ग्रामीण विकास मंत्रालय
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत निर्मित एवं स्तरोन्नयन की गई सड़कें
प्रविष्टि तिथि:
31 JUL 2026 5:23PM by PIB Delhi
शुरूआत से लेकर अब तक, पीएमजीएसवाई के विभिन्न घटकों के तहत देश भर में 8,55,980.33 किमी लंबाई की 1,98,011 सड़कों तथा 12,576 पुलों की मंजूरी दी गई है जिसमें से 7,96,940.94 किलोमीटर की 1,85,651 सड़कों और 10,833 पुलों का निर्माण किया गया है। इसका घटक-वार विवरण निम्नानुसार है:-
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घटक का विवरण
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निर्मित
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सड़को की संख्या
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सड़क लंबाई
(किमी में)
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पुलों की संख्या
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पीएमजीएसवाई-I
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1,63,851
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6,25,488.10
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7,257
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पीएमजीएसवाई-II
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6,634
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49,130.23
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750
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आरसीपीएलडब्ल्यूईए
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1,086
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9,961.60
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586
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पीएमजीएसवाई-III
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13,408
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1,08,970.37
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2,240
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पीएम-जनमन
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672
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3,041.95
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0
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पीएमजीएसवाई-IV
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0
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348.69
|
0
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कुल:
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1,85,651
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7,96,940.94
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10,833
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ग्रामीण सड़क परियोजनाओं और पीएमजीएसवाई के विभिन्न घटकों के तहत निर्माण के चरणों का राज्यवार, जिलावार और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रवार विवरण कार्यक्रम की वेबसाइट https://pmgsy.dord.gov.in/dbweb पर देखा जा सकता है।
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) के सड़क संपर्क घटक के तहत, देश भर में असंबद्ध विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसावटों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान करने के लिए पुलों सहित कुल 8000 किलोमीटर सड़क लंबाई के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। पीएम-जनमन के पूरा होने की समय सीमा मार्च 2028 है। इस योजना के शुरुआत से, पीएम-जनमन के तहत, 4708 करोड़ रुपये के आवंटन की तुलना में 1218 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है और दिनांक 26.07.2026 तक 1542 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-1 (वीवीपी-1) भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित पहल है जिसका उद्देश्य उत्तरी अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गांवों में बुनियादी ढांचे और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। वीवीपी-1 के तहत, 137 बसावटों को जोड़ने के लिए 1,085 किमी लंबाई की 113 सड़कों और 35 पुलों को मंजूरी दी गई है। दिनांक 26.7.2026 तक, 248 किमी लंबाई की 10 सड़कें निर्मित हो चुकी हैं और 996.72 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। वीवीपी-I के तहत स्वीकृत, निर्मित और शेष परियोजनाओं का राज्यवार विवरण अनुबंध-1 में दिया गया है। वीवीपी-II को पीएमजीएसवाई-IV के साथ अभिसरण में कार्यान्वित किया जा रहा है।
सड़क निर्माण में स्थानीय, किफायती रूप से उपलब्ध सामग्री/गैर-पारंपरिक सामग्री/नई सामग्री का उपयोग करने के उद्देश्य से मंत्रालय ने 2013 में नई प्रौद्योगिकी पहल दिशानिर्देश जारी किए थे। सड़क निर्माण में नई सामग्री को प्रोत्साहित करने के लिए, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को कुल प्रस्तावों के 15% में नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता थी (आईआरसी मुख्यधारा की प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके 10% और आईआरसी मान्यता प्राप्त प्रौद्योगिकियों का 5%)। अधिक व्यवस्थित तरीके से ग्रामीण सड़कों में नई/हरित प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर अपनाने को बढ़ावा देने और प्रसारित करने के लिए, मंत्रालय ने इन दिशानिर्देशों को संशोधित किया है और "नई प्रौद्योगिकी पहल एवं दिशानिर्देश-2022 संबंधी विजन दस्तावेज" लाया है, जिसके लिए राज्य सरकारों को सीमेंट स्थिरीकरण, चूना स्थिरीकरण, कोल्ड मिक्स, अपशिष्ट प्लास्टिक, सेल-फील्ड कंक्रीट, पैनलयुक्त सीमेंट-कंक्रीट फुटपाथ और फ्लाई ऐश जैसी नई/हरित प्रौद्योगिकियों के तहत वार्षिक प्रस्तावों की कुल लंबाई का न्यूनतम 50% प्रस्तावित करने की आवश्यकता है।
पीएमजीएसवाई सड़कों को सरकारी सुविधाओं और संस्थानों से एकीकृत करने के लिए पीएमजीएसवाई के दायरे में, 50,000 किलोमीटर की मौजूदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन के लिए पीएमजीएसवाई-II तथा बसावटों कों अन्य बातों के साथ-साथ, ग्रामीण कृषि बाजारों (जीआरएएम), उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों को जोड़ने वाले 1,25,000 किलोमीटर थ्रू रुटों तथा प्रमुख ग्रामीण लिंक के समेकन के लिए पीएमजीएसवाई-III नामक दो कार्यकलापों को जोड़ा गया है। पीएमजीएसवाई- III के तहत, कुल 6,96,620 सुविधा केंद्रों को बसावटों से जोड़ा गया है, जिनमें से 1,38,637 कृषि बाजार, 1,46,784 शैक्षिक केंद्र, 82,806 चिकित्सा केंद्र और 3,28,393 परिवहन केंद्रों से जुड़े हैं।
पीएमजीएसवाई दिशानिर्देशों के अनुसार, सड़क परियोजनाओं का निर्माण करने वाले ठेकेदारों को निर्माण के बाद सड़कों और पुलों के लिए पांच साल की दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) के दौरान रखरखाव करने की आवश्यकता होती है। डीएलपी के दौरान, वे दोषों को सुधारने और निर्धारित मानकों के अनुसार सड़क का रखरखाव करने के लिए जिम्मेदार हैं। इस रखरखाव दायित्व के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए, निम्नलिखित उपाय लागू किए गए हैं:
(i) अनिवार्य संविदात्मक प्रावधान: पांच साल का रखरखाव दायित्व ठेकेदार के साथ निष्पादित अनुबंध समझौते का एक अभिन्न अंग है.
