पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
समुद्री क्षेत्र के समग्र विकास की भारत की कल्पना 2030
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 2:27PM by PIB Delhi
समुद्री भारत की कल्पना (एमआईवी) 2030 के अंतर्गत विश्वस्तरीय बंदरगाह और समुद्री बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इनमें क्षमता में वृद्धि, प्रौद्योगिकी को अपनाने, नए बर्थों के विकास, मशीनीकृत माल प्रबंधन, उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने, बहुविध परिवहन संपर्क में सुधार, सतत बंदरगाह संचालन तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के जरिए वर्ष 2030 के लक्ष्यों की तुलना में उपलब्धियों का विवरण तालिका-I में दिया गया है।
तालिका-I
वर्ष 2030 के लक्ष्यों की तुलना में उपलब्धियों का विवरण:
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क्रम संख्या
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मापदंड
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2013-14
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2025-26
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लक्ष्य 2030
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1.
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बंदरगाह क्षमता
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1,400
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2,818
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3,500
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2.
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बंदरगाहों का कार्गो थ्रूपुट (मिलियन मीट्रिक टन)
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972
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1,668
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2,200
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3.
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सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से प्रमुख बंदरगाहों द्वारा संभाले गए कार्गो का प्रतिशत
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~44%
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66%
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85%
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4.
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परिचालनरत राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या
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3
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32
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16
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5.
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अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का थ्रूपुट (मिलियन टन में)
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18
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218.24
|
200
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6.
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क्रूज़ जहाजों के आगमन की संख्या
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102
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224
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1,000
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7.
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जहाज पुनर्चक्रण रैंक
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1st
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1st
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1st
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8.
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प्रमुख बंदरगाहों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी (%)
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< 1%
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28%
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60%
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क्रूज़ पर्यटन: क्रूज़ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- पर्यटन मंत्रालय ने 19.06.2025 को भारतीय बंदरगाहों पर क्रूज़ जहाजों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)-3 जारी की;
- विशाखापत्तनम (सितम्बर 2023), मुंबई (सितम्बर 2025) और चेन्नई (जून 2026) में अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनलों का आधुनिकीकरण कर उन्हें चालू किया गया है;
- पुडुचेरी को शामिल करके पूर्वी तट क्रूज़ सर्किट का विस्तार किया गया है;
