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सहकारिता मंत्रालय
सहकारी समितियों में वित्तीय अनियमितताएं
प्रविष्टि तिथि:
11 AUG 2026 5:41PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के अनुसार, देशभर में कुल 8.53 लाख सहकारी समितियों में से 6.63 लाख कार्यशील, 1.41 लाख गैर-कार्यशील तथा 49,177 समितियाँ परिसमापनाधीन हैं। कुल 6.63 लाख कार्यशील सहकारी समितियों में से 5.95 लाख समितियों का लेखा-परीक्षण (Audit) हो चुका है, जबकि 0.68 लाख समितियों का लेखा-परीक्षण नहीं हुआ है। कार्यशील एवं लेखा-परीक्षित सहकारी समितियों का राज्यवार विवरण परिशिष्ट-1 में संलग्न है। वित्तीय अनियमितताओं, कमजोर प्रबंधन तथा समय पर लेखा-परीक्षण न होने के कारण निष्क्रिय पड़ी सहकारी समितियों का विवरण संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा संधारित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (MSCS), जो बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 (MSCS Act, 2002) के प्रावधानों के तहत पंजीकृत हैं, स्वायत्त सहकारी संगठनों के रूप में कार्य करती हैं और अपने सदस्यों के प्रति उत्तरदायी होती हैं। वित्तीय गबन सहित किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामले में, ऐसी बहु-राज्य सहकारी समितियों के विरुद्ध MSCS अधिनियम, 2002 की धारा 86 के तहत परिसमापन की कार्यवाही शुरू की जाती है। तत्पश्चात, समिति की परिसंपत्तियों के परिसमापन तथा अधिनियम की धारा 90 के प्रावधानों के तहत निवेशकों/सदस्यों को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए MSCS अधिनियम, 2002 की धारा 89 के तहत परिसमापक (Liquidator) नियुक्त किया जाता है। अब तक कुल 115 बहु-राज्य सहकारी समितियों परिसमापनाधीन है। ऐसी समितियों की राज्यवार संख्या परिशिष्ट-2 में संलग्न है।
सहकारिता मंत्रालय ने दिनांक 06.07.2021 को अपनी स्थापना के बाद से “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण के तहत सहकारी समितियों में पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए कई पहलें की हैं। प्रमुख पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 (MSCS Act, 2002) में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया, जिसका उद्देश्य बहु-राज्य सहकारी समितियों में सुशासन को सुदृढ़ करना, पारदर्शिता बढ़ाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार करना आदि है।
- बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 63A के तहत सहकारी पुनर्वास, पुनर्निर्माण एवं विकास निधि (Cooperative Rehabilitation, Reconstruction and Development Fund) की स्थापना की गई, ताकि बीमार बहु-राज्य सहकारी समितियों को पुनर्जीवित किया जा सके तथा उनकी अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।
- PACS के मॉडल उपनियमों (Model Byelaws) का प्रसार किया गया, जिससे भंडारण, प्रसंस्करण, LPG वितरण तथा कॉमन सर्विस सेंटर जैसी विभिन्न गतिविधियों में विविधीकरण संभव हुआ है। इससे बेहतर सुशासन मानकों को सुनिश्चित करने तथा सदस्य-केंद्रित संचालन को बढ़ावा देने में सहायता मिली है।
- PACS के कम्प्यूटरीकरण परियोजना के माध्यम से कार्यशील PACS को एक समान ERP-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाकर PACS को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता, दक्षता, अभिलेख प्रबंधन तथा सेवा वितरण में सुधार हुआ है।
- राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCCT) के माध्यम से देशभर में सहकारी समितियों के सदस्यों, निदेशक मंडल, कर्मचारियों, राज्य अधिकारियों तथा इच्छुक युवाओं के लिए क्षमता निर्माण एवं कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए 20 प्रशिक्षण संस्थानों का नेटवर्क कार्यरत है।
- राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) का विकास किया गया है, जो देशभर की 8.53 लाख सहकारी समितियों, जिनमें लगभग 32 करोड़ सदस्य हैं, का एक व्यापक डिजिटल भंडार है।
- ग्रामीण सहकारी बैंकों को RBI की एकीकृत लोकपाल योजना (Integrated Ombudsman Scheme) के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिससे अधिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिली है।
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परिशिष्ट-1
कार्यशील सहकारी समितियों की राज्यवार लेखा-परीक्षण स्थिति
|
क्र. सं.
