आयुष
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की ओर से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार '‘सौश्रुतम् 2026' का सफलतापूर्वक समापन किया गया
इस संगोष्ठी से आचार्य सुश्रुत की शल्य चिकित्सा विरासत का उत्सव मनाने और उसे आगे बढ़ाने के लिए भारत और विदेशों के प्रमुख विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया
प्रविष्टि तिथि:
17 JUL 2026 10:22PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के तहत अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) नई दिल्ली ने 17 जुलाई, 2026 को आयोजित समापन सत्र के साथ तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार 'सौश्रुतम् 2026' का सफलतापूर्वक समापन किया। 15 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित इस संगोष्ठी से पहले 14 जुलाई को एक दिवसीय सम्मेलन पूर्व कार्यशाला का आयोजन किया गया था और इसका आयोजन सुश्रुत जयंती के शुभ अवसर पर किया गया था।
राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) की अध्यक्ष वैद्य मनीषा कोठेकर और दक्षिण दिल्ली से लोकसभा सांसद श्री रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मुख्य अतिथि के रूप में समापन सत्र की शोभा बढ़ाई। एनसीआईएसएम के 'बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन' के प्रेसिडेंट डॉ. सुश्रुत कनौजिया और पद्मश्री प्रोफेसर मनोरंजन साहू ने 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के तौर पर इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
आयोजन टीम को बधाई देते हुए वैद्य मनीषा कोठेकर ने कहा कि 'सौश्रुतम्' जैसे सेमिनार नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, क्योंकि इनसे छात्रों को बहुमूल्य अनुभव मिलता है और आयुर्वेद के क्षेत्र में शैक्षणिक व व्यावसायिक जुड़ाव मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से समाज को आयुर्वेदचार्यों को न केवल चिकित्सक के रूप में बल्कि कुशल सर्जन के रूप में भी पहचानने में मदद मिल रही है। उन्होंने आयुर्वेदिक शिक्षा और अभ्यास को मजबूत करने और बढ़ावा देने की दिशा में आयोग की ओर से सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
'सौश्रुतम् 2026' के पीछे के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए एआईआईए के डायरेक्टर प्रो. (वैद्य) पी.के. प्रजापति ने कहा कि इस सेमिनार का मकसद एक ऐसा वैश्विक मंच बनाना था जहां वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा दिया जा सके, सबूतों पर आधारित सर्जिकल तरीकों का आदान-प्रदान हो सके, उभरते तकनीकी नवाचारों को प्रदर्शित कर सके और आचार्य सुश्रुत की सर्जिकल विरासत का उत्सव मनाया जा सके। उन्होंने बताया कि इस पहल का मकसद आयुर्वेद और आधुनिक सर्जिकल विज्ञान के बीच अकादमिक सहयोग को मजबूत करना है। साथ ही सर्जिकल शिक्षा में रिसर्च, इनोवेशन और उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है।
सेमिनार के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) योगेश बडवे ने कहा कि एआईआईए आयुर्वेद में सर्जिकल प्रक्रियाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और आयुर्वेदिक सर्जिकल समुदाय को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 'सौश्रुतम्' जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लैटफॉर्म आयुर्वेदिक सर्जरी में उत्कृष्टता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समापन सत्र के दौरान बहुमूल्य योगदान देने वाले गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर एआईआईए ने आईआईटी दिल्ली के साथ अपने समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया, जो सहयोगी अनुसंधान और नवाचार के प्रति दोनों संस्थानों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में एआईआईए के राजभाषा विभाग की वार्षिक हिंदी पत्रिका आयुषवल्लारी के तीसरे संस्करण का विमोचन किया गया। गणमान्य हस्तियों ने 'नेत्र रोग : सामान्य जानकारी और निवारण' नाम का एक प्रकाशन भी जारी किया। इसका मकसद आंखों की बीमारियों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना, भ्रांतियां दूर करना और आसान व सुलभ भाषा में वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान 'सौश्रुतम् 2026' का स्मारिका भी जारी किया गया।
इस संगोष्ठी में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के जाने-माने शिक्षाविदों और सर्जनों ने हिस्सा लिया। साथ ही सर्जरी व हेल्थकेयर के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता और अनुभव साझा किए।
सेमिनार में एआईआईए, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (आईएमएस-बीएचयू), नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए), जयपुर, इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (आईटीआरए), जामनगर और देश भर के अन्य प्रमुख सर्जिकल केंद्रों जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिष्ठित संकाय सदस्यों के साथ पद्मश्री प्रो. एम. साहू और पद्मश्री प्रो. के. के. ठकराल सहित 30 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
एम्स, लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय अगरतला और नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के प्रसिद्ध आधुनिक शल्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी आयुर्वेद और समकालीन शल्य चिकित्सा विज्ञानों के बीच बहु-विषयक आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करते हुए विचार-विमर्श में योगदान दिया।
समापन सत्र में प्रो. (डॉ.) महेश व्यास, डीन (पीएचडी) प्रो. (डॉ.) आर. के. यादव, डीन (पीजी); डॉ. व्यासदेव महंता, आयोजन सचिव और एआईआईए के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भी भाग लिया।
सौश्रुतम् 2026 का आयोजन आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के साथ पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण को सुदृढ़ करने और एक समग्र, साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आयुष मंत्रालय के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम था।





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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2286009)
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