सहकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष में सहकारिता से जुड़े 30 करोड़ लोगों को नई ऊर्जा मिली

5 वर्षों में मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान और विकास का व्यापक रोडमैप तैयार किया है, और सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम व प्रतिस्पर्धी बनाया है

जब देश 2047 में आज़ादी की शताब्दी मनाएगा, तब 'समृद्ध भारत' की मजबूत नींव सहकारिता आंदोलन होगा

कृषि, डेयरी, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों को जोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नई सहकारी संस्थाओं का नेटवर्क बना, 32 करोड़ से अधिक सदस्यों का डिजिटल डेटाबेस तैयार हुआ

9 राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियाँ बनाकर ग्राम स्तर तक सहकारिता को इन 9 क्षेत्रों में एक माला में पिरोया है, आने वाले 10 वर्षों में ये अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी कोऑपरेटिव बनेंगी

सहकारिता के माध्यम से किसानों के उत्पाद को गांव से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और भारत को बीज उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है

भारत बीज सहकारी समिति अगले 3 वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनेगी; हर राज्य में नई यूनिट से किसानों को शुद्ध और उन्नत बीज मिलेंगे

जैविक खेती, सर्कुलर इकोनॉमी, गोबर प्रबंधन, जैविक खाद और ऊर्जा उत्पादन को सहकारिता मॉडल से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी जा रही है

त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी से हर क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल तैयार होंगे, इससे पैक्स से लेकर एपेक्स तक प्रोफेशनलिज़्म आएगा, पारदर्शिता व कार्यकुशलता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार भी समाप्त होगा

₹3,000 करोड़ की लागत से PACS के कंप्यूटरीकरण का कार्य; 55,000 PACS के माध्यम से CSC सेवाएं, 39,000 किसान समृद्धि केंद्र और 639 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं

सहकारी बैंकों में डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और ई-केवाईसी लागू होने से जिला सहकारी बैंकों का कारोबार ₹19.6 लाख करोड़ से बढ़कर ₹25 लाख करोड़ से अधिक हुआ

NCDC ने सहकारिता क्षेत्र में ₹70,000 करोड़ का नया निवेश किया, जिससे सहकारी संस्थाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण को नई गति मिली

