सहकारिता मंत्रालय
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मुंबई में NUCFDC के नवीन परिसर का उद्द्घाटन किया और ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में हर भारतीय को समृद्ध बनाना है, इसके लिए स्वरोजगार की व्यवस्था करनी होगी और यह काम अर्बन सहकारी बैंक ही कर सकते हैं
अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन NUCFDC से बैंकों को टेक्निकल सपोर्ट, RBI गाइडलाइंस के अनुरूप व्यवस्था, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और म्यूल हंटर जैसे ज़रूरी सॉफ्टवेयर मिलेंगे
NUCFDC का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को स्ट्रीमलाइन कर उन्हें देश और दुनिया की स्पर्धा में खड़ा करना है
देश के लगभग 1,400 शहरी सहकारी बैंकों को एक साझा अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन से जोड़ने का उद्देश्य टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग, कम्प्लायंस और आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना है
आज शुरू हुए 'बैंक इन ए बॉक्स' से हर शाखा को कोर बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और क्लाउड कम्प्लायंस किफायती दरों पर एक ही बॉक्स में मिलेंगे, इससे छोटे बैंकों के भी विश्वस्तरीय बैंकिंग करने का रास्ता प्रशस्त होगा
सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (SOC), डिजिटल फॉरेंसिक, म्यूल हंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग जैसी साझा सुविधाएं शहरी सहकारी बैंकों को साइबर फ्रॉड की पहचान, निगरानी और बढ़ते डिजिटल जोखिमों से निपटने की आधुनिक क्षमता देंगी
NFSU और अम्ब्रेला संगठन NUCFDC के बीच हुए MoU से छोटे से छोटे शहरी सहकारी बैंकों की ऑनलाइन बैंकिंग को भी फॉरेंसिक साइंस की सुरक्षा मिल सकेगी
सहकारिता का कॉन्सेप्ट है कि छोटी-छोटी पूंजी लगाकर बड़ा व्यापार खड़ा किया जाए, जिससे अनेक लोगों का भला हो सके
कानूनी व तकनीकी परामर्श के लिए सहकार पाठशाला और त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय मिलकर शहरी सहकारी बैंकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाएंगे
सबसे बड़ी चुनौती अर्बन बैंकों का अम्ब्रेला संगठन बनाना था, हमने 300 करोड़ रुपये की पूंजी एकत्रित की और फंक्शनिंग के सारे कार्य कर इसे ज़मीन पर उतारा
प्रविष्टि तिथि:
08 AUG 2026 6:17PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में आज मुंबई के BSE इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और राष्ट्रव्यापी सेवा बंडल के अंतर्गत कोर बैंकिंग तथा उससे जुड़ी सेवाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर NUCFDC और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय—NFSU के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इससे पूर्व केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने मुंबई के फोर्ट स्थित शारदा सदन में NUCFDC के नवीन कार्यालय परिसर का उद्घाटन भी किया। ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, केन्द्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल, महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री श्री बाबासाहेब पाटील, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री श्री जयकुमार रावल और श्री आशीष शेलार, सहकारिता मंत्रालय के सचिव श्री आशीष कुमार भूटानी, NUCFDC के अध्यक्ष श्री ज्योतिन्द्र मेहता सहित विभिन्न राज्यों के शहरी सहकारी बैंक महासंघों के प्रतिनिधि तथा देशभर के शहरी सहकारी बैंकों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों से प्रतीक्षित शहरी सहकारी बैंकों का अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन अब भारतीय रिजर्व बैंक की मान्यता, पर्याप्त पूंजी और अपने नए कार्यालय के साथ जमीनी वास्तविकता बन गया है। ।श्री अमित शाह ने कहा कि कार्यक्रम स्थल का भी अपना विशेष ऐतिहासिक महत्त्व है। वर्तमान में इस स्थान का उपयोग सभागार के रूप में हो रहा है, लेकिन लगभग 100 वर्षों तक यह स्थान भारत के शेयर बाजार की धड़कन रहा और यहीं से देश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान मिला।उन्होंने कहा कि BSE का यह ऐतिहासिक ट्रेडिंग हॉल अनेक ऐसी बड़ी कंपनियों की यात्रा का साक्षी रहा है, जिन्होंने स्वतंत्रता से पहले और स्वतंत्रता के बाद भारत के पुनर्निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज यही ऐतिहासिक स्थल शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में एक नए परिवर्तन का साक्षी बन रहा है