(ii) निष्पादन-आधारित रखरखाव अनुबंध (पीबीएमसी): दोष दायित्व अवधि के दौरान रखरखाव निष्पादन-आधारित रखरखाव अनुबंध के माध्यम से किया जाता है, जिसके तहत भुगतान निर्धारित सेवा स्तरों और सड़क की स्थिति से जुड़े होते हैं।
(iii) नियमित निरीक्षण: निर्धारित रखरखाव मानकों के अनुपालन का आकलन करने और सुधार की आवश्यकता वाले दोषों की पहचान करने के लिए कार्यक्रम कार्यान्वयन इकाइयों (पीआईयू) और राज्य गुणवत्ता मॉनिटरों (एसक्यूएम) द्वारा समय-समय पर सड़कों का निरीक्षण किया जाता है।
(iv) ई-मार्ग के माध्यम से डिजिटल निगरानी: राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को रखरखाव गतिविधियों की डिजिटल निगरानी, निरीक्षण रिकॉर्डिंग, दोषों की रिपोर्टिंग, सुधार की निगरानी और रखरखाव भुगतान संसाधित करने के लिए ई-मार्ग (ग्रामीण सड़को का इलेक्ट्रॉनिक रखरखाव) प्लेटफॉर्म को अपनाने की सलाह दी गई है।
(v) गुणवत्ता निगरानी तंत्र: पीएमजीएसवाई में निर्धारित मानकों के अनुसार सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए पीआईयू, राज्य गुणवत्ता मॉनिटर (एसक्यूएम) और राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर (एनक्यूएम) द्वारा निरीक्षण सहित तीन स्तरीय गुणवत्ता निगरानी प्रणाली का पालन किया जाता है।
(vi) सुधारात्मक कार्रवाई और संविदात्मक सुधार: ठेकेदारों को निर्धारित समय के भीतर डीएलपी के दौरान पाई गई कमियों को सुधारने की आवश्यकता होती है। ऐसा करने में विफल होने पर अनुबंध प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें रखरखाव भुगतान की रोक, निष्पादन सुरक्षा राशि की जब्ती, ठेकेदार के जोखिम और लागत पर मरम्मत का निष्पादन, और अन्य संविदात्मक सुधार शामिल है।
इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीएमजीएसवाई के तहत निर्मित ग्रामीण सड़कों का अनिवार्य पांच वर्षीय दोष दायित्व अवधि के दौरान पर्याप्त रखरखाव किया जाए, जिससे उनकी गुणवत्ता, सेवा-प्रदाता और दीर्घकालिकता बनी रहे।
अनुबंध-I
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क्र.सं.
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राज्य का नाम
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स्वीकृत
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निर्मित
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शेष
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सड़कों की संख्या
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सड़क लंबाई (किमी में)
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पुलों की संख्या
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बसावटों की संख्या
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सड़कों की संख्या
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सड़क लंबाई (किमी में)
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पुलों की संख्या
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सड़कों की संख्या
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सड़क लंबाई (किमी में)
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पुलों की संख्या
|
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1
|
अरुणाचल प्रदेश
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105
|
1,022
|
27
|
123
|
10
|
248
|
0
|
95
|
774
|
27
|
|
2
|
सिक्किम
|
3
|
19
|
8
|
7
|
0
|
0
|
0
|
3
|
19
|
8
|
|
3
|
उत्तराखंड़
|
5
|
44
|
0
|
7
|
0
|
0
|
0
|
5
|
44
|
0
|
|
कुल
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113
|
1,085
|
35
|
137
|
10
|
248
|
0
|
103
|
837
|
35
|
यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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आर सी/ पीयू
(रिलीज़ आईडी: 2292543)
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