प्रविष्टि तिथि: 06 JUL 2026 5:33PM by PIB Delhi

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्णपाल गुर्जर और श्री मुरलीधर मोहोल, राजस्थान के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री आतिश चंद्र, पशुपालन और डेयरी विभाग सचिव श्री नरेश पाल गंगवार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं, सहकारी महासंघों, सहकारी बैंकों, डेयरी सहकारी समितियों, भारत टैक्सी, पैक्स और सहकारिता क्षेत्र के अन्य हितधारकों ने भी भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत शुभ है। आज से ठीक पाँच वर्ष पहले सहकारिता से जुड़े देश के 32 करोड़ लोगों और 30 क्षेत्रों की 8 लाख 50 हजार से अधिक सहकारी संस्थाओं की 75 वर्षों से चली आ रही प्रतीक्षा पूरी हुई थी। आज ही के दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत सरकार में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के इस फैसले ने देश के सहकारिता आंदोलन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम किया, जबकि उससे पहले के 75 साल में सहकारिता आंदोलन उपेक्षा का शिकार रहा था और उसे दोयम दर्जे का माना जाता था। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर सहकारिता क्षेत्र को प्राण वायु देने का काम किया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जब भी हमारी पार्टी या गठबंधन को शासन का अवसर मिला, हमने ग्रामीण विकास और कृषि से जुड़े सभी क्षेत्रों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी जब प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने जनजातीय मंत्रालय की स्थापना की। वर्ष 2019 में मोदी जी ने जल शक्ति मंत्रालय की शुरुआत की, जिससे जल प्रबंधन को समग्रता के साथ एक मंत्रालय के अधीन लाया गया। उसी वर्ष मत्स्य पालन मंत्रालय बनाया गया। उसी साल पशुपालन और डेयरी मंत्रालय को अलग से स्थापित किया गया, और 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर मोदी जी ने कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि पाँच साल पहले जब सहकारिता मंत्रालय की स्थापना हुई थी, तब सबसे बड़ा विवाद यह कर कर पैदा किया गया था कि भारत के संविधान में ‘सहकारिता’ राज्य का विषय है, लेकिन केन्द्र सहकारिता मंत्रालय गठित कर राज्यों के काम में दखलंदाजी करेगा। उन्होंने कहा कि पाँच साल बीत गए, लेकिन अब तक विरोधी दलों द्वारा शासित राज्यों ने भी कभी शिकायत नहीं की कि केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय किसी तरह की दखलंदाजी कर रहा है और यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सहकारिता को समझने वाले जानते हैं कि सहकारिता में दखलंदाजी का सवाल ही नहीं है। सबको साथ लेकर चलना, सबके सहयोग से चलना और सबकी शक्तियों को जोड़ते जाना ही सहकारिता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने पांच वर्षों में सिद्ध कर दिया है कि सहकारिता मंत्रालय राज्यों के काम में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि राज्यों की मदद करने के लिए, नीति निर्माण के लिए और उनके उत्कर्ष के लिए गठित किया गया है। श्री शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने ऐसे कई काम शुरू किए, जिन्होंने नकारात्मक मानसिकता वाले लोगों के अनुमानों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमने इन पांच वर्षों में समस्याओं की पहचान की है, संभावनाओं को तराशा है और राज्यों को भविष्यमुखी नीतियां भी उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्ष सहकारिता मंत्रालय के लिए स्वर्णिम काल साबित हुए हैं। जब भी भारत में सहकारिता आंदोलन का इतिहास लिखा जाएगा, तो निश्चित रूप से यह काल स्वर्णमयी अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पैक्स से लेकर एपेक्स तक, राज्य सरकारों से लेकर जिला स्तर के सहकारी संघों तक, हर स्तर पर व्यापक परामर्श के बाद हमने अपनी पहलों को परिणाम में बदला है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि 62 वर्षों तक कृषि मंत्रालय के अंतर्गत मात्र एक संयुक्त सचिव के स्तर पर सहकारिता का कार्य संचालित होता था। आज पूर्ण रूप से स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय सभी राज्यों और देशभर की 8 लाख 30 हजार सहकारी समितियों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में हमने न केवल अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं, बल्कि हमारी सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने का काम भी किया है। पहले सहकारिता सीमित रूप से केवल प्राथमिक क्षेत्र तक ही थी। हमने कृषि ऋण, डेयरी, उर्वरक वितरण और ग्रामीण सेवाओं को प्राथमिक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जोड़ा है। साथ ही सेकेंडरी और टर्शरी क्षेत्रों को भी इससे जोड़ने का कार्य किया है। भंडारण, उत्पादन, निर्यात, जैविक उत्पादन, परंपरागत बीजों का उत्पादन, उच्च उत्पादकता वाले बीजों का निर्माण, डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और हरित ऊर्जा - इन सभी क्षेत्रों को एक माला में पिरोने का काम पांच वर्षों में किया गया है। सहकारिता मंत्री ने कहा कि बहुत वर्षों बाद सहकारिता मंत्रालय की पहल से आज राष्ट्रीय स्तर की तीन सहकारी समितियों के साथ मिलाकर कुल नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियां बनाई गई हैं। इन नौ समितियों के माध्यम से देश से लेकर गांव तक सहकारिता को नौ अलग-अलग क्षेत्रों में पिरोया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे इफको, कृभको, अमूल और एनडीडीबी ने सहकारिता आंदोलन की पहचान बनाई है और पूरे विश्व स्तर पर इसे प्रतिष्ठित किया है, उसी प्रकार हमारी नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियाँ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी सहकारी समितियां बन जाएंगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्षों में हमने पांच स्तंभों के रूप में पहल की है। इन पांच स्तंभों में पहले स्तंभ के तहत हमने संस्थागत सुधार, सुशासन और पारदर्शिता को मजबूत किया है। इसके लिए सहकारिता का एकीकृत डेटाबेस तैयार किया गया है। आज हर राज्य के सहकारी रजिस्ट्रार के पास यह जानकारी उपलब्ध है कि कौन से गांव में पैक्स नहीं है, कहां डेयरी नहीं है, कहां अर्बन हाउसिंग सोसाइटी नहीं है। ये सभी चीजें अब चिन्हित हैं और इन्हीं के आधार पर सहकारिता आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि 30 क्षेत्रों की 8,58,000 सहकारी समितियां और 32 करोड़ सदस्य आज एक साथ एक डेटाबेस में उपलब्ध हैं। इसमें सभी सहकारी समितियों का ऑडिट स्टेटस, टर्नओवर और ABC ग्रेडेशन भी उपलब्ध है। राज्य के सहकारी रजिस्ट्रार इसका उपयोग करके सोसाइटियों को अपग्रेड कर सकते हैं, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक और राज्य डेयरी के साथ ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली डेयरियों और पैक्स को अपग्रेड कर सकते हैं तथा जहां वैक्यूम है, उसे भरने का काम कर सकते हैं। श्री शाह ने कहा कि इसी वर्ष हमने सहकारी संस्थाओं के लिए रैंकिंग फ्रेमवर्क प्रारंभ किया है। इसके माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली शीर्ष पाँच सहकारी समितियों की पहचान की जाएगी, उन्हें रैंकिंग प्रदान की जाएगी तथा उनके उत्कृष्ट कार्यों को उजागर कर अन्य संस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनाया जाएगा। साथ ही, उन्हें प्रोत्साहित करने का भी कार्य किया जाएगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2002 में 50 महत्वपूर्ण संशोधन करके पूरी सहकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लोकतांत्रिक बनाया है। इन संस्थाओं के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि इनका नेतृत्व सहकारिता से जुड़े लोगों के हाथ में था, लेकिन इनके प्रशासन व गवर्नेंस को पेशेवर ढंग से संचालित किया जाता है। इसी सफल मॉडल को अपनाने के उद्देश्य से त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी शुरू की। उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रश्न सदैव नेतृत्व और संस्थागत स्थायित्व का रहा है। इसलिए हमने सफल सहकारी मॉडलों का गहन अध्ययन किया। आखिर IFFCO, KRIBHCO, Amul क्यों सफल हुए, विभिन्न राज्यों की दुग्ध सहकारी समितियाँ क्यों सफल रहीं और National Dairy Development Board इतना उत्कृष्ट कार्य कैसे कर रहा है। उन्होंने कहा कि त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी से बैंकिंग, डेयरी, विपणन, कृषि, उर्वरक तथा सहकारिता के अन्य क्षेत्रों के प्रशिक्षित पेशेवर तैयार होंगे। ये पेशेवर योग्यता के आधार पर नियुक्त होंगे। हमारा लक्ष्य प्राथमिक सहकारी समितियों से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक चरणबद्ध तरीके से प्रोफेशनल मैनेजमेंट को लागू करना है। इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यकुशलता में सुधार होगा और नियुक्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में भ्रष्टाचार समाप्त होने से सहकारी क्षेत्र में जनता का भरोसा बढ़ेगा।

