भारी उद्योग मंत्रालय
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इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए चार्जिंग स्टेशन

प्रविष्टि तिथि: 21 JUL 2026 5:02PM by PIB Delhi

बीएचईएल पोर्टल के अनुसार, 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन हैं जिनमें से 16,561 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन कारों के लिए फास्ट ईवी चार्जर से सुसज्जित हैं।

सरकार ने निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रेंज संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  1. भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने एफएएमई-II और पीएम ई-ड्राइव योजनाओं के अंतर्गत क्रमशः 912.50 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, ताकि देश में, विशेष रूप से शहरों और राजमार्गों के किनारे, ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (ईवीपीसीएस) स्थापित किए जा सकें।
  2. विद्युत मंत्रालय ने "इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना और संचालन के लिए दिशानिर्देश 2024" जारी किए हैं, जो बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशनों सहित एक कनेक्टेड और इंटरऑपरेबल चार्जिंग नेटवर्क के लिए मानकों की रूपरेखा तैयार करते हैं।
  3. इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना एक गैर-लाइसेंस प्राप्त गतिविधि है, जिससे निजी उद्यमियों को चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना अधिक आसान हो जाता है।

ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स (पीएलआई-ऑटो) के लिए पीएलआई योजना के अंतर्गत कारों को सहयोग दिया जाता है। पीएलआई ऑटो योजना के अंतर्गत, अग्रणी ओईएम को एएटी वाहनों (इलेक्ट्रिक कारों (ई-4डब्ल्यू) सहित) की निर्धारित (वृद्धिशील) बिक्री पर 13 से 18 प्रतिशत तक का वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता था।

प्रधानमंत्री ई-ड्राइव के अंतर्गत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इनमें से कुल 13,800 ई-बसें दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत सहित 7 शहरों को आवंटित की गई हैं। इन 13,800 ई-बसों के लिए ई-बस ऑपरेटरों के चयन हेतु निविदा प्रक्रिया 30 दिसंबर, 2025 (10,900 ई-बसों के लिए प्रथम चरण की निविदा) और 27 मई, 2026 (2,900 ई-बसों के लिए द्वितीय चरण की निविदा) तक पूरी हो चुकी है।

30 जून, 2026 तक, अहमदाबाद, हैदराबाद और सूरत द्वारा अवार्ड लेटर (एलओए) जारी किए जा चुके हैं। हैदराबाद को आवंटित 2,000 ई-बसों में से 915 ई-बसों के लिए हैदराबाद द्वारा और सूरत द्वारा 600 ई-बसों के लिए रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जम्मू और कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में तैनाती के लिए 200 ई-बसों को मंजूरी दी गई है।

कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) और भारी उद्योग मंत्रालय इन बसों की तेजी से तैनाती के लिए राज्य सरकार और एसटीईयू के साथ नियमित परामर्श और समीक्षा कर रहे हैं।

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित योजनाएं लागू की हैं:

  1. भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए (एफएएमई इंडिया) योजना चरण-II : सरकार ने इस योजना को 01 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2024 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू किया, जिसके लिए कुल 11,500 करोड़ रुपए का बजटीय अनुदान दिया गया। इस योजना के अंतर्गत ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू और ई-4डब्ल्यू वाहनों की मांग को प्रोत्साहित किया गया और ई-बसों के लिए अनुदान तथा ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (ईवी पीसीएस) स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की गई। एफएएमई-II के माध्यम से ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू और ई-4डब्ल्यू सहित लगभग 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिला है। इसके अतिरिक्त, 30 जुलाई, 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 5,197 इलेक्ट्रिक बसें (ई-बसें) तैनात की जा चुकी हैं। साथ ही, देश भर में ईवी पीसीएस की स्थापना के लिए इस योजना के अंतर्गत 912.50 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
  2. भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (पीएलआई-ऑटो): सरकार ने 23 सितंबर, 2021 को देश में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए इस योजना को अधिसूचित किया, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों सहित उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है, जिसके लिए 25,938 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।
  3. उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना: सरकार ने 09 जून, 2021 को देश में एसीसी के निर्माण के लिए 18,100 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के साथ पीएलआई योजना अधिसूचित की। इस योजना का उद्देश्य 50 गीगावॉट एसीसी बैटरियों के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण प्रणाली स्थापित करना है।
  4. पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (पीएम ईड्राइव) योजना: 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना को 29 सितंबर, 2024 को अधिसूचित किया गया है। यह योजना लगभग 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिनमें ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-ट्रक, ई-बस और ई-एम्बुलेंस शामिल हैं। इसके अलावा, ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (ईवी पीसीएस) और परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन भी इस योजना में शामिल है। योजना के अंतर्गत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 13,800 ई-बसें चार मिलियन से अधिक आबादी वाले सात शहरों - दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत में आवंटित की गई हैं। इसके अलावा, जम्मू और कश्मीर राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 200 ई-बसों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, अखिल भारतीय स्तर पर ईवी पीसीएस की तैनाती के लिए 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  5. प्रधानमंत्री ई-बस सेवा - भुगतान सुरक्षा तंत्र (पीएसएम) योजना : 28 अक्टूबर, 2024 को अधिसूचित इस योजना का परिव्यय 3,435.33 करोड़ रुपए है और इसका उद्देश्य 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सहयोग करना है। इस योजना का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (पीटीए) द्वारा भुगतान में चूक होने की स्थिति में ई-बस संचालकों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करना है।
  6. भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजना (एसपीएमईपीसीआई) 15 मार्च, 2024 को अधिसूचित की गई थी। इस योजना के अंतर्गत आवेदकों को न्यूनतम 4,150 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा और तीसरे वर्ष के अंत तक न्यूनतम 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष के अंत तक न्यूनतम 50 प्रतिशत का विकास लाभ (डीवीए) प्राप्त करना होगा।

भारत सरकार द्वारा देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित पहलें भी की गई हैं: –

i.       इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जर/चार्जिंग स्टेशनों पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

ii.       सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने घोषणा की है कि बैटरी से चलने वाले वाहनों को हरी लाइसेंस प्लेट दी जाएंगी और उन्हें परमिट की आवश्यकता से छूट दी जाएगी।

iii.      सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह जारी की है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलेगी।

यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एचएन/एसके


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