आयुष
क्षेत्रीय आयुष चिकित्सा केंद्रों की स्थापना
प्रविष्टि तिथि:
24 JUL 2026 3:20PM by PIB Delhi
केंद्रीय बजट 2026-27 में क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की घोषणा की गई थी। इस पहल के लिए नोडल विभाग, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने आयुष मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों/विभागों से परामर्श किया था। आयुष मंत्रालय ने प्रस्तावित केंद्रों में आयुष प्रणालियों के एकीकरण के लिए डीपीआईआईटी को समय पर तकनीकी जानकारी और सुझाव दिए गए ।
आयुष मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर, जिसमें जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (जीटीएमसी) के माध्यम से भी शामिल है, पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान, साक्ष्य-आधारित अभ्यास, क्षमता निर्माण और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है।
प्रमुख पहलों में शामिल हैं:
- भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बीच मेजबान देश समझौते के अंतर्गत जामनगर में डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (जीटीएमसी) की स्थापना और संचालन।
- प्रथम डब्ल्यूएचओ वैश्विक परंपरागत चिकित्सा शिखर सम्मेलन (गांधीनगर, 2023) का आयोजन, जिसका समापन गुजरात घोषणापत्र के साथ हुआ।
- III. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (नई दिल्ली, 2025) का आयोजन, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली घोषणा को अपनाया गया और डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 के कार्यान्वयन के लिए स्मार्ट (विशिष्ट, मापने योग्य, प्राप्त करने योग्य, प्रासंगिक और समयबद्ध) प्रतिबद्धताओं की घोषणा की गई।
- IV. वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान प्राथमिकताओं और रोडमैप का विकास, तकनीकी विशेषज्ञ नेटवर्क की स्थापना, पारंपरिक चिकित्सा डेटा मानकों की उन्नति और डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय (टीएमजीएल) का शुभारंभ।
- जामनगर स्थित जीटीएमसी परिसर का विकास सतत प्रगति पर है, ताकि यह पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक वैश्विक केंद्र बन सके।
आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान केंद्रीय परिषद (सीसीआरएएस) के माध्यम से विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जैसे कि आयुर्-प्रकृति वेब पोर्टल, स्वास्थ्य मूल्यांकन पैमाना पोर्टल, आयुर्वेद को रूपांतरित करने वाले प्रशंसनीय व्यक्तित्व, डिजिटल पुस्तकालय (आयुर्वेद ग्रंथ समुच्चय), आयुष पांडुलिपि उन्नत भंडार, आयुर्वेदिक ऐतिहासिक छापों का प्रदर्शन, ई-मेडिकल हेरिटेज अभिगम (ई-मेधा), और सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों जैसे कि राष्ट्रीय आयुष रुग्णता और मानकीकृत शब्दावली इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल (नमस्ते पोर्टल) और आयुष अनुसंधान पोर्टल का रखरखाव कर रहा है।
सीसीआरएएस-प्रयात्ना, आयुर्वेद के क्षेत्र में स्नातकोत्तर (पीजी) और डॉक्टरेट (पीएचडी) शोधार्थियों के बीच वैज्ञानिक लेखन कौशल को विकसित और बेहतर बनाने के लिए सीसीआरएएस की एक पहल है। यह कार्यक्रम आवेदक संस्थानों में आयोजित संरचित, व्यक्तिगत कार्यशालाओं के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
सीसीआरएएस-प्रयातना का दूसरा सत्र वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान आयोजित किया गया था, और तीसरा सत्र जुलाई 2026 में शुरू किया गया था।
आयुष मंत्रालय ने एक केंद्रीय क्षेत्र योजना आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्त्पादन संवर्धन योजना (एओजीयूएसवाई) लागू की है। एओजीयूएसवाई योजना के घटक इस प्रकार हैं:
- उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ और उन्नत बनाना।
- आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं की फार्माकोविजिलेंस, जिसमें भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी भी शामिल है।
- आयुष औषधियों के लिए तकनीकी मानव संसाधन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों सहित केंद्रीय और राज्य नियामक ढांचों को मजबूत करना।
- भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), भारतीय गुणवत्ता नियंत्रण विभाग (क्यूसीआई) और अन्य संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों और औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के सहयोग से आयुष उत्पादों और सामग्रियों के मानकों के विकास और मान्यता/प्रमाणीकरण के लिए सहायता प्रदान करना।
औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और यूनानी (एएसएसयू) औषधियों की पहचान, शुद्धता, गुणवत्ता और सामर्थ्य की जाँच करने के लिए औषधि नियम, 1945 के नियम 160 ए से जे के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। वर्तमान में, 118 निजी प्रयोगशालाएँ और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की 34 औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएँ कार्यरत हैं।
आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना आयुष मंत्रालय द्वारा वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से भारत सरकार के अंतर्गत की गई है। यह आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और यूनानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और उसकी निगरानी करने का कार्य करती है। इसके लिए यह व्यापारिक मुद्दों का समाधान करती है, निर्यात प्रक्रियाओं पर अपने सदस्यों की क्षमता निर्माण में सहायता करती है, व्यापार-से-व्यापार बैठकों और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, रोड शो, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करती है, और आयुष स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान की रक्षा करती है।
इसके अतिरिक्त, आयुष मंत्रालय आयुष उत्पादों के लिए निम्नलिखित गुणवत्ता प्रमाणन पहलों को बढ़ावा देता है:
- सीडीएससीओ में आयुष वर्टिकल: राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण के माध्यम से नियामक निगरानी को मजबूत करता है और योग्य आयुष दवाओं के लिए डब्ल्यूएचओ फार्मास्युटिकल उत्पाद प्रमाणपत्र (डब्ल्यूएचओ-सीओपीपी) जारी करने की सुविधा प्रदान करता है।
- क्यूसीआई गुणवत्ता प्रमाणन योजना: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के आधार पर आयुष मानक चिह्न और आयुष प्रीमियम चिह्न प्रदान करती है।
आयुष मंत्रालय ने गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत करने और आयुष उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक मान्यता को बढ़ाने के लिए 19.12.2025 को आयुष गुणवत्ता चिह्न कार्यक्रम शुरू किया।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज यह जानकारी लोकसभा में दी।
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पीके/केसी/केएल/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2292975)
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