आयुष
azadi ka amrit mahotsav

आयुष प्रणालियों में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2026 5:25PM by PIB Delhi

आयुष मंत्रालय वित्त वर्ष 2021-22 से आयुर्ज्ञान योजना नाम की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना लागू कर रहा है। आयुर्ज्ञान योजना के आयुष में अनुसंधान और नवाचार और आयुर्वेद बायोलॉजी इंटीग्रेटेड हेल्थ रिसर्च (एबीआईएचआर) घटकों के तहत, देश भर के योग्य संगठनों/संस्थानों को वित्तीय सहायता दी जाती है। यह सहायता योजना के दिशानिर्देशों में दिए गए नियमों के अनुसार, आयुष चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रमाण जुटाने के लिए उच्च-गुणवत्ता वाली शोध गतिविधियां करने के लिए दी जाती है। एबीआईएचआर घटक का मुख्य फोकस (जिसे वित्त वर्ष 2023-24 में योजना में जोड़ा गया था), पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के साथ बुनियादी विज्ञान को मिलाकर आयुर्वेद के क्षेत्र में उच्च-स्तरीय शोध गतिविधियां करना है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान एबीआईएचआर के तहत कुल 11 उच्च-स्तरीय शोध परियोजनाओं को 58.28 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। इसके अलावा, आयुष में शोध और नवाचार घटक के तहत, पिछले तीन वर्षों में 73 शोध परियोजनाओं को 11.82 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।

इसके अलावा, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच), केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम), केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस) और केंद्रीय योग तथा नेचुरोपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरवाईएन) जैसी आयुष मंत्रालय के तहत आने वाली अनुसंधान परिषद भी अपने शोध संस्थानों/इलाज केंद्र/पेरिफेरल यूनिट के ज़रिए नैदानिक अनुसंधान, दवा परीक्षण, दवा सत्यापन, दवा प्रमाणीकरण, दवा मानकीकरण, जन स्वास्थ्य अनुसंधान, मौलिक अनुसंधान और महामारी से जुड़े अनुसंधानों जैसी गतिविधियां करती हैं।

अनुसंधान और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए अनुसंधान परिषद को पिछले तीन सालों (यानी वित्त वर्ष -2023-24 से 2025-26) में दिए गए/जारी किए गए और इस्तेमाल किए गए कुल कोष का ब्योरा अनुलग्नक में दिया गया है।

आयुष मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में पारंपरिक चिकित्सा को शामिल करने में मदद के लिए ये पहल की हैं:

  1. 10 जनवरी 2024 को नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ द्वारा इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीजेज (आईसीडी-11) ट्रेडिशनल मेडिसिन मॉड्यूल-2 लॉन्च किया गया। इससे आईसीडी-11 में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के लिए बीमारी से जुड़े कोड शामिल करना संभव हुआ, जिससे स्वास्थ्य सूचना प्रणाली में पारंपरिक चिकित्सा के मानकीकृत दस्तावेज़ीकरण और रिपोर्टिंग में आसानी हुई।
  2. डब्ल्यूएचओ ने आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध पर अपनी शब्दावली विकसित और प्रकाशित की। यह शब्दावली नैदानिक उपचारों, शिक्षा, अनुसंधान और नीतियों में मदद के लिए दुनिया भर में एक जैसी शब्दावली उपलब्ध कराती है।
  3. डब्ल्यूएचओ ने आयुर्वेद और यूनानी के प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए बेंचमार्क दस्तावेज़ (2022) भी प्रकाशित किए। इनका मकसद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मानकीकृत शिक्षा, प्रशिक्षण और बेहतर गुणवत्ता वाली क्लिनिकल प्रैक्टिस को बढ़ावा देना है।
  4. डब्ल्यूएचओ और आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई योग में प्रशिक्षण पर डब्ल्यूएचओ की तकनीकी रिपोर्ट, योग प्रशिक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करती है। इससे स्वास्थय सेवाओं में योग की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वैश्विक एकीकरण को बढ़ावा मिलता है।
  5. गुजरात के जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (जीटीएमसी) की स्थापना की गई। यह सेंटर एक वैश्विक ज्ञान केंद्र के तौर पर काम करेगा, जिसका मकसद प्रमाण जुटाने, शोध और नवाचार तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक चिकित्सा को शामिल करने की प्रक्रिया को मज़बूत करना है।
  6. पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग के लिए अलग-अलग देशों के साथ समझौता ज्ञापन के ज़रिए द्विपक्षीय सहयोग, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान, नियमन, गुणवत्ता आश्वासन और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
  • vii. एकीकृत स्वास्थ्य सेवा पर अंतरराष्ट्रीय बातचीत को बढ़ावा देना, जिसके लिए वैश्विक सम्मेलन, मंत्रियों की बैठकें और डब्ल्यूएचओ की कई पहलों की मदद ली गई। इनमें 2023 और 2025 में भारत में हुए पारंपरिक चिकित्सा पर दो डब्ल्यूएचओ वैश्विक सम्मेलन भी शामिल हैं, जिनमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और प्राइमरी स्वास्थय सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा को प्रमाण-आधारित तरीके से शामिल करने पर ज़ोर दिया गया।
  1. आयुष चेयर और विदेशी विश्वविद्यालयों व अनुसंधान संगठनों के साथ संस्थागत साझेदारी के ज़रिए अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना, ताकि इससे एकीकृत चिकित्सा में शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल एक्सचेंज को बढ़ावा मिल सके।  

