विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संसदीय प्रश्न: ग्रामीण नवाचार और जैव प्रौद्योगिकी क्लस्टर
प्रविष्टि तिथि:
30 JUL 2026 4:32PM by PIB Delhi
भारत सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) प्रेरित अनुसंधान हेतु विज्ञान में नवाचार (इंस्पायर) योजना के अंतर्गत अपनी प्रमुख घटक इंस्पायर-मानक (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन्स एंड नॉलेज) का कार्यान्वयन कर रहा है, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ सहित स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सृजनात्मकता, नवाचार तथा अनुसंधान अभिमुखता को बढ़ावा देना है। यह योजना 10 से 17 वर्ष के आयु वर्ग (कक्षा VI–XII) के विद्यार्थियों को नवाचारी प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से ₹10,000 की वित्तीय सहायता प्रदान करती है तथा उन्हें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराती है। छत्तीसगढ़ में पहुंच और भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए डीएसटी ने एक मार्गदर्शन कार्यशाला, तीन जिला नोडल अधिकारी बैठकों तथा पंद्रह ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिनसे 5,000 से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक और अधिकारी लाभान्वित हुए। इन सतत् प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2023-24 में 3,154 विद्यार्थी, वर्ष 2024-25 में 2,956 विद्यार्थी तथा वर्ष 2025-26 में 2,165 विद्यार्थी इंस्पायर-मानक योजना के अंतर्गत चयनित हुए, जो राज्य के विद्यार्थी समुदाय में जमीनी स्तर पर नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को निरंतर बढ़ावा दिए जाने का द्योतक है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ के संस्थानों को प्रदान किए गए अनुसंधान अनुदानों और फेलोशिप का विवरण निम्नानुसार है:
(i) अनुसंधान अनुदान
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संस्थान का नाम
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2023-24
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2024-25
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2025-26
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अनुसंधान परियोजनाओं की संख्या
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जारी अनुदान
(₹ लाख में)
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अनुसंधान परियोजनाओं की संख्या
|
जारी अनुदान
(₹ लाख में)
|
अनुसंधान परियोजनाओं की संख्या
|
जारी अनुदान
(₹ लाख में)
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एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, रायपुर
|
|
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1
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7.90
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भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग
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1
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33.00
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भिलाई महिला महाविद्यालय, दुर्ग
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1
|
12.00
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छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर
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2
|
165,64
|
1
|
12.00
|
4
|
5.53
|
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छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग
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|
|
|
|
|
1
|
5.00
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|
छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, रायपुर
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|
1
|
6.90
|
|
|
1
|
50.86
|
|
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई
|
|
2
|
21.53
|
|
|
2
|
87.65
|
|
डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर
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|
|
|
2
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10.30
|
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|
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गवर्नमेंट डी.बी. गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, रायपुर
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|
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|
2
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58.64
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|
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गवर्नमेंट वी.वाई.टी. पीजी ऑटोनॉमस कॉलेज, दुर्ग
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|
|
|
3
|
78.41
|
|
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, रायपुर (एक केंद्रीय विश्वविद्यालय)
|
|
3
|
908.50
|
3
|
28.14
|
9
|
1021.58
|
|
आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन, दुर्ग
|
|
3
|
191.02
|
4
|
1490.00
|
4
|
1230.00
|
|
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, दुर्ग
|
|
5
|
1473.74
|
4
|
42.62
|
7
|
45.75
|
|
|
|
|
1
|
10.15
|
1
|
2.53
|
|
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर
|
|
2
|
23.77
|
|
|
7
|
275.22
|
|
एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप, रायपुर
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|
|
|
|
|
2
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84.88
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंस एंड आयुष यूनिवर्सिटी ऑफ छत्तीसगढ़
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|
|
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|
1
|
32.95
|
|
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर
|
|
|
|
|
|
1
|
16.56
|
|
रुंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, भिलाई, छत्तीसगढ़
