गृह मंत्रालय
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में  26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 के उद्धघाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित किया


आज लॉन्च हुए NCRB-अभिज्ञान, CrPI, ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 और ई-फॉरेंसिक्स 2.0 ऐप्स लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे और समयबद्ध न्याय का माध्यम बनेंगे

FIR से कन्विक्शन तक 3 साल के भीतर न्याय सुनिश्चित करना मोदी सरकार के क्रिमिनल जस्टिस रिफॉर्म्स का प्रमुख उद्देश्य

गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के साथ मिलकर लंबित मामलों को कम करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है

अपराधी कितना भी चतुर हो, कानून और विज्ञान की संयुक्त शक्ति से नहीं बच सकता

NAFIS, CrPI, ई-प्रॉसिक्यूशन और ई-फॉरेंसिक्स सेंटर ने क्रिमिनल जस्टिस चेन को टेक्नोलॉजी से जोड़ा है, अब डेटा को एक्शन योग्य इंटेलिजेंस में बदला जा रहा है

पारंपरिक फोर्स-आधारित पुलिसिंग मॉडल से आगे बढ़कर साइंटिफिक एविडेंस आधारित इन्वेस्टिगेशन अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी माध्यम बन रहा है

AI, मशीन लर्निंग और पैटर्न एनालिसिस के जरिए रिपीट ऑफेंडर्स और अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क को अपराध करने से पहले रोकने का नया फ्रेमवर्क विकसित किया जा रहा है

NCRB, BPRD रिकॉर्ड रखने वाली संस्था से आगे बढ़कर इंटेलिजेंस-ड्रिवन क्राइम प्रिवेंशन संस्था में बदल रही है

अपराध होने के बाद कार्रवाई करने की व्यवस्था से आगे बढ़कर अपराध को पहले ही रोकने वाली प्रेडिक्टिव पुलिसिंग फ्रेमवर्क की तैयारी

1 करोड़ 29 लाख फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, 9 लाख नार्को अपराधियों का डेटा और 3 लाख 65 हजार ह्यूमन ट्रैफिकिंग रिकॉर्ड को AI और मशीन लर्निंग के जरिए एक्शन योग्य इंटेलिजेंस में बदला जाएगा

देश के 17,840 पुलिस थानों तक CCTNS की पहुंच है और 37 करोड़ 68 लाख ऑनलाइन रेकॉर्ड का AI एनालिसिस डेटा अपराधियों का पकड़ने का महत्वपूर्ण टूल बनेगा

प्रविष्टि तिथि: 19 JUN 2026 5:43PM by PIB Delhi

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में  26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रुप में में संबोधित किया। गृह मंत्री ने NCRB-अभिज्ञान, CrPI, ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 और ई-फॉरेंसिक्स 2.0 ऐप्स का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में निदेशक, आसूचना ब्यूरो (IB), निदेशक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और निदेशक, केन्द्रीय फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (CFSL) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।  

अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वर्तमान समय में हमारा देश आपराधिक न्याय प्रणाली के ट्रांसफॉर्मेशन के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है। श्री शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि अपराधिक न्याय प्रणाली को संविधान द्वारा देश के नागरिकों को दिए गए अधिकारों को प्राप्त करने का एक प्रभावी और उपयुक्त साधन बनाया जाए।

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श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने अगस्त 2019 से आपराधिक कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन का एक व्यापक अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास आपराधिक न्याय व्यवस्था को समयानुकूल बनाने के साथ ही आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उसका महत्वपूर्ण अंग बनाना है। FIR से कन्विक्शन तक 3 साल के भीतर न्याय सुनिश्चित करना मोदी सरकार के क्रिमिनल जस्टिस रिफॉर्म्स का प्रमुख उद्देश्य है। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि हम तीन वर्ष के अंदर न्याय सुनिश्चित करने की एक मजबूत व्यवस्था स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों की यात्रा में हम एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को पूरा करने के अत्यंत निकट पहुंच गए हैं और उसे पूरा करने में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। इसमें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उन्होंने देश के 24 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और गृह मंत्रियों के साथ विस्तृत बैठकें की हैं। इन बैठकों में गृह मंत्रालय के साथ-साथ पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) और NCRB बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि आज NCRB सूचना संग्रह से लेकर अपराध सिद्ध करने तक की पूरी यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग बन चुका है।  उन्होंने कहा कि NCRB ने एक मां की भांति सभी राज्यों की पुलिस को उनकी क्षमता निर्माण (Capacity Building) के लिए न केवल प्रेरित किया बल्कि उन्हें प्रशिक्षित भी किया है। श्री शाह ने कहा कि इसी प्रयास का परिणाम है कि नवीन न्याय संहिताएं के लागू होने के बाद देश के हर थाने में नए कानून सुचारू रूप से कार्यान्वित हो रहे हैं। यह हमारी एक बहुत बड़ी साझा उपलब्धि है।

