स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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24×7 आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदम


26 जून 2026 तक, आईपीएचएस डिजिटल टूलकिट के माध्यम से 100 प्रतिशत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन; 64 प्रतिशत सुविधाओं के 50 प्रतिशत से अधिक अंक

प्रविष्टि तिथि: 04 AUG 2026 4:10PM by PIB Delhi

सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं अस्पताल राज्य का विषय है। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) के रूप में प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर, भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) के अनुरूप ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करता है। सरकार उपलब्ध संसाधनों एवं निर्धारित मानदंडों के अनुसार इन प्रस्तावों को कार्यवाही अभिलेख (आरओपी) के रूप में स्वीकृति प्रदान करती है। राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्‍द्रों (पीएचसी) तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) को भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) के अनुरूप पर्याप्त चिकित्सकों, विशेषज्ञों, पैरामेडिकल कर्मियों, उपकरणों, औषधियों तथा नैदानिक सुविधाओं के साथ सुचारु रूप से संचालित करना सुनिश्चित करें।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत चिकित्सकों, विशेषज्ञों एवं पैरामेडिकल कर्मियों का विवरण ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी/एचडीआई 2023-24 के निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है:

https://www.mohfwdohfw.gov.in/static/uploads/2026/05/57202cf30629539e4d0fb0a2f700ac62.pdf

मंत्रालय ने आईपीएचएस के अंतर्गत सभी स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं, जिनमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी शामिल हैं, द्वारा स्व-मूल्यांकन को सुगम बनाने के लिए एक ओपन-सोर्स टूलकिट तथा एक वेब-आधारित डैशबोर्ड (www.iphs.mohfw.gov.in) विकसित किया है, जिसे 28 जून 2024 को शुरू किया गया। आईपीएचएस डैशबोर्ड को आईपीएचएस-2022 मानकों के अनुरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अनुपालन की निगरानी के लिए तैयार किया गया है। यह वास्तविक समय में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे निगरानी, आंकड़ों पर आधारित निर्णय-निर्माण, कमियों की पहचान तथा समय पर सुधारात्मक हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।

26 जून 2026 तक आईपीएचएस ओडीके टूलकिट के माध्यम से 100 प्रतिशत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है। मूल्यांकन की गई कुल स्वास्थ्य सुविधाओं में से 64 प्रतिशत ने 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

इसके अतिरिक्त, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में 24×7 आपातकालीन सेवाओं, प्रसूति देखभाल तथा नैदानिक सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए मंत्रालय द्वारा मानव संसाधनों की उपलब्धता, आवश्यक औषधियों, नैदानिक सेवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था, स्वास्थ्य अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) की स्थापना, 24×7 स्वास्थ्य सेवाओं तथा प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) का सुदृढ़ संचालन, निःशुल्क नैदानिक सेवा पहल, निःशुल्क औषधि सेवा पहल, जैव-चिकित्सा उपकरण अनुरक्षण एवं प्रबंधन कार्यक्रम, राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) तथा अन्य गुणवत्ता सुधार पहलों के कार्यान्वयन के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

मंत्रालय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत निःशुल्क नैदानिक सेवा पहल का भी समर्थन करता है। इसका उद्देश्य समुदाय के निकट सुलभ एवं किफायती पैथोलॉजी तथा रेडियोलॉजी संबंधी नैदानिक सेवाएँ उपलब्ध कराना है, जिससे लोगों के स्वयं के खर्च (ओओपीई) में कमी आती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के सभी स्तरों पर नैदानिक सेवाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें उप-केन्द्रों पर 14 परीक्षण, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 63 परीक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 97 परीक्षण, उप-जिला अस्पतालों पर 111 परीक्षण तथा जिला अस्पतालों पर 134 परीक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

प्रसूति देखभाल को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत व्यापक मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग प्रदान किया जाता है। इनमें प्रसवपूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव, प्रशिक्षित प्रसव सहायता, बुनियादी एवं व्यापक आपातकालीन प्रसूति देखभाल (आवश्यकतानुसार सीज़ेरियन सेक्शन सहित), प्रसवोत्तर देखभाल, रेफरल परिवहन, प्रसूति संबंधी जटिलताओं का प्रबंधन, तथा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) एवं जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत निःशुल्क मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना तथा मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाना है।

यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी/डीके


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