श्री अमित शाह  ने कहा कि पैक्स के सुदृढ़ीकरण का दूसरा कदम उठाया गया। एक समय पैक्स अनेक प्रकार के काम करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे वे केवल निश्चित ब्याज दर पर पैसा लेने और देने तक सीमित हो गईं। इससे उनका मुनाफा सिकुड़ता गया। हमने पैक्स के लिए मॉडल बायलॉज तैयार किए। आज बंगाल सहित पूरे देश ने इन मॉडल बायलॉज को स्वीकार कर लिया है। आज पूरे देश के पैक्स एक ही मॉडल बायलॉज के तहत कार्य कर रहे हैं। आज 55,000 पैक्स सीएससी के माध्यम से गांव के लोगों को 300 से अधिक सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वहां से रेल टिकट बुक होती है, जन्म-मृत्यु पंजीकरण होता है, प्रधानमंत्री जी की योजनाओं के लिए आवेदन और पेमेंट भी वहीं से प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार 300 विभिन्न गतिविधियों को 55,000 पैक्स के माध्यम से हम सीएससी सेवाएं दे रहे हैं। सहकारिता मंत्री ने कहा कि 39,000 पैक्स किसान समृद्धि केंद्र बन चुके हैं। 600 से अधिक पैक्स जन औषधि केंद्र बन चुके हैं। 75 पैक्स पेट्रोल और डीजल के खुदरा आउटलेट चला रहे हैं। 118 पैक्स जल आपूर्ति योजनाओं का रखरखाव कर रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये खर्च करके पैक्स को कंप्यूटराइज करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज 50,000 पैक्स ई-पैक्स के रूप में घोषित हो गए हैं, जिनका पूरा कारोबार इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चल रहा है, जो बहुत बड़ी उपलब्धि है। आज ई-पैक्स होने के कारण ई-ऑडिट का कॉन्सेप्ट भी जमीन पर उतारा जा चुका है। जनरेट होने वाले अलर्ट्स पैक्स की मीटिंग में रखे जाएंगे, जिससे पैक्स का पूरा व्यवहार पारदर्शी होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमने तीसरा काम सहकारी क्षेत्र में क्रेडिट का प्रवाह बढ़ाने का किया है। सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल भुगतान शुरू किया गया, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की गई, ई-केवाईसी शुरू की गई, और डिजिटल लोन जैसी व्यवस्थाओं के साथ धीरे-धीरे हमारे अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक आगे बढ़ रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंकों का कुल व्यवसाय पहले 19.6 लाख करोड़ रुपये था, जो आज 25 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुजरात में ‘सहकारिता में सहकार' के प्रयोग के तहत हर सहकारी समिति का खाता सहकारी बैंक में खोला गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अकेले गुजरात में डेयरी, एपीएमसी, पैक्स और हर प्रकार की सहकारी समितियों के खाते सहकारी बैंकों में खोलने के कारण जिला सहकारी बैंकों की जमा राशि में बढ़ोतरी हुई है। इन प्रयासों से ढ़ेर सारे जिला सहकारी बैंक घाटे से मुनाफे में आ गए हैं। अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों का नेट प्रॉफिट लगभग दोगुना हो चुका है। पिछले पांच वर्षों में हमने इन बैंकों का सकल एनपीए 12.8 प्रतिशत से घटाकर 6.2 प्रतिशत पर लाए है और शुद्ध एनपीए को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 0.7 प्रतिशत पर लाने में सफलता प्राप्त की है। इससे जनता का भरोसा बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इन सभी कार्यों को आगे बढ़ाने से भी विश्वास और मजबूत होता है। एनसीडीसी का नेट एनपीए भी अब नगण्य हो गया है। यह देश की जनता को और सहकारिता की आलोचना करने वालों को स्पष्ट जवाब है कि छोटे-छोटे लोग इकट्ठा होकर बहुत बड़ा काम कर सकते हैं।  श्री शाह ने कहा जब देश 15 अगस्त 2047 को आजादी की शताब्दी मनाएगा, तब समृद्ध भारत की एक मजबूत नींव हमारा सहकारिता आंदोलन होगा।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा, हमने सहकारिता के बाजार लिंकेज को भी मजबूत किया है। निर्यात और जैविक उत्पादन के लिए तीन नई सहकारी समितियां बनाई गई हैं। डेयरी क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारने के लिए तीन और सहकारी समितियां बन चुकी हैं। हम नमक के क्षेत्र में भी प्रवेश कर चुके हैं। पहले किसान का उत्पाद गांव से मंडी तक पहुंचता था, अब सहकारिता के माध्यम से किसान का उत्पाद पूरी दुनिया तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि हमने जो बीज उत्पादन की सहकारी समिति बनाई है, वह तीन वर्ष बाद भारत की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन कंपनी बन जाएगी। इसके माध्यम से किसानों को शुद्ध, बिना मिलावट वाला बीज उपलब्ध होगा, जिससे अधिक उत्पादन संभव हो सकेगा। हमने इसमें भारतीय बीजों के संरक्षण की व्यवस्था भी की है। केले और आलू के