजेवीएम, सावधि ऋण, लघु ऋण और एनएसटीएफडीसी व डीएपीएसटी के ज़रिए कौशल विकास के साथ-साथ एमजीएनआरईजीए, पीएम विश्वकर्मा और पीएम-किसान योजनाओं के अभिसरण से आजीविका में मदद दी जाती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य सरकारों और अन्य लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर पीएम-जनमन और डीएजेजीयूए के तहत जनजातीय इलाकों में हर मौसम में चलने वाली सड़कें, बिजली और दूरभाष संपर्क जैसी सुविधाएं देकर संपर्क को बेहतर बनाया जा रहा है।
(ग): तमिलनाडु सहित जनजातीय विकास योजनाओं की वास्तविक और वित्तीय प्रगति की लगातार निगरानी मंत्रालयों की योजनाओं के लिए एसटीसीएमआईएस पोर्टल; संबंधित मंत्रालयों के अभिसरण में बस्ती-वार रियल-टाइम निगरानी के लिए पीएम गति शक्ति पोर्टल पर पीएम-जनमन डैशबोर्ड; पीएम-जनमन और डीएजेजीयूए पर राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्रों के प्रशासनों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें; तथा मंत्रालय द्वारा परिणामों का आकलन करने और कार्यक्रम के कार्यान्वयन को बेहतर बनाने के लिए कराए गए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन अध्ययनों एनएफएचएस और जनसंख्या जनगणना अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का समय-समय पर आकलन के माध्यम से की जाती है। इसके अलावा, तमिलनाडु में अनुसूचित जनजातियों (अजजा) की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में हुई प्रगति निम्नानुसार है:
|
संकेतक
|
तमिलनाडु में अजजा
|
तमिलनाडु (कुल मिलाकर)
|
|
5 साल से कम उम्र के बच्चे – बौनापन (स्टंटेड) (%)
|
31.2
|
25.0
|
|
5 साल से कम उम्र के बच्चे – कम वज़न (वेस्टेड) (%)
|
20.6
|
14.6
|
|
5 साल से कम उम्र के बच्चे – कम वज़न (अंडरवेट) (%)
|
31.1
|
22.0
|
|
महिलाएं (15–49) – कम वज़न/दुबली-पतली (बीएमआई <18.5) (%)
|
19.6
|
12.6
|
|
महिलाएं (15–49) – ज़्यादा वज़न/मोटापा (बीएमआई ≥25) (%)
|
30.2
|
40.4
|
|
अपना मोबाइल फ़ोन रखने वाली महिलाएं (%)
|
54.7
|
74.6
|
|
खुद से बैंक अकाउंट चलाने वाली महिलाएं (%)
|
80.9
|
92.2
|
|
पैसे तक पहुँच रखने वाली महिलाएं (%)
|
52.6
|
42.6
|
स्रोत: एनएफएचएस-5 रिपोर्ट।
तुलनात्मक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर), 2025–26: तमिलनाडु में अनुसूचित जनजातियों और कुल आबादी के बीच तुलना:
|
स्कूली शिक्षा का स्तर
|
तमिलनाडु (अजजा)
|
तमिलनाडु (समग्र)
|
|
फ़ाउंडेशनल (प्री-प्राइमरी से कक्षा II)
|
58.6
|
55.4
|
|
प्रिपरेटरी (कक्षा III से V)
|
112.7
|
89.5
|
|
मिडिल (कक्षा VI से VIII)
|
115.0
|
94.2
|
|
सेकेंडरी (कक्षा IX से XII)
|
91.3
|
91.4
|
स्रोत: यूडीआईएसई+ रिपोर्ट 2025-26 (एनईपी)
(घ): जनजातीय विकास एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य जनजातीय संस्कृति और पहचान के संरक्षण और संवर्धन के साथ बुनियादी ढांचे के निर्माण को जोड़ना है। इस संबंध में पहलों में शामिल हैं:
(i) जनजातीय अनुसंधान, सूचना, शिक्षा, संचार और कार्यक्रम (टीआरआई-ईसीई): यह योजना तमिलनाडु के जनजातीय अनुसंधान संस्थान को जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाने और साक्ष्य-आधारित नीतिगत सहयोग के लिए सहायता प्रदान करती है।
(ii) जनजातीय गौरव दिवस और आदि महोत्सव: मंत्रालय प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' मनाता है और जनजातीय कला, संस्कृति, खान-पान और हस्तशिल्प, जिनमें तमिलनाडु के जनजातीय समुदायों की कला-संस्कृति भी शामिल है, को प्रदर्शित करने और बढ़ावा देने के लिए 'आदि महोत्सव' और इसी तरह के अन्य कार्यक्रम आयोजित करता है।
(iii) वन धन विकास केंद्र: वीडीवीके लघु वन उपज पर आधारित आजीविका को सहारा देते हैं जो, जनजातीय समुदायों के पारंपरिक व्यवसायों और पारिस्थितिक ज्ञान से गहराई से जुड़ी होती हैं, जिससे आय बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक आजीविका के तरीकों को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
(iv) ईएमआरएस: जनजातीय संस्कृति, भाषा और पारंपरिक ज्ञान को बचाना और बढ़ावा देना 'एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय' (ईएमआरएस) योजना का अहम हिस्सा है। इसको हासिल करने के लिए, ईएमआरएस में 'ट्राइबल कॉर्नर' बनाए गए हैं ताकि जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराओं, कला, शिल्प और विरासत को दिखाया और बचाया जा सके। छात्रों को देश की अलग-अलग जनजातीय संस्कृतियों और परंपराओं के बारे में जानने, उनकी सराहना करने और उन्हें मनाने का मौका देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, बैठकें और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। साथ ही, ईएमआरएस में क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षक भी नियुक्त किए गए हैं, जिससे छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषाएँ सीख सकें और उनका परिरक्षण कर सकें।
*****
पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2298126)
आगंतुक पटल : 71