अणु ऊर्जा विभाग
संसदीय प्रश्न: विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन
प्रविष्टि तिथि:
22 JUL 2026 4:18PM by PIB Delhi
विकसित भारत के विज़न तथा वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को समर्थन प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट विद्युत परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त, इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास एवं परिचालन भी है।
इस संबंध में, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) ने निम्नलिखित लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों के डिज़ाइन और विकास की जि़म्मेदारी ली है;
• 220 मेगावाट विद्युत भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर-200);
• 55 मेगावाट विद्युत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर-55); तथा
• हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 5 मेगावाट तापीय तक क्षमता वाला उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (एचटीजीसीआर)।
संसद ने शांति अधिनियम, 2025 अधिनियमित किया है, जिसका केंद्रबिंदु भारत सरकार का परमाणु ऊर्जा मिशन है, जिससे वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। यह अधिनियम निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के द्वार खोलता है।
सरकार ने परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत घोषित वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना के अनुसार, विभिन्न चरणों में कार्यान्वित हो रही परियोजनाओं के क्रमिक रूप से पूर्ण होने पर, वर्तमान 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के वर्ष 2031-32 तक लगभग 22 गीगावाट तक पहुँचने की अपेक्षा है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2032 के बाद एनपीसीआईएल द्वारा स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टरों (पीएचडब्ल्यूआर) और लाइट वाटर रिएक्टरों (एलडब्ल्यूआर) सहित 32 गीगावाट अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित किए जाने की परिकल्पना की गई है, जिससे वर्ष 2047 तक कुल क्षमता लगभग 54 गीगावाट हो जाएगी। कार्ययोजना के अनुसार, शेष 46 गीगावाट क्षमता विभिन्न व्यावसायिक मॉडलों के अंतर्गत विभिन्न प्रौद्योगिकियों वाले रिएक्टरों के माध्यम से अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (केंद्र एवं राज्य), राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र तथा संयुक्त उपक्रमों द्वारा स्थापित किए जाने की अपेक्षा है।
(A) बीएसएमआर-200 एक स्वदेशी दाबित जल रिएक्टर (पीडब्ल्यूआर) आधारित विद्युत रिएक्टर है। बीएसएमआर-200 की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है;
- बीएसएमआर-200 की अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
- प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है तथा सशक्त प्रौद्योगिकी समूह (ईटीजी) की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।
- परमाणु ऊर्जा आयोग ने बीएसएमआर-200 के लिए महाराष्ट्र के तारापुर को स्थल के रूप में अनुमोदित किया है।
- एसएमआर-55 दाबित जल रिएक्टर (पीडब्ल्यूआर) डिज़ाइन पर आधारित है। एसएमआर-55 की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है:
- एसएमआर-55 की अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
- परमाणु ऊर्जा आयोग ने एसएमआर-55 के लिए महाराष्ट्र के तारापुर को स्थल के रूप में अनुमोदित किया है।
- हाइड्रोजन उत्पादन के लिए कॉपर-क्लोरीन चक्र जैसे उपयुक्त ऊष्मा-रासायनिक चक्र हेतु परमाणु ऊष्मा स्रोत के रूप में 5 मेगावाट तापीय तक क्षमता वाले उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (एचटीजीसीआर) के डिज़ाइन एवं विकास का कार्य भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) द्वारा किया जा रहा है। एचटीजीसीआर की वर्तमान स्थिति निम्नलिखित है;
- एचटीजीसीआर की अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
- रिएक्टर के लिए प्रस्तावित स्थल बार्क, विशाखापत्तनम है। इसके लिए स्थल स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
- पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त करने के लिए संदर्भ की शर्तें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्राप्त की जा चुकी हैं।
शांति अधिनियम-2025 में स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र, जिसमें इस क्षेत्र का अनुसंधान एवं विकास भी शामिल है, में निजी संस्थाओं की भागीदारी का प्रावधान किया गया है। साथ ही, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के लिए नई प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु ज्ञान साझाकरण और तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारतीय उद्योगों के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इससे परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए परमाणु उपकरण आपूर्तिकर्ताओं का विकास हो रहा है तथा निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है।
परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए शांति अधिनियम के तहत नियामक निकाय (परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड) को वैधानिक दर्जा प्रदान करने तथा उसे अपने कार्य स्वतंत्र रूप से संपादित करने में सक्षम बनाने का प्रावधान किया गया है। शांति अधिनियम के अंतर्गत नियामक निकाय अपने स्वयं के विनियम और नियामक दस्तावेज तैयार कर सकेगा, नियामकीय पर्यवेक्षण कर सकेगा, प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई कर सकेगा तथा केंद्र सरकार को सिफारिशें दे सकेगा। इसके अतिरिक्त, शांति अधिनियम परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के व्यापक विस्तार के अनुरूप परमाणु सुरक्षा में निरंतर उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए अधिक सुदृढ़ विधायी एवं नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराएगा।
भारत के पास पालघर जिले में स्थित तारापुर परमाणु विद्युत स्टेशन सहित सभी मौजूदा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए परमाणु सुरक्षा एवं संरक्षा के कार्यान्वयन की एक सुदृढ़ व्यवस्था विद्यमान है।
परमाणु ऊर्जा के सभी पहलुओं—जैसे स्थल चयन, डिज़ाइन, निर्माण, कमीशनिंग तथा परिचालन—में सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को अतिरेक (रिडंडेंसी), विविधता तथा विफलता-सुरक्षित (फ़ेल-सेफ़) डिज़ाइन विशेषताओं जैसे सुरक्षा सिद्धांतों को अपनाते हुए, डिफेंस-इन-डेप्थ के बहु-स्तरीय दृष्टिकोण के अनुरूप डिज़ाइन किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि रेडियोधर्मिता के स्रोत और पर्यावरण के बीच सुरक्षा की अनेक परतें उपलब्ध रहें। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण उच्चतम गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाता है तथा उनका परिचालन सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अत्यधिक प्रशिक्षित, योग्य एवं लाइसेंसधारी कार्मिकों द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त, एक सुदृढ़ आंतरिक तथा स्वतंत्र नियामकीय व्यवस्था भी विद्यमान है और संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) तथा परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) द्वारा समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा की जाती है।
परमाणु अपशिष्ट के प्रबंधन, उपचार, भंडारण और निपटान का कार्य परमाणु ऊर्जा (रेडियोधर्मी अपशिष्टों का सुरक्षित निपटान) नियम, 1987 तथा एईआरबी द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप, एईआरबी द्वारा निर्धारित सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है।
‘रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन’ सुरक्षा संहिता (एईआरबी/एससी/आरडब्ल्यू)। इनका अनुपालन एईआरबी द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षणों के माध्यम से सत्यापित किया जाता है। अपशिष्ट के प्रबंधन एवं निपटान क्षेत्र की निगरानी संबंधित सुविधा प्रबंधन द्वारा की जाती है। पर्यावरणीय निगरानी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) की पर्यावरण सर्वेक्षण प्रयोगशालाओं (ईएसएल) द्वारा की जाती है।
परमाणु अपशिष्ट के सुरक्षित भंडारण, प्रबंधन और निपटान को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय तथा सुव्यवस्थित प्रक्रियाएँ लागू की जाती हैं। अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रियाएँ कठोर नियामकीय मानकों द्वारा संचालित होती हैं और इन्हें परिचालन कर्मियों, आम जनता तथा पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रेडियोधर्मी अपशिष्ट को उसकी रेडियोधर्मिता के स्तर के आधार पर पृथक किया जाता है, रासायनिक प्रदूषण-निवारण, अवशोषण, आयन विनिमय/झिल्ली पृथक्करण तथा आयतन में कमी करने जैसी उपयुक्त तकनीकों के माध्यम से उसका उपचार किया जाता है, और इसके बाद उसे भंडारण के लिए उपयुक्त स्थिर रूपों में परिवर्तित किया जाता है। रेडियोधर्मिता के किसी भी रिसाव को रोकने के लिए बहु-स्तरीय अवरोधों, विकिरण परिरक्षण तथा रिसाव पहचान तंत्र से युक्त अभियांत्रिकीकृत भंडारण प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। जहाँ आवश्यक हो, वहाँ अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी कार्य दूरस्थ अथवा परिरक्षित प्रणालियों के माध्यम से तथा कड़ी विकिरणीय निगरानी के अंतर्गत किए जाते हैं। नियमित निगरानी, समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा तथा अनुमोदित अपशिष्ट निपटान प्रोटोकॉल का पालन अपशिष्ट प्रबंधन के पूरे जीवनचक्र में निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय तथा केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2287914)
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