किसानों को आधुनिक तकनीक वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए हमारी सहकारी समितियां हर राज्य में नया यूनिट शुरू करेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से टिश्यू कल्चर पौधे और अधिक पैदावार देने वाली, एक समान आकार वाली आलू की बीज नस्ल किसानों तक पहुंचेगी। इससे हम विश्व का चिप्स कारोबार भारत में ला सकेंगे। गुजरात में बनास डेरी ने इसकी बहुत अच्छी शुरुआत की है। हम उसी मॉडल को हर राज्य में पहुंचाकर केले, पपीते और आलू के बीजों को टिश्यू कल्चर और नई तकनीक के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने का काम करेंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज बहुत जरूरी है कि जैविक उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। हमारे 140 करोड़ की आबादी और विश्व भर के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता भी हमारी ही है। इसलिए भारत के किसानों को जैविक उत्पादन बढ़ाना चाहिए। केमिकल उर्वरकों के उपयोग को बंद करने से उत्पादन कम हो जाएगा, यह एक गलतफहमी है। पिछले पांच वर्षों में यह सिद्ध हो चुका है कि केमिकल उर्वरकों का उपयोग कम करने पर उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता है और भूमि का संरक्षण भी होता है।हम शुगर और डेयरी क्षेत्र में 100 प्रतिशत सर्कुलर इकोनॉमी ला रहे हैं। इसके माध्यम से डीएपी का विकल्प बनने वाला खाद तैयार होगा। यह देसी खाद डीएपी से सस्ता और गुणवत्ता में बेहतर होगा, जो खेतों को अधिक लाभ पहुंचाएगा। देश के कई स्थानों पर ऐसी सहकारी समितियां स्थापित की जा रही हैं। श्री अमित शाह ने देश के किसानों से अपील करता हूं कि वे डीएपी छोड़कर आने वाले दिनों में इस नए खाद को स्वीकार करें और अपनाएं। जैविक उत्पादों के लिए विश्व बाजार का अन्वेष्ण करने हेतु हमने एक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी सोसाइटी बनाई है, जो इसका काम करेगी। सहकारिता के बाजार लिंकेज को गांव-गांव तक ले जाने के लिए हमने सभी राज्यों के मार्केटिंग संघों को मजबूत करने की योजना बनाई है। पांचवी पहल नई आर्थिक व्यवस्था की है, जो सस्टेनेबल, रिसोर्स एफिशिएंट और सर्कुलर हो। हम सहकारिता के हर क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी लागू करना चाहते हैं। हमने डेयरी से इसकी शुरुआत की है।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा हम मोदी जी के ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ मिशन को आगे बढ़ाना चाहते हैं। आज शुरू हुई गोमय सहकारी समिति लिमिटेड पशु आहार, पशु स्वास्थ्य, कृत्रिम गर्भाधान, गोबर प्रबंधन, जैविक उर्वरक और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन के माध्यम से डेयरी क्षेत्र में पूरी चक्रीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएगी।श्वेत क्रांति-2 के माध्यम से हम सहकारी डेयरियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना चाहते हैं। सभी राज्यों के डेयरी फेडरेशनों से आग्रह करता हूं कि अगले दो वर्षों में दूध देने वाले किसानों की संख्या में कम से कम 35 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखें। इसका मतलब है कि 35 प्रतिशत अधिक गांवों में नये पैक्स बनाने होंगे, प्राथमिक डेयरी समितियां स्थापित करनी होंगी और गांव का कोई भी किसान ऐसा न रहे जो डेयरी को दूध न देता हो।सहकारी चीनी क्षेत्र में हमने चीनी, सिरे से इथेनॉल, बगास, ऊर्जा, प्रेसमड, जैविक खाद और सल्फर बनाने तक की पूरी व्यवस्था लागू कर दी है। यह प्रयोग सफल रहा है। इसके लिए भी हमने सहकारी समितियां बना दी हैं। क्लस्टर आधारित सहकारी समितियों के माध्यम से हर डेयरी को निवेश नहीं करना पड़ेगा, लेकिन गन्ने के अंतिम उपयोग तक की पूरी व्यवस्था यह करेगी और चीनी मिलों को मुनाफा भी वापस देगी।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमने गन्ने के अधिक मूल्य भुगतान पर कर राहत दिलाई है और पुराने कर विवादों का समाधान किया है। गन्ने के क्षेत्र में अकेले 46 हजार करोड़ रुपये का किसानों का इनकम टैक्स प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने माफ किया है। श्री शाह ने कहा कि मशीनरी उत्पादन के लिए हमने नेशनल हैवी इंजीनियरिंग कोऑपरेटिव के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कोऑपरेटिव डेयरी मशीनरी, प्राथमिक डेयरी की मशीनरी, गैस उत्पादन मशीनरी और खाद उत्पादन मशीनरी भी बनाएगी और आगे बढ़ती रहेगी। भारत टैक्सी भी बहुत मजबूती से आगे बढ़ रही है। आने वाले दो वर्षों में भारत टैक्सी भारत के 500 से अधिक शहरों में और हर राज्य में उपलब्ध हो जाएगी, जो हमारे साथियों को शोषण से मुक्त कर देगी।