श्री अमित शाह ने कहा कि अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन शहरी सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित अनुपालन मानकों को पूरा करने में आवश्यक मार्गदर्शन देगा और बैंकों के सुचारू संचालन के लिए तकनीकी तथा संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे नए सुधारों और नियामकीय बदलावों की जानकारी भी शहरी सहकारी बैंकों तक समय पर पहुंच सकेगी। उन्होंने कहा कि ‘MuleHunter’ जैसे आवश्यक सॉफ्टवेयर, आधुनिक तकनीकी समाधान और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की सुविधा भी अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से उपलब्ध होगी, जिसकी इस क्षेत्र को अत्यंत आवश्यकता है। श्री अमित शाह ने कहा कि पारदर्शिता बढ़ाकर जनता और भारतीय रिजर्व बैंक—दोनों का विश्वास मजबूत करने का मार्ग भी यह संगठन प्रशस्त करेगा। इससे शहरी सहकारी बैंक आधुनिक बैंकिंग प्रतिस्पर्धा में अन्य बैंकों के साथ समान स्तर पर खड़े हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि इन सभी सेवाओं से आगे बढ़कर अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन शहरी सहकारी बैंकिंग आंदोलन को नया जीवन देगा, उसकी पहुंच का विस्तार करेगा तथा बैंकिंग सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जब उन्होंने सहकारिता मंत्रालय का दायित्व संभालने के बाद पहली बार NABARD और संबंधित प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी, तब शहरी सहकारी बैंकों के लिए अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना सबसे बड़ी चुनौती और लगभग असंभव प्रतीत होने वाला कार्य था। उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और सहकारी क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के सहयोग से बहुत कम समय में 306 करोड़ रुपये की पूंजी एकत्रित की गई तथा संगठन की अनेक सेवाओं और गतिविधियों की सफलतापूर्वक शुरुआत की गई। श्री अमित शाह ने कहा कि जो परिकल्पना कभी अत्यंत कठिन दिखाई देती थी, वह आज एक जमीनी वास्तविकता बन चुकी है और शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर आगे बढ़ रही है।
श्री अमित शाह ने कहा कि कहा कि आज का दिन शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ‘Bank in a Box’ सेवा का शुभारंभ हुआ है। इसके माध्यम से शहरी सहकारी बैंकों को कोर बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, क्लाउड सेवाएं, नियामकीय अनुपालन तथा आधुनिक बैंकिंग से जुड़ी अनेक सुविधाएं एक ही एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि इससे केवल एक शाखा वाला छोटा शहरी सहकारी बैंक भी बिना अधिक खर्च किए अपने ग्राहकों को आधुनिक और विश्वस्तरीय बैंकिंग सुविधाएं प्रदान कर सकेगा। यह पहल छोटे बैंकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और उन्हें प्रतिस्पर्धी बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बैंकिंग के वर्तमान दौर में फोरेंसिक विज्ञान के सहयोग के बिना न तो बैंक पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं और न ही उनके ग्राहक। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए NUCFDC को राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय—NFSU के साथ समझौता ज्ञापन करने का सुझाव दिया गया था। उन्होंने कहा कि NFSU ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता विकसित की है तथा देश के अनेक बैंकों को पेशेवर सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। NUCFDC और NFSU के बीच यह सहयोग शहरी सहकारी बैंकों तथा उनके ग्राहकों की डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि NUCFDC और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय—NFSU के बीच हुए समझौते के माध्यम से छोटे से छोटे शहरी सहकारी बैंक की प्रत्येक शाखा तक साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक से जुड़ी सुविधाएं अत्यंत कम लागत पर पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, इन क्षेत्रों में कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा अनुसंधान की व्यवस्थाएं ‘Bank in a Box’ के माध्यम से एकीकृत रूप में उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान शुरू किया गया सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर शहरी सहकारी बैंकों को चौबीसों घंटे साइबर निगरानी, त्वरित मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने सभी शहरी सहकारी बैंकों से इस सेंटर का सदस्य बनने का आग्रह करते हुए कहा कि डिजिटल खतरों से बैंकों, ग्राहकों और जमाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसकी सदस्यता अत्यंत आवश्यक है।