- हितधारकों के बीच समन्वय को सुगम बनाने के लिए सभी नौ (09) क्रूज़ गंतव्यों और गुजरात मैरीटाइम बोर्ड में डेस्टिनेशन टास्क फोर्स का गठन किया गया है;
- क्यूआर -आधारित आव्रजन निकासी प्रणाली शुरू की गई है, जिसमें क्रूज़ जहाजों के लिए मार्ग में आव्रजन निकासी का विकल्प भी शामिल है। इससे प्रति यात्री आव्रजन निकासी का समय घटकर लगभग 30 सेकंड हो गया है।
- क्रूज़ यात्रियों और उनके सामान की सीमा शुल्क निकासी के लिए मर्चेंट ओवरटाइम (एमओटी) शुल्क को सीबीआईसी के दिनांक 16.06.2026 के परिपत्र के माध्यम से समाप्त कर दिया गया है, ताकि क्रूज़ यात्रियों की तेज और निर्बाध निकासी सुनिश्चित की जा सके।
- vii. सीमा शुल्क निकासी में तेजी लाने के लिए क्रूज़ जहाजों हेतु डिजिटलीकृत सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ और स्व-घोषणा तंत्र शुरू किए गए हैं।
- क्रूज़ जहाजों से आने वाले विदेशी पर्यटक समूहों के प्रवेश को सुगम बनाने के लिए ई-ग्रुप विज़िट वीज़ा शुरू किया गया है।
- क्रूज़ जहाजों को गारंटीकृत बर्थिंग प्रदान की जाती है, जहाज हटाने संबंधी शुल्क को समाप्त कर दिया गया है और रियायती एकसमान टैरिफ प्रदान किया जाता है।
- विदेशी क्रूज़ जहाजों के लिए कैबोटेज में छूट प्रदान की गई है।
जहाज निर्माण: सरकार ने जहाज निर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए चार-स्तंभ वाली रणनीति अपनाई है। घरेलू क्षमता, समुद्री वित्तपोषण, शिपयार्ड विकास, कौशल विकास और सुधारों को मजबूत करने के लिए सरकार ने 69,725 करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। इसके प्रमुख घटकों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस) के तहत 24,736 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि इसका दायरा बढ़ाया जा सके और विदेशी शिपयार्डों की तुलना में भारतीय शिपयार्डों के सामने आने वाली लागत संबंधी प्रतिकूलताओं का समाधान किया जा सके;
- समुद्री विकास निधि (एमडीएफ) के तहत 25,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें क्षेत्र में दीर्घकालिक वित्तपोषण को मजबूत करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये की समुद्री निवेश निधि और 5,000 करोड़ रुपये की ब्याज प्रोत्साहन निधि शामिल है।
- जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) के तहत 19,989 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य वार्षिक जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 45 लाख सकल टन भार करना तथा ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टरों को समर्थन देना है।
- बड़े जहाजों को अवसंरचना के रूप में वर्गीकृत करने और मांग एकत्रीकरण सहित नीतिगत सुधारों को लागू करने की पहल की गई है। सरकार ने 19 सितम्बर 2025 को 10,000 या उससे अधिक सकल टन भार वाले भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों को अवसंरचना का दर्जा प्रदान करने की अधिसूचना जारी की। भारत में निर्मित जहाजों के लिए 1,500 जीटी या उससे अधिक आकार वाले जहाजों को अवसंरचना का दर्जा दिया गया है। मांग एकत्रीकरण के तहत 400 से अधिक जहाजों की एक बेड़ा अधिग्रहण योजना तैयार की गई है, जिससे भारतीय शिपयार्डों को दीर्घकालिक ऑर्डर की स्पष्ट संभावना प्राप्त होती है।
जहाज पुनर्चक्रण: जहाज पुनर्चक्रण इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
- पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने शिपयार्डों के आधुनिकीकरण में सहायता के लिए 109 भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्डों को फेरस स्क्रैप विकास निधि (एफएसडीएफ) के तहत 53.5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। गुजरात के अलंग में एक बहु-विशेषता अस्पताल के विकास और संचालन के लिए एफएसडीएफ से प्रति वर्ष 2.49 करोड़ रुपये की सहायता जारी की जाती है। इसके अतिरिक्त, गुजरात के अलंग में एक अन्य प्राथमिक अस्पताल के रखरखाव और संचालन के लिए भी एफएसडीएफ के तहत प्रति वर्ष 12 लाख रुपये जारी किए जाते हैं। इन उपायों से यार्डों को हांगकांग कन्वेंशन (एचकेसी) के अनुरूप बनने में सहायता मिली है और वर्तमान में अलंग में परिचालनरत 115 जहाज पुनर्चक्रण यार्ड एचकेसी के अनुरूप हैं। एचकेसी अनुपालन से भारत को वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करने में सहायता मिलती है, क्योंकि भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्डों को वैश्विक शिपिंग बेड़ों के लिए सुरक्षित, प्रमाणित और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार गंतव्यों के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
- प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए सरकार ने शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, जब किसी जहाज का पुनर्चक्रण एचकेसी -अनुपालक भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्ड में किया जाता है, तो जहाज मालिकों को पुनर्चक्रित जहाज के स्क्रैप मूल्य के 40 प्रतिशत के बराबर क्रेडिट नोट प्रदान किया जाता है। इस क्रेडिट नोट का उपयोग भारतीय शिपयार्ड में निर्मित नए जहाज के मूल्य के 5 प्रतिशत तक के भुगतान के लिए किया जा सकता है। इससे घरेलू जहाज पुनर्चक्रण और जहाज निर्माण—दोनों को बढ़ावा मिलता है।