क्लिनिकल ट्रायल और ट्रायल वाली दवाओं की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए, सीसीआरएएस ने जर्मनी की चैरिटे यूनिवर्सिटी के साथ एक शोध अध्ययन किया है, जिसका शीर्षक है "घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में एक संपूर्ण इलाज प्रणाली के तौर पर आयुर्वेद की प्रभावशीलता और सुरक्षा- पारंपरिक आयुर्वेद निदान पर आधारित एक मल्टीसेंटर, रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल"।

इसके अलावा, सीसीआरएच ने जर्मनी, कनाडा, यूएसए, यूके, अर्जेंटीना, इज़राइल, आर्मेनिया, मैक्सिको और ब्राज़ील में मेडिकल सेंटरों/अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों/संगठनों के साथ होम्योपैथिक चिकित्सा के क्षेत्र में 12 समझौता ज्ञापनों और 01 आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इन एमओयू का मुख्य मकसद होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में शोध और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मज़बूत और विकसित करना है। इसमें संयुक्त अनुसंधान परियोजना, जानकारी का आदान-प्रदान, सेमिनार/वर्कशॉप का आयोजन आदि शामिल हैं।

सीसीआरयूएम ने यूनानी चिकित्सा को दुनिया भर में बढ़ावा देने और पहचान दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ इन एमओयू पर भी दस्तख़त किए हैं:

•  यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्टर्न केप, केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका के साथ समझौता ज्ञापन

•  यूनानी चेयर की स्थापना के लिए हमदर्द यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश के साथ समझौता ज्ञापन

•  यूनानी चिकित्सा के अनुसंधान और विकास के लिए ताजिकिस्तान के साथ समझौता ज्ञापन

•  तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, ईरान के साथ समझौता ज्ञापन

•  लोटस होलिस्टिक हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, अबू धाबी, यूएई के साथ समझौता ज्ञापन

आयुष प्रणाली को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए, आयुर्स्वास्थ्य योजना के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) घटक के तहत, राष्ट्रीय स्तर के 09 संगठनों को आर्थिक मदद दी गई। इसका मकसद आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ मिलकर आयुष में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, आयुष प्रणाली की वैज्ञानिक प्रमाणिकता को मजबूत करना और इसे व्यापक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाना था।

इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में आयुष चिकित्सा प्रणालियों के क्षेत्र में उच्च-गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को बेहतर बनाने और बढ़ावा देने के लिए फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी (पीसीआईएमएंडएच) ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  1. एएसयूएंडएच दवाओं के गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में अकादमिक और शोध गतिविधियों पर सहयोग करने के लिए, पीसीआईएमएंडएच ने कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में श्री कृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में जामिया हमदर्द (डीम्ड यूनिवर्सिटी), मोहाली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर), दिल्ली में जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी और जयपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
  2. "वन हर्ब, वन स्टैंडर्ड" को बढ़ावा देने और सुविधाजनक बनाने के लिए मंत्रालयों के बीच सहयोग के मकसद से, पीसीआईएमएंडएच ने इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
  3. आयुर्वेदिक शोध में सहयोग को मजबूत करने और फार्माकोपियल स्टैंडर्डाइजेशन, क्वालिटी एश्योरेंस और संयुक्त अनुसंधान में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए, पीसीआईएमएंडएच ने जामनगर में इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (आईटीआरए) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
  4. आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (एएसयूएंडएच) दवाओं पर क्वालिटी कंट्रोल, स्टैंडर्डाइज़ेशन और प्रमाण आधारित शोध अध्ययनों के क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए, पीसीआईएमएंडएच ने एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा के साथ एक समझौता ज्ञापन साइन किया है।
  5. एएसयूएंडएच दवाओं पर फार्माकोपियल मोनोग्राफ, बॉटनिकल और फाइटोकेमिकल रेफरेंस स्टैंडर्ड्स और फार्माकोलॉजिकल स्टडीज़ के विकास को बढ़ावा देने और सुविधाजनक बनाने के लिए, पीसीआईएमएंडएच ने आयुष काउंसिल (सीसीआरएएस, सीसीआरएस, सीसीआरयूएम और सीसीआरएच), सीएसआईआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स (सीआईएमएपी), सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो-रिसोर्स टेक्नोलॉजी (सीएसआईआर-आईएचबीटी) और सीएसआईआर-नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
  6. पारंपरिक चिकित्सा (टीएम) क्वालिटी एश्योरेंस के क्षेत्र में सहयोग के लिए, पीसीआईएमएंडएच ने इंडोनेशिया गणराज्य के खाद्य और औषधि प्राधिकरण के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।
  • vii. पीसीआईएमएंडएच चुनिंदा हर्बल सामग्रियों पर डब्ल्यूएचओ इंटरनेशनल हर्बल फार्माकोपिया (आईएचपी) के लिए मोनोग्राफ विकसित करने के लिए डब्ल्यूएचओ के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

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अनुलग्नक

पिछले तीन वर्षों (यानी वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26) के लिए जारी और इस्तेमाल किए गए फंड का परिषद-वार विवरण:

परिषद का नाम

वर्ष

आवंटित/जारी

(करोड़ में)

इस्तेमाल किया गया

(करोड़ में)

सीसीआरएएस

 

2023-24

394.90

392.10

2024-25

469.72

469.72

2025-26

526.34

526.34

सीसीआरएच

2023-24

141.00

140.93

2024-25

162.00

162.00

2025-26

214.00

208.88

सीसीआरवाईएन

2023-24

43.03

40.38

2024-25

75.64

42.07

2025-26

46.95

41.60

सीसीआरयूएम

2023-24

174.10

174.10

2024-25

190.05

190.05

2025-26

199.00

199.00

सीसीआरएस

2023-24

50.91

47.72

2024-25

55.94

51.82

2025-26

71.34

57.23

 

यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एनएस


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