श्री अमित शाह ने सभी शहरी सहकारी बैंकों से अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन और उसके सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर का सदस्य बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सदस्यता शुल्क बैंकों की शाखाओं की संख्या के अनुरूप रखा जाना चाहिए, जिससे एक शाखा वाला छोटा बैंक भी इसका सदस्य बन सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि शहरी सहकारी बैंकों को सुव्यवस्थित करना, राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना तथा संकट के समय उनकी सहायता करना है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि देश के लगभग 1,400 शहरी सहकारी बैंकों में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की जमाराशि है और इन बैंकों की देश के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदारों, छोटे व्यापारियों, कुटीर उद्योगों, MSME, स्थानीय उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों और मध्यम वर्ग के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए छोटे ऋण उपलब्ध कराने का कार्य शहरी सहकारी बैंक प्रभावी ढंग से करते हैं। बड़े वाणिज्यिक बैंकों के लिए समाज के इन वर्गों तक उसी निकटता और संवेदनशीलता के साथ पहुंचना संभव नहीं होता। तहसील स्तर पर स्थापित एक शहरी सहकारी बैंक पूरे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने का माध्यम बनता है।
श्री अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे ऋणों में पुनर्भुगतान की प्रवृत्ति अत्यंत मजबूत होती है, क्योंकि सामान्य और छोटे आय वर्ग के ऋणग्राही अपने दायित्वों के प्रति अधिक ईमानदार होते हैं। उन्होंने बताया कि उनके बैंक ने बिना गारंटी और बिना किसी कोलेटरल के ढाई लाख रुपये तक का ऋण देने का निर्णय लिया था।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि उनके बैंक में बिना गारंटी और बिना कोलेटरल छोटे ऋण देने की योजना आज भी जारी है तथा इसकी सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत वितरित ऋणों में लगभग पूरे पैसे की रिकवरी ब्याज सहित वापस आई है। शेष अत्यंत सीमित मामलों में भी ऋण न लौटने का कारण ऋणग्राही की मृत्यु जैसी असाधारण परिस्थितियां रही हैं। श्री अमित शाह ने कहा कि यह अनुभव प्रमाणित करता है कि ऋण जितना छोटा होता है, उसकी वसूली उतनी ही बेहतर होती है और छोटे ऋणग्राही अपने वित्तीय दायित्वों के प्रति अत्यंत ईमानदार होते हैं।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में स्वरोजगार के अवसर पैदा करने में सहकारिता की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि बड़े व्यापार के लिए केवल किसी एक व्यक्ति की बड़ी पूंजी आवश्यक नहीं होती। छोटे-छोटे लोगों को सहकारिता के माध्यम से जोड़कर, उनकी छोटी-छोटी पूंजी को एकत्रित कर बड़ी पूंजी का निर्माण किया जा सकता है और उसके आधार पर विशाल व्यावसायिक संस्थान खड़े किए जा सकते हैं। यही सहकारिता की मूल शक्ति है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने अमूल, IFFCO, KRIBHCO और लिज्जत पापड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि इन संस्थाओं की सफलता किसी एक बड़े पूंजी निवेशक के कारण नहीं, बल्कि लाखों छोटे सदस्यों की सामूहिक भागीदारी से संभव हुई है। उन्होंने कहा कि अमूल आज लगभग एक लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये का कारोबार करता है और इसमें करीब 33 लाख महिलाओं की हिस्सेदारी है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सहकारिता छोटी पूंजी और व्यापक जनभागीदारी को जोड़कर एक बड़ी आर्थिक शक्ति में बदल सकती है।उन्होंने कहा कि आधुनिक बैंकिंग के लिए डिजिटल बैंकिंग, रियल-टाइम भुगतान, साइबर और डेटा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित धोखाधड़ी रोकथाम प्रणाली तथा नियामकीय मानकों की पूर्ति में अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन शहरी सहकारी बैंकों की सहायता करेगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र में देश के सर्वाधिक 449 शहरी सहकारी बैंक हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और कर्नाटक मिलकर देश के अधिकांश शहरी सहकारी बैंकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि गतिविधियों और शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक उपस्थिति को देखते हुए NUCFDC का मुख्यालय दिल्ली से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया जाएगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन की अवधारणा पूरी तरह स्पष्ट है—शहरी सहकारी बैंकों को तकनीकी अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, भुगतान प्रणाली और आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं अत्यंत किफायती लागत पर उपलब्ध कराना। उन्होंने कहा कि यदि देश के सभी 1,400 शहरी सहकारी बैंक इन सेवाओं, सॉफ्टवेयर और तकनीकी व्यवस्थाओं को अलग-अलग खरीदें तथा उनका रखरखाव स्वयं करें, तो इसकी लागत बहुत अधिक होगी। इसके विपरीत, अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन सभी बैंकों की ओर से सामूहिक अनुबंध करेगा, आवश्यक सॉफ्टवेयर खरीदेगा और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा, जिससे लागत में बड़ी कमी आएगी और छोटे बैंक भी आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकेंगे।
