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राष्ट्रीय आयुष मिशन ( एन ए एम )के तहत आयुष डिस्पेंसरी का उन्नयन

प्रविष्टि तिथि: 21 JUL 2026 4:12PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के अंतर्गत 12,500 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष)के नाम से जाना जाता है, को 10,941 आयुष डिस्पेंसरी और 1,559 सब-हेल्थ सेंटरों के उन्नयन के माध्यम से संचालित करने के लिए अनुमोदित किया गया है। देश के राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा यह बताया गया है कि ये सभी सेंटर कार्यशील हैं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के अन्तर्गत कुल . 1872.71 करोड़ का धन आवंटित/रिलीज़ किया गया है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के अनुसार पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान इस मिशन के तहत 1802.15 करोड़ का उपयोग हुआ है।

भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और जिला अस्पतालों (DHs) पर आयुष सुविधाओं की सह-उपस्थिति (Co-location) की रणनीति अपनाई है, जिससे मरीजों को एक ही विंडो पर विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों में से विकल्प लेने की सुविधा मिलती है। आयुष चिकित्सकों/पैरा-चिकित्सकों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण का समर्थन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, जबकि आयुष अवसंरचना, उपकरण/फर्नीचर और औषधियों के लिए समर्थन राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत आयुष मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जा रहा है। ये साझा जिम्मेदारियाँ हैं। एनएचएम-मेडिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (MIS) डेटाबेस के अनुसार 31.12.2025 तक देशभर में 6,302 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 3,191 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 475 जिला अस्पताल सह-स्थपित किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय औषधीय पौधा बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, “औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधननामक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू कर रहा है, ताकि औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा सके।

 

 इसके अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियों का समर्थन किया जाता है:

1. प्रशिक्षण/वर्कशॉप/सेमिनार/सम्मेलन जैसे सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ।

2. इन-सिटू संरक्षण/एक्स-सिटू संरक्षण।

3. संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMCs)/पंचायती/वन पंचायतों/बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटियों (BMCs)/स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के साथ आजीविका संबंधी लिंकेज।

4. अनुसंधान और विकास।

5. औषधीय पौधों के उत्पादों के प्रचार, विपणन और व्यापार।

6. औषधीय पौधों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्रगामी और पश्चगामी जोड़ (इंटीग्रेटेड कम्पोनेंट) जिसके अन्तर्गत निम्नलिखित गतिविधियाँ समर्थित हैं:

 

गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के लिए अवसंरचना ताकि खेती के लिए रोपण सामग्री तैयार की जा सके।

किसानों को जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ।

पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और मार्केटिंग के लिए अवसंरचना ताकि औषधीय पौधों की बाजारयोग्यता बढ़े, उत्पाद में मूल्य जुड़ सके, लाभप्रदता बढ़े और नुकसान घटे।

कच्चे माल के परीक्षण और प्रमाणन।

 

आयुर्वेदिक दवाइयों के गुणवत्ता नियंत्रण को सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित उपाय लागू किए जा रहे हैं:

1. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 में आयुर्वेदिक दवाओं के लिए विशेष नियामक प्रावधान हैं। विनिर्माताओं के लिए विनिर्दिष्ट लाइसेंसिंग आवश्यकताओं और दवाइयों के लिए सुरक्षा एवं प्रभावशीलता के प्रमाण, अनुसूची टी (Schedule T) के अनुसार गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस (GMP) का पालन और आयुर्वेदिक फार्माकोपिया में वर्णित दवा मानकों का पालन अनिवार्य है।

2. ड्रग निरीक्षक अपने क्षेत्राधिकार में निर्माताओं या बिक्री दुकानों से नियमित रूप से दवा के नमूने एकत्र करते हैं और गुणवत्ता परीक्षण के लिए ड्रग कंट्रोल विभाग के ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरी को भेजते हैं; यदि किसी नमूने कोमानक गुणवत्ता के अनुसार नहींपाया जाता है तो बाजार से उन उत्पादों की बिक्री रोकने और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा इसके अधीन बनाये गए नियमों के अनुसार उपयुक्त कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जाते हैं।

फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होमियोपैथी (PCIM&H), जो आयुष मंत्रालय के अधीन एक अधीनस्थ संगठन है, आयुर्वेदिक दवाओं के लिए फार्माकोपियाई मानक और फार्मुलरी विशिष्टताएँ विकसित करता है, जो उनकी पहचान, शुद्धता और मात्रा निर्धारित करने के आधिकारिक ग्रंथ के रूप में काम करती हैं। इन मानकों का पालन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और इसके नियमों के तहत अनिवार्य है। PCIM&H आयुर्वेदिक दवाओं के लिए अपीलीय ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरी के रूप में भी कार्य करता है तथा मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और परीक्षण पद्धतियों पर ड्दवा नियामक प्राधिकरण, ड्रग विश्लेषकों और अन्य हितधारकों के लिए नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि आयुर्वेदिक दवाओं के लिए गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली मजबूत हो सके।

3. ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज़ को ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 160 A से J के तहत पहचान दी जा रही है ताकि आयुर्वेदिक, सिद्ध, सर्वो-रिग्पा और यूनानी दवाओं की पहचान, शुद्धता, गुणवत्ता और मात्रा के ऐसे परीक्षण किये जा सकें। वर्तमान में 118 निजी लैबोरेटरी और 34 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरी कार्यशील हैं।

4.आयुष मंत्रालय ने आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (Ayush Oushadhi Gunvatta Evam Uttpadan Samvardhan Yojana - AOGUSY) नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की है ताकि आयुष फार्मेसियों और ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज़ को उच्च मानकों को प्राप्त करने में सहायता मिल सके।

5.इसके अतिरिक्त, आयुष उत्पादों के लिए आयुष मंत्रालय निम्नलिखित गुणवत्ता प्रमाणन पहलों को बढ़ावा देता है:

 

सीडीएससीओ (CDSCO) में आयुष वर्टिकल: राज्य/केंद्रशासित प्रदेश लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के साथ संयुक्त निरीक्षण के माध्यम से नियामक निगरानी को मजबूत करता है और योग्य आयुष दवाओं के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन सर्टिफिकेट ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट (WHO-CoPP) जारी करने की सुविधा प्रदान करता है।

• QCI गुणवत्ता प्रमाणन स्कीम: तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के आधार पर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के लिए आयुष स्टैंडर्ड मार्क और आयुष प्रीमियम मार्क प्रदान करता है।

 

6.इसके अतिरिक्त, आयुष मंत्रालय ने 19.12.2025 को आयुष क्वालिटी मार्क प्रोग्राम लॉन्च किया ताकि गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत किया जा सके और आयुष की वैश्विक मान्यता में सुधार हो।

 

यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रभार) आयुष श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

 

पीके /केसी/ एमएम


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