तटीय नौवहन: तटीय नौवहन को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय बजट 2026-27 में तटीय माल परिवहन प्रोत्साहन योजना की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय नौवहन की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है।
एमओपीएसडब्ल्यू ने समुद्री क्षेत्र में दक्षता, पारदर्शिता और कारोबार में सुगमता बढ़ाने के लिए डिजिटल और नियामक सुधार लागू किए हैं। मैरीटाइम सिंगल विंडो, वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस, मैत्री, ई-समुद्र, ई-परीक्षा और जल समृद्धि पोर्टल जैसी पहलों ने दस्तावेजीकरण, व्यापार प्रक्रियाओं, नियामक सेवाओं और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास को सुव्यवस्थित किया है।
कौशल विकास के संबंध में, सरकार ने समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण को मजबूत करके, समुद्री संस्थानों के पाठ्यक्रम को उन्नत करके और उद्योग-उन्मुख कौशल कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग क्षेत्र में कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य भारत के समुद्री विकास को समर्थन देने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और कुशल कार्यबल तैयार करना है। उठाए गए विभिन्न कदमों का विवरण इस प्रकार है:
- 11 शिपयार्डों ने 8 तटीय राज्यों में 34 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के साथ ओजेटी के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत 150 घंटे का ऑन-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) मॉडल शुरू किया गया है। अब तक इन शिपयार्डों में 727 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मैरीटाइम एंड शिपबिल्डिंग (सीईएमएस) द्वारा पश्चिम बंगाल के 2 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) कार्यक्रम लागू किया गया है।
- 9 शिपयार्डों में प्रारंभिक कौशल अंतर अध्ययन पूरा कर लिया गया है।
- कौशल विकास को सुगम बनाने के लिए इंडियन शिप टेक्नोलॉजी सेंटर (आईएसटीसी) की स्थापना धारा 8 कंपनी के रूप में की गई है।
- पिछले 3 वर्षों के दौरान कुल 92,697 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित/कुशल/उच्च-कुशल बनाया गया है।
- जहाज निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास परियोजना के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (केओआईसीए) के बीच कार्यान्वयन योजना (पीओआई) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
विभिन्न पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग विकास पहलों के माध्यम से वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विश्व बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई) 2025 के अनुसार, भारत के 3 बंदरगाह—जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए), मुंद्रा और पिपावाव—विश्व के शीर्ष 30 कंटेनर बंदरगाहों में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है, जो समुद्री क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है। पत्तन क्षेत्र के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में पिछले 10 वर्षों के दौरान उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसका विवरण तालिका-II में दिया गया है।
तालिका II
भारत में बंदरगाहों के प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई):
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क्रम संख्या
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मापदंड
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2014-2015
|
2025-2026
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सुधार प्रतिशत में
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1.
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प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों की कुल क्षमता (एमटीपीए में)
|
1,561
|
2,817
|
80
|
|
2.
|
प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों द्वारा संभाला गया कुल कार्गो (एमटी में)
|
1,052
|
1,668
|
59
|
|
3.
|
प्रमुख बंदरगाहों की कुल क्षमता (एमटीपीए में)
|
873
|
1,728
|
98
|
|
4.
|
प्रमुख बंदरगाहों द्वारा संभाला गया कुल कार्गो (एमटी में)
|
581
|
915
|
57
|
|
5.
|
प्रमुख बंदरगाहों में औसत जहाज टर्नअराउंड समय (कुल) (घंटों में)
|
96
|
48.8
|
49
|
|
6.
|
प्रमुख बंदरगाहों में प्रति जहाज बर्थ दिवस औसत आउटपुट
|
12,458
|
18,915
|
52
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यह जानकारी केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/केपी /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2287408)
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