रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
सरकार अग्रिम योजना एवं वैश्विक आपूर्ति साझेदारियों के माध्यम से पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता कर रही सुनिश्चित
कुल उर्वरक आवश्यकता में 2025-26 में लगभग 4% की वृद्धि; घरेलू उत्पादन एवं रणनीतिक आयात के माध्यम से बनाए रखी गई आपूर्ति
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 6:10PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने अग्रिम योजना, मजबूत घरेलू उत्पादन और भागीदार देशों के साथ रणनीतिक आयात व्यवस्था के माध्यम से देश भर में उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्लू) प्रत्येक फसल सत्र से पहले राज्य सरकारों के परामर्श से उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है। इन आकलनों के आधार पर, उर्वरक विभाग देश भर के किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन, आयात और वितरण का समन्वय करता है।
वर्ष 2025-26 के दौरान, कुल उर्वरक आवश्यकता 2024-25 के 649.43 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) की तुलना में 677.18 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) आंकी गई थी, जो लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2025-26 के दौरान उर्वरक की मांग में 41 प्रतिशत की वृद्धि नहीं हुई है।
वर्तमान खरीफ 2026 सत्र (1 अप्रैल 2026 से 14 जुलाई 2026) के दौरान, प्रमुख उर्वरकों—यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस —की कुल खपत 151.74 एलएमटी रही, जबकि खरीफ 2025 की इसी अवधि के दौरान यह 157.05 एलएमटी थी।
उर्वरक आपूर्ति सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए, भारतीय उर्वरक कंपनियों ने प्रमुख उर्वरक उत्पादक देशों के साथ दीर्घकालिक आयात समझौते किए हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान, सऊदी अरब से 31 एलएमटी डीएपी, जॉर्डन से 2.50 एलएमटी एमओपी, मोरक्को से 25 एलएमटी डीएपी/टीएसपी और रूस से 30.10 एलएमटी डीएपी/एनपीके के आयात के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों ने बड़ी मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता को सुगम बनाया है और वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ देश की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया है।
उर्वरक की मांग, उपलब्धता और खपत का वर्षवार तथा सत्रवार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
अनुलग्नक
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पीके/केसी/एसके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2287417)
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