श्री अमित शाह ने कहा कि अम्ब्रेला फ्रेमवर्क और नए कार्यालय के शुभारंभ के साथ सहकार CBS, साझा भुगतान सेवाएं, लोन ओरिजिनेशन प्रणाली, सहकार क्लाउड और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर जैसी अनेक सेवाओं को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त MuleHunter और अन्य AI आधारित प्रणालियां, सामूहिक साइबर बीमा, NFSU के सहयोग से छोटी से छोटी बैंक तक डिजिटल फोरेंसिक क्षमता का विस्तार, आधार आधारित सेवाएं, नियामकीय अनुपालन का स्वचालन तथा जोखिम प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि ये सभी पहल शहरी सहकारी बैंकों को अधिक सुरक्षित, सक्षम, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच विश्वास और संवाद के आधार पर शहरी सहकारी बैंकों से संबंधित अनेक मुद्दों का समाधान किया गया है। इनमें बिना अलग अनुमति के 15 प्रतिशत तक शाखाएं खोलने, डोरस्टेप बैंकिंग, पात्र टियर-3 बैंकों के लिए शेड्यूल्ड बैंक का दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने, RBI में नोडल अधिकारी की नियुक्ति, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य को 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करने, आवास ऋण सीमा बढ़ाने और वन टाइम सेटलमेंट की सुविधा देने जैसे निर्णय शामिल हैं।
श्री अमित शाह ने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच पारस्परिक धारणा एवं अविश्वास की पुरानी स्थिति से बाहर निकलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्री के रूप में अपने पांच वर्षों के अनुभव में उन्होंने पाया है कि जब भी सहकारी क्षेत्र ने विश्वास और पारदर्शिता के साथ कदम आगे बढ़ाया, भारतीय रिजर्व बैंक ने सक्रिय रूप से सहयोग किया। शहरी सहकारी बैंकों के अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना इस विश्वास-आधारित सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वर्षों तक शहरी सहकारी बैंकों को नई शाखाएं खोलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें बिना अलग अनुमति के अपनी शाखाओं में 15 प्रतिशत तक विस्तार की सुविधा दी गई है। पहले अनुसूचित बैंकों के अतिरिक्त अन्य शहरी सहकारी बैंकों के लिए डोरस्टेप बैंकिंग संभव नहीं थी, लेकिन अब वे ग्राहकों को घर बैठे डिमांड ड्राफ्ट और जीवन प्रमाण-पत्र जैसी सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। पात्र टियर-3 सहकारी बैंकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में शामिल होकर अनुसूचित बैंक का दर्जा प्राप्त करने का मार्ग भी सरल बनाया गया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के साथ नियमित संवाद के लिए अपनी स्थापना के बाद पहली बार एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण—PSL के लक्ष्य को 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत किया गया है और शहरी सहकारी बैंकों के लिए आवास ऋण की सीमा बढ़ाई गई है। महिला ऋणग्राहियों के लिए निर्धारित 2 लाख रुपये की सीमा तथा स्वर्ण ऋण पर लागू सीमा को भी हटाया गया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि NPA खातों से संबंधित प्रावधानों के अनुपालन के लिए शहरी सहकारी बैंकों को चरणबद्ध ‘ग्लाइड पाथ’ उपलब्ध कराया गया है, जिससे बैंकों पर एक ही वर्ष में पूरा वित्तीय भार न पड़े। पहले केवल वाणिज्यिक और राष्ट्रीयकृत बैंकों को उपलब्ध वन टाइम सेटलमेंट—OTS की सुविधा अब शहरी सहकारी बैंकों को भी प्रदान की गई है। व्यक्तिगत आवास ऋण की सीमा बढ़ाने के साथ लाइसेंस संबंधी शुल्क में भी कमी की गई है।
श्री अमित शाह कहा कि शहरी सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों को ‘Member Lending Institution’ का दर्जा दिया गया है, जिससे 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज और कोलेटरल-मुक्त ऋण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके अतिरिक्त सहकारी समितियों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये की गई है। श्री अमित शाह ने कहा कि इन सुधारों से शहरी सहकारी बैंक अपनी वित्तीय पहुंच बढ़ाने, ग्राहकों को बेहतर ऋण सुविधाएं देने और आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था में प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि बीते पांच वर्षों में भारतीय रिजर्व बैंक के साथ समन्वय से शाखाएं खोलने की अनुमति, वित्तीय पात्रता संबंधी मानकों में राहत और शहरी सहकारी बैंकों से जुड़े अनेक लंबित विषयों का समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ यह समझना भी आवश्यक है कि भारतीय रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी एक नियामक के रूप में यह सुनिश्चित करना है कि बैंक सुचारू रूप से और निर्धारित नियमों के अनुसार चलें तथा जमाकर्ताओं का धन पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसी उद्देश्य से शहरी सहकारी बैंकों के लिए अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना की गई है।
