आयुष
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आयुष में अनुसंधान और नैदानिक परीक्षण

प्रविष्टि तिथि: 24 JUL 2026 3:26PM by PIB Delhi

'आयुर्ज्ञान योजना' के आयुष में अनुसंधान एवं नवाचार (आर&आई) और आयुर्वेद जीव विज्ञान एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान (एबीआईएचआर) घटकों के तहत, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान क्रमशः 42 (10 नए और 32 चल रही) और 07 (05 नए और 02 चल रही) शोध परियोजनाओं को तीन साल की अवधि के लिए सहायता प्रदान की गई तथा किश्तों के आधार पर धनराशि जारी की गई।

इसके अलावा, आयुष मंत्रालय के तहत शोध परिषदें—जैसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद, केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद भी अपने अनुसंधान संस्थानों/उपचार केंद्रों/परिधीय इकाइयों  के माध्यम से नैदानिक अनुसंधान , ड्रग प्रूविंग, ड्रग वेरिफिकेशन, ड्रग वैलिडेशन, ड्रग मानकीकरण, जन स्वास्थ्य अनुसंधान, मौलिक अनुसंधान और महामारी अनुसंधान जैसी गतिविधियों का संचालन करती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उपरोक्त अनुसंधान परिषदों द्वारा कुल 693 शोध अध्ययन किए गए (यानी सीसीआरएएस -340, सीसीआरएच -142, सीसीआरयूएम -140, सीसीआरएस -71)

अनुसंधान एवं नवाचार घटक के तहत, वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान समकक्ष-समीक्षित  पत्रिकाओं में कुल 10 शोध पत्र प्रकाशित किए गए। इसके अतिरिक्त, इसी अवधि के दौरान अनुसंधान परिषदों द्वारा समकक्ष-समीक्षित पत्रिकाओं में 653 शोध पत्र प्रकाशित किए गए, जिनमें सीसीआरएएस द्वारा 232, सीसीआरएच द्वारा 84, सीसीआरयूएम  द्वारा 248, सीसीआरएस  द्वारा 67 और सीसीआरवाईएन द्वारा 22 शोध पत्र शामिल हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान अनुसंधान परिषदों को कुल 03 पेटेंट प्रदान किए गए, जिनमें 02 सीसीआरएएस को और 01 सीसीआरएच को मिला।

सत्यापित आयुष अनुसंधान को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में एकीकृत करने के लिए आयुष मंत्रालय और इसके अंतर्गत अनुसंधान परिषदों द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  1. आयुष प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ एकीकृत करने और उसे सुदृढ़ बनाने के लिए, 'आयुर्स्वास्थ्य योजना' के 'उत्कृष्टता केंद्रघटक के तहत राष्ट्रीय ख्याति के 09 संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसका उद्देश्य आयुष प्रणालियों के वैज्ञानिक सत्यापन को मजबूत करने और इसकी व्यापक स्वीकार्यता को बढ़ावा देने हेतु आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के सहयोग से आयुष में अनुसंधान एवं विकास  को बढ़ावा देना था।
  2. एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च प्रोग्राम के तहत, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और सीसीआरएएस  ने एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल  पर केंद्रित चिन्हित क्षेत्रों में अनुसंधान करने के उद्देश्य से एम्स नई दिल्ली, जोधपुर, नागपुर और ऋषिकेश में 'आयुष-आईसीएमआर एडवांस्ड सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव हेल्थ रिसर्चस्थापित करने की पहल की है।
  3. कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) में आयुष प्रणालियों का एकीकरण सीसीआरएएस द्वारा किया गया है।
  4. सीसीआरएस ने तपेदिक (टीबी) की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास के उद्देश्य से आईसीएमआर-एनआइआरटी के साथ तीन अनुसंधान सहयोगात्मक परियोजनाएं शुरू की हैं।
  5. इसके अतिरिक्त, सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  के तहत आयुष का मुख्यधारा में एकीकरण एक मुख्य रणनीति है। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों  में आयुष सुविधाओं को सह-स्थित  करके सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आयुष सेवाओं को एकीकृत किया है।

यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एसके/डीए


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