सहकारिता मंत्रालय
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जम्मू और कश्मीर में सहकारी पारितंत्र को पुनर्जीवित करना

प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 4:36PM by PIB Delhi

सहकारी समितियों के वस्तुनिष्ठ एवं सतत् मूल्यांकन को सुगम बनाने के लिए, सहकारिता मंत्रालय ने दिनांक 24 जनवरी, 2025 को सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क प्रारंभ किया तथा इसे सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ साझा किया। यह फ्रेमवर्क लेखा-परीक्षण अनुपालन, वित्तीय प्रदर्शन तथा परिचालन गतिविधियों सहित मानकीकृत मानदंड प्रदान करता है, जिससे संबंधित राज्य के सहकारी समितियों के निबंधक (RCS) सहकारी समितियों का स्वतंत्र मूल्यांकन कर राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर उनके सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक कदम उठा सकें। गैर-कार्यशील सहकारी समितियों का पुनरुद्धार संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा लागू सहकारी समिति अधिनियमों, नियमों एवं उपविधियों के अनुसार किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, सहकारिता मंत्रालय संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के प्रयासों को सहयोग प्रदान करते हुए सहकारी संस्थाओं की व्यवहार्यता, सुशासन तथा परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहुआयामी रणनीति के माध्यम से विभिन्न पहल कर रहा है।

इन पहलों में पैक्स  का कंप्यूटरीकरण और डिजिटल प्रोफाइलिंग; आदर्श उप-विधियों को अपनाना ताकि पैक्स को 25 से अधिक व्यावसायिक कार्यकलाप करने में सक्षम बनाया जा सके; अनाच्छादित क्षेत्रों में नई बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों का गठन; क्षमता निर्माण और व्यवसाय विविधीकरण; और जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के उप-कार्यालय के माध्यम से संस्थागत समर्थन शामिल है। संगठित दुग्ध प्रापण, आधुनिक डेयरी पद्धतियों और बेहतर बाजार संपर्क को सुकर बनाने के लिए संघ राज्यक्षेत्रों को भी सरदार पटेल सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड के प्रचालनात्मक फ्रैम्वर्क में शामिल किया गया है।

दिनांक 15.07.2026 तक, जम्मू-कश्मीर में 1,611 नई सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं, जिनमें 232 बहुउद्देशीय पैक्स, 1,339 डेयरी सहकारी समितियां और 40 मात्स्यिकी सहकारी समितियां शामिल हैं। इसके अलावा, 760 मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों और एक मात्स्यिकी सहकारी समिति को सशक्त किया गया है।

इसके अलावा, सरकार ने संघ राज्यक्षेत्र जम्मू और कश्मीर सहित दूरस्थ, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं को सशक्त करने के लिए विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक उपाय किए हैं।

पैक्स के कंप्यूटरीकरण के लिए केंद्र प्रायोजित परियोजना के तहत, पारदर्शिता, लेखांकन, शासन और प्रचालनात्मक दक्षता में सुधार के लिए कार्यशील पैक्स को एक कॉमन ईआरपी-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर में ऑनबोर्ड किया जा रहा है । जम्मू-कश्मीर में कंप्यूटरीकरण के लिए 708 पैक्स स्वीकृत किए गए हैं । दिनांक 15.07.2026 तक, 537 पैक्स को हार्डवेयर प्रदान किया गया है, जिन्हें ईआरपी प्लेटफॉर्म पर भी ऑनबोर्ड किया गया है और ई-पैक्स के रूप में घोषित किया गया है। पैक्स पदाधिकारियों के लिए शासन, ईआरपी प्रचालन, व्यावसायिक योजनाएं तैयार करने, सरकारी योजनाओं के साथ अभिसरण और कार्यकलापों के विविधीकरण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा, पैक्स को दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, बीमा और कृषि आदानों तक पहुंच में सुधार के लिए कॉमन सेवा केंद्रों और कृषि-इनपुट सेवा केंद्रों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों के माध्यम से निर्यात, जैविक उत्पादों तथा गुणवत्तायुक्त बीजों के क्षेत्र में भी बाजार संपर्क एवं संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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