श्री अमित शाह ने कहा कि देश के सभी 1,400 शहरी सहकारी बैंकों को इस अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन का सदस्य बनना चाहिए। बैंकों को अपने कामकाज में पारदर्शिता लानी होगी, आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनानी होगी, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना होगा और ग्राहकों को सभी प्रकार की आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी, ताकि वे प्रतिस्पर्धा में बने रहने के साथ-साथ अपना विस्तार भी कर सकें।उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1,400 शहरी सहकारी बैंकों में से 650 बैंक अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य बन चुके हैं और सदस्यता लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंची है। उन्होंने NUCFDC से छोटे और एक शाखा वाले बैंकों की सुविधा के अनुरूप सदस्यता शुल्क को और किफायती बनाने की अपेक्षा व्यक्त की। श्री अमित शाह ने देशभर के शहरी सहकारी बैंक महासंघों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे अगले एक वर्ष के भीतर शत-प्रतिशत शहरी सहकारी बैंकों को अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी निभाएं।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विश्व में समृद्धि के शीर्ष पर पहुंचाने और प्रत्येक क्षेत्र में प्रथम बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि भारत को समृद्ध बनाने के लिए प्रत्येक भारतीय को समृद्ध बनाना होगा और इसके लिए स्वरोजगार की मजबूत व्यवस्था खड़ी करनी होगी। शहरी सहकारी बैंक इस लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का अर्थ केवल बैंकों को समृद्ध करना नहीं, बल्कि स्वरोजगार उत्पन्न करने वाले उनके ग्राहकों और बैंक—दोनों को समृद्ध बनाना है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन छोटे से छोटे कस्बे तक विकास का माध्यम बनेगा और इसके माध्यम से ‘सहकार से समृद्धि’ की क्रांति को नई गति मिलेगी। उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों के अध्यक्षों और निदेशक मंडलों के सदस्यों को अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के स्वप्न को साकार करने में योगदान के लिए धन्यवाद दिया।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को विश्व में समृद्धि के शिखर पर पहुंचाने और प्रत्येक क्षेत्र में प्रथम बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भारत को समृद्ध बनाने के लिए प्रत्येक भारतीय को समृद्ध बनाना आवश्यक है। केवल पूंजी बाजार के माध्यम से प्रत्येक नागरिक तक समृद्धि नहीं पहुंच सकती, इसके लिए देश में स्वरोजगार की एक व्यापक और मजबूत व्यवस्था खड़ी करनी होगी। शहरी सहकारी बैंक छोटे व्यापारियों, उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर इस व्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों के संदर्भ में सरकार के लिए ‘समृद्धि’ का अर्थ केवल बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना नहीं है, बल्कि उन ग्राहकों को समृद्ध बनाना है जो स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहक और बैंक—दोनों की समृद्धि ही ‘सहकार से समृद्धि’ की वास्तविक भावना है। इस पवित्र उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शहरी सहकारी बैंकों का अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन तेज गति से कार्य कर रहा है और आने वाले समय में इसकी गतिविधियों का और विस्तार किया जाएगा। महाराष्ट्र में सुविधाजनक स्थान पर इसका मुख्यालय स्थापित होने से संगठन की कार्यक्षमता बढ़ेगी और शहरी सहकारी बैंकों को अधिक प्रभावी सहयोग मिल सकेगा।
श्री अमित शाह ने अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के स्वप्न को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए देशभर के शहरी सहकारी बैंकों के अध्यक्षों और निदेशक मंडलों के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके सहयोग के बिना इस संगठन की स्थापना संभव नहीं होती। अगस्त क्रांति के ऐतिहासिक दिवस पर अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के नए कार्यालय में प्रवेश का उल्लेख करते हुए श्री अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि इसी स्थान से ‘सहकार से समृद्धि’ की क्रांति को नई गति मिलेगी और शहरी सहकारी बैंक देश के छोटे से छोटे कस्बे तक विकास तथा समृद्धि का माध्यम बनेंगे।
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व उप महाप्रबंधक श्री जी. पी. मिस्त्री द्वारा लिखित ‘Operational Risk Management – A Practical Guide to Urban Co-operative Banks’ पुस्तक और भारत में सहकारी बैंकिंग की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित एक कॉफी टेबल पुस्तक का लोकार्पण किया। श्री अमित शाह ने ‘सहकार CBS’ से सफलतापूर्वक जुड़ने वाले पहले छह शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया।
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AK
(रिलीज़ आईडी: 2296587)
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