श्री अमित शाह ने कहा लगभग 20 प्रतिशत कृषि ऋण, 35 प्रतिशत उर्वरक वितरण, 31 प्रतिशत चीनी उत्पादन आज सहकारिता के माध्यम से हो रहा है। भारत टैक्सी की तर्ज पर हम यूटिलिटी एग्रीगेटर कोऑपरेटिव को आने वाले दिनों में और विकसित करने वाले हैं। साथ ही, इफ्को टोक्यो के साथ दोनों प्रकार के इंश्योरेंस के प्रयोग को सफल बनाते हुए हम एक सहकारी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी बनाने जा रहे हैं, जो इंश्योरेंस क्षेत्र में भी सहकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाएगी। ये पांच वर्ष सहकारिता के बुनियादी ढांचे को हर पल, हर दिन, हर महीने और हर साल सुदृढ़ करने के रहे हैं। हमारे मंत्रालय ने सभी को साथ लेकर इसमें निरंतर और कड़ी मेहनत की है।

श्री अमित शाह ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता के साथ अब द्वितीय श्रेणी का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। हम सबसे बराबरी के स्तर पर कंधे से कंधा मिलाकर भारत को समृद्ध बनाने की इस महान योजना में पूर्ण रूप से शामिल होंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि इस क्षेत्र का पूरा मुनाफा गौरव के साथ उसी व्यक्ति तक पहुंचे, जिसका उस पर अधिकार है — यानी किसान और पशुपालक तक।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कार्यक्रम की शुरुआत में भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने उनके जैसे करोड़ों कार्यकर्ताओं के जीवन में भारतीयता, भारत माता के प्रति श्रद्धा तथा भारतीय संस्कृति के महत्व को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी अगर नहीं होते तो आज कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होता। डॉ. मुखर्जी ने ही कहा था कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं हो सकते। उन्होंने न केवल इसके लिए आंदोलन की शुरुआत की, बल्कि अपने प्राण भी न्योछावर कर दिए। श्री शाह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का अनुच्छेद 370 हटाने का स्वप्न प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पूरा किया। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी यदि नहीं होते तो असम पाकिस्तान का हिस्सा हो जाता और हमारे पास बचा हुआ पूरा पश्चिम बंगाल भी पाकिस्तान में चला जाता। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के आंदोलन के कारण आज असम और बंगाल आज भारत के गरिमामय हिस्से हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी के 125वें जयंती वर्ष को गांव से लेकर शहर के हर कस्बे तक धूमधाम से मनाया जाएगा। 