|
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
|
लेखा-परीक्षण की स्थिति
|
|
कुल कार्यशील सहकारी समितियाँ
|
लेखा-परीक्षित सहकारी समितियों की संख्या
|
गैर-लेखा-परीक्षित सहकारी समितियों की संख्या
|
|
1
|
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह
|
1,217
|
1,160
|
57
|
|
2
|
आंध्र प्रदेश
|
12,408
|
11,970
|
438
|
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
1,034
|
542
|
492
|
|
4
|
असम
|
8,071
|
5,114
|
2,957
|
|
5
|
बिहार
|
22,243
|
19,896
|
2,347
|
|
6
|
चंडीगढ़
|
195
|
183
|
12
|
|
7
|
छत्तीसगढ़
|
10,380
|
9,261
|
1,119
|
|
8
|
दिल्ली
|
1,827
|
1,782
|
45
|
|
9
|
गोवा
|
3,165
|
2,506
|
659
|
|
10
|
गुजरात
|
79,823
|
73,340
|
6,483
|
|
11
|
हरियाणा
|
15,447
|
13,228
|
2,219
|
|
12
|
हिमाचल प्रदेश
|
5,055
|
4,725
|
330
|
|
13
|
जम्मू एवं कश्मीर
|
9,132
|
3,994
|
5,138
|
|
14
|
झारखंड
|
8,144
|
7,220
|
924
|
|
15
|
कर्नाटक
|
40,440
|
37,732
|
2,708
|
|
16
|
केरल
|
15,106
|
14,624
|
482
|
|
17
|
लद्दाख
|
166
|
158
|
8
|
|
18
|
लक्षद्वीप
|
53
|
22
|
31
|
|
19
|
मध्य प्रदेश
|
27,041
|
25,479
|
1,562
|
|
20
|
महाराष्ट्र
|
2,19,775
|
2,11,329
|
8,446
|
|
21
|
मणिपुर
|
5,330
|
3,992
|
1,338
|
|
22
|
मेघालय
|
3,100
|
2,439
|
661
|
|
23
|
मिजोरम
|
1,274
|
1,237
|
37
|
|
24
|
नागालैंड
|
1,943
|
1,491
|
452
|
|
25
|
ओडिशा
|
8,063
|
4,864
|
3,198
|
|
26
|
पुदुचेरी
|
400
|
399
|
1
|
|
27
|
पंजाब
|
12,666
|
11,715
|
951
|
|
28
|
राजस्थान
|
27,172
|
23,497
|
3,675
|
|
29
|
सिक्किम
|
1,398
|
1,012
|
386
|
|
30
|
तमिलनाडु
|
21,090
|
19,384
|
1,706
|
|
31
|
तेलंगाना
|
46,672
|
43,478
|
3,194
|
|
32
|
दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव
|
379
|
170
|
209
|
|
33
|
त्रिपुरा
|
2,237
|
1,744
|
493
|
|
34
|
उत्तराखंड
|
4,450
|
2,599
|
1,851
|
|
35
|
उत्तर प्रदेश
|
22,888
|
15,528
|
7,360
|
|
36
|
पश्चिम बंगाल
|
23,028
|
16,977
|
6,051
|
| |
कुल
|
6,62,812
|
5,94,791
|
68,020
|
स्रोत: एनसीडी पोर्टल (दिनांक 15.07.2026 की स्थिति अनुसार)
परिशिष्ट-2
परिसमापनाधीन बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCS) की राज्यवार संख्या
|
क्रम. सं.
|
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
|
परिसमापनाधीन बहु-राज्य सहकारी समितियों की संख्या
|
|
1
|
आंध्र प्रदेश
|
2
|
|
2
|
बिहार
|
1
|
|
3
|
चंडीगढ़
|
1
|
|
4
|
दिल्ली
|
16
|
|
5
|
गोवा
|
1
|
|
6
|
गुजरात
|
4
|
|
7
|
झारखंड
|
1
|
|
8
|
कर्नाटक
|
1
|
|
9
|
महाराष्ट्र
|
23
|
|
10
|
ओडिशा
|
12
|
|
11
|
पंजाब
|
1
|
|
12
|
राजस्थान
|
26
|
|
13
|
तमिलनाडु
|
3
|
|
14
|
तेलंगाना
|
2
|
|
15
|
दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव
|
1
|
|
16
|
उत्तर प्रदेश
|
14
|
|
17
|
पश्चिम बंगाल
|
6
|
|
|
कुल
|
115
|
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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AK/AP
(रिलीज़ आईडी: 2297738)
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