आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
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भंडेवाड़ी का शहरी कायाकल्प


पुराने कचरे को अवसर में बदलना

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 5:59PM by PIB Delhi

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत, लक्ष्य ज़ीरो डंपसाइट को हासिल करने पर खास ज़ोर देते हुए, राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों में पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान एक व्यवस्थित और समय-सीमा के भीतर किया जा रहा है।

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शहर तेज़ी से बायो-माइनिंग और अत्याधुनिक प्रसंस्करण की तकनीकों को अपना रहे हैं, जबकि पुराने डंपसाइट्स की लगातार निगरानी और व्यवस्थित सफाई पर्यावरण के अनुकूल शहरी व्यवस्था की ओर बदलाव को मज़बूत कर रही है। नागपुर, पुराने डंपसाइट को वैज्ञानिक तरीके से टिकाऊ कचरा प्रबंधन प्रणाली में बदलने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

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मध्य भारत का एक प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्र, नागपुर इस क्षेत्र के तेज़ी से बढ़ते शहरों में से एक के रूप में उभरा है। तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और 30 लाख से ज़्यादा आबादी के कारण, शहर में घरों, बाज़ारों, संस्थानों, कमर्शियल प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक जगहों से निकलने वाले ठोस कचरे में लगातार बढ़ोतरी हुई है। समय के साथ, इस कचरे का एक बड़ा हिस्सा भंडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में भेजा जाने लगा, जो धीरे-धीरे एक बड़े पुराने जमा कचरे के स्थल में बदल गई, जिससे शहर प्रशासन के सामने पर्यावरण और संचालन से जुड़ी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं।

खुले में कचरा फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन अपनाने की तत्काल ज़रूरत को समझते हुए, नागपुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने भंडेवाड़ी डंपसाइट को वैज्ञानिक तरीके से ठीक करने और इसे चक्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप एक टिकाऊ कचरा प्रसंस्करण प्रणाली में बदलने की एक अहम पहल की।

लैंडफिल में कचरा फेंकने पर बढ़ती निर्भरता ने शहर के लिए पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित कचरा प्रबंधन के तरीकों को सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित और लंबे समय तक चलने वाले वैज्ञानिक समाधान की ज़रूरत को और बढ़ा दिया।

पुराने कचरे की व्यवस्थित खुदाई, छंटाई और प्रोसेसिंग से, 10 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा जमा कचरे का सफलतापूर्वक निपटान किया गया। इस कदम से न केवल पर्यावरण के ऊपर पर पड़ा एक बड़ा बोझ खत्म हुआ, बल्कि कई एकड़ कीमती ज़मीन भी वापस मिल सकी, जो पहले कचरे के ढेर के नीचे दबी हुई थी।

कचरे के निपटान और सुधार के बाद, इस साइट को एक आधुनिक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा में बदल दिया गया। यह सुविधा अब कई वैज्ञानिक प्रणालियों के साथ काम करती है, जिनमें मटीरियल रिकवरी फैसिलिटीज़ (एमआरएफ), कम्पोस्टिंग यूनिट्स, आरडीएफ बनाने वाली प्रणालियां, लीचेट ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण की निगरानी के उन्नत तंत्र शामिल हैं। यह एकीकृत तरीका यह सुनिश्चित करता है कि कचरे को अब बोझ नहीं, बल्कि एक संसाधन के रूप में देखा जाए, जिसे वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करके दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

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कामकाज की क्षमता और पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन बेहतर बनाने के लिए, नागपुर ने इस सुविधा केंद्र में कई तरह के तकनीकी बदलाव किए हैं। ट्रॉमल, बैलिस्टिक सेपरेटर, कम्पोस्टिंग यूनिट, एससीएडीए निगरानी, सीसीटीवी निगरानी और धूल को नियंत्रित करने के उपायों जैसी आधुनिक व्यवस्था ने कचरे की प्रोसेसिंग को बेहतर बनाया है, रियल-टाइम निगरानी को संभव किया है और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है।

भंडेवाड़ी में हुए इस बदलाव से शहर को पर्यावरण के लिहाज़ से भी काफी फायदे हुए हैं। लैंडफिल पर निर्भरता में काफी कमी आई है, हवा, पानी और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई है, और आस-पास के इलाकों में लोगों की सेहत में सुधार हुआ है। वैज्ञानिक तरीके से पुर्नचक्रण और संसाधनों की रिकवरी की ओर बढ़ने से, नागपुर का टिकाऊ शहरी माहौल बनाने का सफर और मज़बूत हुआ है।

इसके साथ ही, शहर ने कम्पोस्टिंग प्लांट, मॉड्यूलर वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट, मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सी एंड डी) वेस्ट प्रोसेसिंग सिस्टम जैसे अतिरिक्त परियोजनाओं के ज़रिए अपने कचरा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है। ये सभी पहल मिलकर शहर की विकेंद्रीकृत और कुशल कचरा प्रबंधन क्षमता को बढ़ाती हैं।

इस बदलाव की मुख्य उपलब्धियाँ बहुत अहम हैं। 10 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा पुराने कचरे को प्रोसेस किया गया है, लगभग 55 एकड़ ज़मीन को फिर से इस्तेमाल के लायक बनाया गया है और कचरे का प्रसंस्करण करने का एक मजबूत और समावेशी ढांचा तैयार किया गया है। इस पहल ने वैज्ञानिक तरीके से कचरा अलग करने, पुर्नचक्रण और टिकाऊ तरीके से संसाधनों की रिकवरी के ज़रिए चक्रीय अर्थव्यवस्था के तरीकों को भी मज़बूत किया है।

भंडेवाड़ी डंपसाइट का सुधार इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे वैज्ञानिक योजनाओं, तकनीकों में नवाचार और लगातार अमल करने से शहरी कचरा प्रबंधन व्यवस्था में बुनियादी बदलाव लाया जा सकता है। यह पुराने कचरे के बोझ से हटकर एक व्यवस्थित, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार व्यवस्था की ओर बढ़ने को दिखाता है।

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पीके/केसी/एनएस/एसएस


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