कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
प्राकृतिक कृषि हेतु वित्तीय सहायता
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 6:05PM by PIB Delhi
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अखिल भारतीय प्राकृतिक कृषि नेटवर्क कार्यक्रम (पूर्व में एआईएनपी-जैविक कृषि) के माध्यम से वर्ष 2020-21 में 16 राज्यों में फैले 20 सहयोगी केंद्रों के साथ अध्ययन शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 8 प्रमुख फसल प्रणालियों का मूल्यांकन करना और प्राकृतिक कृषि के अंतर्गत पद्धतियों का एक पैकेज विकसित करना है, साथ ही जैविक कृषि के अंतर्गत फसल प्रणालियों का मूल्यांकन करना भी है। इस योजना में 11 राज्य कृषि विश्वविद्यालय, 8 आईसीएआर संस्थान/केंद्र और 1 डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं।
प्राकृतिक खेती के लाभों पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि यदि प्राकृतिक खेती को सही तकनीकों और संतुलित तरीके से अपनाया जाए, तो पैदावार में सुधार होता है। कई किसानों के अनुभवों से यह भी सिद्ध हुआ है कि शुरुआती वर्षों में मिट्टी की दशा में सुधार करने से फसल की गुणवत्ता, स्वाद और दीर्घकालिक पैदावार में वृद्धि होती है। इसके अलावा, रासायनिक लागत में कमी से किसानों का शुद्ध लाभ बढ़ता है। प्राकृतिक खेती में मल्चिंग से मिट्टी में नमी बनी रहती है, खरपतवारों पर नियंत्रण होता है और मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है। इससे मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की गतिविधि भी बढ़ती है और मिट्टी की दशा में सुधार होता है। बहु-फसली खेती से खेत में जैव विविधता बढ़ती है, कीटों और रोगों का प्रकोप कम होता है और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है। निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
- नेटवर्क अनुसंधान के तहत, विभिन्न राज्यों के लिए फसल प्रणाली-आधारित प्राकृतिक खेती पैकेज विकसित किए गए हैं, जैसे मूंगफली + तिल - सौंफ + गोभी (राजस्थान और गुजरात), सोयाबीन + मक्का - गेहूं + सरसों (छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश), और कसावा (केरल)।
- बाजौरा (हिमाचल प्रदेश), अल्मोड़ा (उत्तराखंड) और गंगटोक (सिक्किम) में, पूरी तरह से प्राकृतिक खेती के तहत सोयाबीन + मक्का - सब्जी मटर + धनिया (हरी पत्ती) फसल प्रणाली में (5 वर्षों में) 6475 किलोग्राम/हेक्टेयर/वर्ष की औसत प्रणाली उत्पादकता (सोयाबीन समतुल्य) दर्ज की गई, जो जैविक खेती/एकीकृत फसल प्रबंधन की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक थी।
- भोपाल और जबलपुर (मध्य प्रदेश) और रायपुर (छत्तीसगढ़) में, सोयाबीन + मक्का - गेहूं + सरसों की फसल प्रणाली में (5 वर्षों में) 3346 किलोग्राम/हेक्टेयर/वर्ष की औसत प्रणाली उत्पादकता (सोयाबीन समतुल्य) दर्ज की गई, जो एकीकृत फसल प्रबंधन और जैविक खेती के समतुल्य पाई गई।
- एस.के. नगर (गुजरात), अजमेर और उदयपुर (राजस्थान) में, पूर्ण प्राकृतिक कृषि के अंतर्गत लोबिया + मक्का/मूंगफली + तिल-सौंफ + फूलगोभी/पत्तागोभी की फसल प्रणाली में (5 वर्षों में) औसत प्रणाली उत्पादकता (लोबिया समतुल्य) 9209 किलोग्राम/हेक्टेयर/वर्ष दर्ज की गई। यह एकीकृत फसल प्रबंधन के समकक्ष पाई गई।
- प्राकृतिक कृषि (एनएफ) प्रबंधन से मृदा स्वास्थ्य संकेतकों में स्पष्ट सुधार देखा गया है। प्राकृतिक कृषि वाले खेतों में मृदा आर्गेनिक कार्बन (एसओसी) का स्तर 2-3 वर्षों में बढ़ा है। उदाहरण के लिए, हिमालयी क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों में, एसओसी लगभग 0.90% से बढ़कर 1.15% हो गया। प्राकृतिक कृषि वाली मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या और विविधता रासायनिक उर्वरकों से खेती की गई मिट्टी की तुलना में अधिक पाई गई। लाभकारी जीवाणुओं, कवकों और एक्टिनोमाइसेट्स की प्रचुरता और संतुलित वितरण देखा गया, जो समय के साथ एक स्वस्थ मृदा इकोसिस्टम के विकास का संकेत देता है। प्राकृतिक कृषि के अंतर्गत मिट्टी में आर्गेनिक पदार्थ और सूक्ष्मजीवों की यह वृद्धि पोषक तत्व चक्रण और मृदा संरचना में सुधार करती है, जिससे दीर्घकालिक मृदा उर्वरता और फसल उत्पादन की स्थिरता के लिए एक मजबूत आधार बनता है।
इसके अलावा, नीति आयोग की आकलन रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91.2% किसानों ने फसल उत्पादकता में वृद्धि और मिट्टी की दशा में उल्लेखनीय सुधार का अनुभव किया है। 90.1% किसानों ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत में कमी आई है।
इस मिशन के अंतर्गत, किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4000/- रुपये का उत्पादन आधारित प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो 2 वर्षों तक (प्रति किसान अधिकतम 1 एकड़ भूमि के लिए) मान्य होगा। यह प्रोत्साहन राशि किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, अधिक किसानों को प्रशिक्षित करने, पशुधन के रखरखाव, प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करने, जिसमें मिश्रण और भंडारण कंटेनर खरीदना या जैव-उपकरण संसाधन केंद्रों (बीआरसी) से सामग्री खरीदना आदि शामिल है, के लिए है।
यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2287369)
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