श्री अमित शाह ने कहा अपराध के विरुद्ध लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार वैज्ञानिक साक्ष्य है। यदि अपराध स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्यों को शुरुआत से ही संरक्षित किया जाए तो अपराधी को सजा दिलाने में इससे बेहतर साधन और कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि फिंगरप्रिंट वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने का अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है। गृह मंत्री ने कहा कि फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड का संग्रहण और प्रभावी उपयोग इसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा कि National Automated Fingerprint Identification System (NAFIS)  इस पूरी व्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है। NAFIS के माध्यम से बहुत सारे जटिल से जटिल केसों को हल करने में बड़ी मदद मिली है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि NAFIS का उपयोग केवल अपराधियों को ढूंढने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। NAFIS तभी सार्थक और सफल हो सकता है जब हर अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंटस को NAFIS डेटाबेस में अपलोड करके उसे निरंतर समृद्ध किया जाए। श्री शाह ने कहा, NAFIS एक दो-तरफा प्रणाली है, अपराध सिद्ध करने में अत्यंत उपयोगी होने के साथ ही इसके लिए डेटा का निरंतर सृजन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसलिए सर्च करने के साथ-साथ अपराध स्थल से एकत्रित फिंगरप्रिंट को डेटाबेस में अपलोड कर उसे समृद्ध करने को प्रशिक्षण कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाना होगा।

गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, अपराधी कितना भी चतुर हो, वह कानून और विज्ञान की संयुक्त शक्ति से बच नहीं सकता। वैज्ञानिक जांच, समयबद्ध अभियोजन और एकीकृत आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रभावी उपयोग के माध्यम से हम अपराध नियंत्रण सुनिश्चित करेंगे। श्री शाह ने कहा, केवल अपराधी को पकड़ने से अपराध नियंत्रित नहीं होता। जब अपराध करने के बाद निश्चित रूप से दंड मिलने का भाव समाज में स्थापित हो जाएगा, तभी अपराधों को रोकने में वास्तविक सफलता मिलेगी और बहुत बड़ी संख्या में लोग अपराधी बनने से खुद ही रुक जाएंगे ।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अपराधी को पकड़ने के साथ-साथ अपराध को समयबद्ध तरीके से सिद्ध करने पर हमारा निरंतर जोर रहना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारा थ्रस्ट केवल अपराधी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराध को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना और समय पर न्याय सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

गृह मंत्री ने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पूरे देश में पुलिस, जेल प्रशासन, अभियोजन एजेंसियां, अदालतें और फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं — आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी अंगों ने इन सुधारों को न केवल स्वीकार किया है, बल्कि उन्हें आगे भी बढ़ाया है। श्री शाह ने कहा कि अब हमारा दायित्व ही कि हम इन सुधारों की सफलताओं को आम जनता तक पहुंचाएं। 

श्री अमित शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें 90 दिनों के अंदर अपराधियों को उम्र कैद तक की सजा दिलाई गई है। गृह मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण केवल ऐप के उपयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ऐप का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों का सृजन कर इसमें चार्जशीट तक की प्रक्रिया को शामिल करते हुए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि नए कानूनों में न्यायपालिका और अभियोजन के कार्य को सरल बनाने के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। पुरानी दकियानूसी प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित गतिशील प्रणाली में बदला गया है, जिससे अभियोजन की समय-सीमा को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक और न्यायपालिका हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अभिन्न अंग नहीं बन जाते, तब तक वांछित परिणाम प्राप्त नहीं सकते।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से जुड़े सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से आग्रह किया कि इन महत्वपूर्ण आयामों की ट्रेनिंग के लिए प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन निश्चित रूप से आवंटित करें और इसे कम से कम एक वर्ष तक जारी रखें। गृह मंत्री ने कहा कि सूचना को इंटेलिजेंस में बदलने की कवायद अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी व्यवस्था सूचनाओं के भंडार को इंटेलिजेंस में बदलकर अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि NAFIS हो या CRPI — डेटाबेस की गुणवत्ता और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों की है। उन्होंने कहा कि किसी अपराधी के डीएनए सैंपल की सुरक्षा के साथ ही उसका किसी दूसरे अपराध की जांच में भी उपयोग किया जा सकता है। इसलिए सैंपल का सटीकता से संग्रहण और भंडारण दोनों सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। श्री शाह ने कहा कि इसी प्रकार NAFIS डेटा का संग्रहण, उसकी सुरक्षा और एप्लीकेशन तीनों काम भी बड़ी सटीकता से किये जाने चाहिए।