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और पहलों का शिलान्यास, लोकार्पण और शुभारंभ किया। इनमें 135 अन्न भंडारण गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण और 47 गोदामों का शिलान्यास, अमूल और NCCF द्वारा सहकार वन का भूमि पूजन, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में BBSSL की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन, NCD 3.0 और जियो-टैग मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ, NDDB के दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल का शुभारंभ, कोऑपरेटिव इनपुट्स एंड सर्विसेज डिलीवरी मल्टी-स्टेट लिमिटेड के अंतर्गत डेयरी पशुओं की उत्पादकता से जुड़ी पहलों का शुभारंभ, कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी-स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन, गोमय सहकारी समिति मल्टी-स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन और NUCFDC की दो प्रमुख पहलों — सहकार CBS, केंद्रीकृत कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म, तथा सहकार सहयोगी, शहरी सहकारी बैंकों के लिए संवादात्मक AI-संचालित प्लेटफॉर्म — का अनावरण शामिल रहा। कार्यक्रम में 50,000 पैक्स के ई-पैक्स में रूपांतरण का कार्य भी संपन्न हुआ, जो जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान बीज प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए BBSSL और ICAR के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर श्री अमित शाह ने डेयरी सहकारी समितियों के लिए आदर्श उप-विधियों और सहकारिता मंत्रालय की पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया।

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