|
|
|
|
1
|
37.50
|
2
|
88.51
|
|
संस्कृति फाउंडेशन, अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
|
|
|
|
|
|
1
|
2.83
|
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श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, भिलाई
|
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|
|
1
|
1.91
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|
|
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|
|
|
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(ii) प्रदान की गई फेलोशिप:
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संस्थान का नाम
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2023-24
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2024-25
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2025-26
|
कुल जारी अनुदान (₹ लाख में)
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2023-24
|
2024-25
|
2025-26
|
कुल जारी अनुदान (₹ लाख में)
|
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|
पीएच.डी. हेतु इंस्पायर फेलोशिप की संख्या
|
पीडीएफ हेतु इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप की संख्या
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|
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर (एक केंद्रीय विश्वविद्यालय)
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8
|
3
|
15
|
145.08
|
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|
|
|
|
|
|
|
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई
|
7
|
10
|
18
|
200.24
|
1
|
1
|
2
|
34.92
|
|
|
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
|
10
|
6
|
8
|
152.66
|
|
|
|
|
|
|
कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर
|
|
1
|
|
1
|
11.45
|
|
|
|
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|
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर
|
|
4
|
2
|
2
|
40.32
|
|
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|
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर
|
|
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|
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1
|
1
|
37.59
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जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने अपने सामाजिक विकास तथा बायोटेक-किसान कार्यक्रमों के तहत स्थानीय बागवानी उत्पादों और लघु वन उपज में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित जैव प्रौद्योगिकी क्लस्टर और ग्रामीण प्रौद्योगिकी पार्क स्थापित किए हैं। इसके उल्लेखनीय उदाहरणों में पश्चिमी ओडिशा का रूरल बायोरिसोर्सेज कॉम्प्लेक्स, अरुणाचल प्रदेश के नामसाई में बागवानी फसलों के मूल्य संवर्धन की परियोजना तथा अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में जैव नियंत्रण एवं पादप संरक्षण क्लस्टर शामिल हैं। ये पहल आकांक्षी जिलों को समाहित करने वाले एक राष्ट्रीय ढांचे का हिस्सा हैं और सतत् ग्रामीण विकास के लिए पुनरुत्पादित किए जा सकने वाले मॉडल विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं। इन जैव प्रौद्योगिकी क्लस्टरों और प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों ने किसानों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मूल्य संवर्धन प्रौद्योगिकियां अपनाने, स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयां एवं जैव-आदान उद्यम स्थापित करने तथा अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर ग्रामीण उद्यमिता को सुदृढ़ किया है। इन पहलों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को एकीकृत कृषि और पादप संरक्षण संबंधी कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। सामूहिक रूप से, इन पहलों ने 600 से अधिक स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), 350 से अधिक ग्रामीण उद्यमों तथा लगभग 5,000 ग्रामीण युवाओं को सहयोग प्रदान किया है, जिससे आजीविका सुरक्षा में सुधार, महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि तथा सतत् ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिला है।
इसके अतिरिक्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशंस (निधि) के तहत, एंटरप्रेन्योर इन रेजिडेंस (ईआईआर), प्रमोशन एंड एक्सेलेरेशन ऑफ यंग एंड एस्पायरिंग टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर्स (प्रयास), टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (टीबीआई), समावेशी टीबीआई, सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, सीड सपोर्ट प्रोग्राम, एक्सेलेरेटर्स तथा उद्यमिता प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रौद्योगिकी-आधारित स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, प्रोटोटाइप विकास, मार्गदर्शन, प्रारंभिक चरण की वित्तीय सहायता तथा व्यवसाय विकास संबंधी सहयोग प्रदान करके समर्थन देता है। इसके अलावा, डीएसटी के साइंस फॉर इक्विटी, एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट (सीड) प्रभाग ने रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीसीओएसटी) में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों की प्रौद्योगिकी संबंधी आवश्यकताओं की पहचान करने तथा लघु वन उपज सहित स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से प्रौद्योगिकी-आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए एक "एससी-एसटी सेल" को स्वीकृति प्रदान की है। छत्तीसगढ़ सरकार भी ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) कार्यक्रम तथा छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रोमोशन सोसायटी (सीबीपीएस) द्वारा सीसीओएसटी के सहयोग से कार्यान्वित जैव प्रौद्योगिकी संवर्धन पहलों के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है।
यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2292083)
आगंतुक पटल : 28
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