श्री अमित शाह ने सभी राज्यों से आग्रह किया कि डेटाबेस की गुणवत्ता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा, डेटा का कपबोर्ड किसी का भला नहीं कर सकता, वह बोझ बन जाता है। डेटा को इंटेलिजेंस में बदलने पर ही उसका वास्तविक लाभ मिलता है। गृह मंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य में डेटा जनरेशन के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की सहायता से अपराध पैटर्न का विश्लेषण करने वाली एक विशेष टीम बनाई जाए। इन टीमों का कार्य रिपीट ऑफेंडर्स की पहचान करना और उनकी प्रोफाइलिंग करना भी होना चाहिए।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि कुछ अपराधी विभिन्न राज्यों के बीच न्यायिक क्षेत्राधिकार का फायदा उठाते हैं। ऐसे अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय अपराधियों की पहचान के लिए डेटाबेस का उपयोग किया जाना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि  डेटा को जस का तस रखने से कोई लाभ नहीं होगा, हमें डेटा को इंटेलिजेंस में बदलना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की टीमें बनानी होंगी और हमारे सॉफ्टवेयर को AI व मशीन लर्निंग के माध्यम से सटीक और सूक्ष्म विश्लेषण करने में सक्षम बनाना होगा। गृह मंत्री ने कहा कि डेटाबेस की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुरक्षा भंग होने पर स्पष्ट जवाबदेही तय करने, साइबर सुरक्षा, एक्सेस लॉग, SOP आधारित उपयोग, थर्ड पार्टी ऑडिट तथा दुरुपयोग पर दंड की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाना होगा। चार्जशीट का आकार छोटा रखा जाए और केवल उपयोगी साक्ष्यों को ही शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में दिए गए प्रावधानों का उपयोग कर समयबद्ध अभियोजन सुनिश्चित करना चाहिए। गृह मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षण मॉड्यूल में चार्जशीट को छोटा करने की कला, वैज्ञानिक साक्ष्यों का संग्रहण, संरक्षण तथा अपलोड करने की सटीक प्रक्रिया शामिल की जाए। उन्होंने कहा कि अनुभवी अभियोजकों (Prosecutors) द्वारा ये मॉड्यूल तैयार किए जाएं। श्री शाह ने कहा कि यदि फिंगरप्रिंट, टेलीफोन टावर, फेशियल रिकग्निशन, आंख एवं डीएनए का मिलान हो जाने के बाद भी 250 साक्ष्य लेकर कोर्ट जाएंगे, तो प्रौद्योगिकी का कोई लाभ नहीं होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सभी राज्य सरकारों की पुलिस के प्रयास से आज शत प्रतिशत यानि 17840 पुलिस स्टेशन में Crime and Criminal Tracking Network and Systems (CCTNS) पहुंचाने में हम सफल हो गए हैं और आज हमारे पास 37 करोड़ 68 लाख एफआईआर सहित लेगेसी डेटा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि 22000 अदालतें ई कोर्ट में जुड़ चुकी है और इनके लेगेसी प्रोसीक्यूशन को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया भी चल रही है। आज हमारे पास ई प्रिजन में 2 करोड़ 29 लाख कैदियों का डेटा उपलब्ध है। ई फॉरेंसिक में 34 लाख 48 हजार केस का फॉरेंसिक का डेटा हमारे पास उपलब्ध है। साथ ही Cri-MAC का 43 लाख 16 हजार का अलर्ट डेटा भी है। श्री शाह ने कहा कि ये सारा डाटा किसी कमरे में पड़े एक कपबोर्ड की तरह है। जब तक इस डेटा का आधुनिक तकनीकों और AI के माध्यम से विश्लेषण कर ऐक्शनेबल उपयोग में नहीं ले आते हैं तब तक यह हमारे पास बोझ के समान है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है और इसमें बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा गया है।

श्री अमित शाह ने कहा, वर्तमान में हमारे पास 1 करोड़ 29 लाख फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, लगभग 9 लाख 91 हजार नारकोटिक अपराधियों का रिकॉर्ड, 3 लाख 65 हजार मानव तस्करी के मामलों का रिकॉर्ड और जेल डेटाबेस उपलब्ध है। ये सभी मिलकर एक बहुत बड़ी संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता है कि पूरी आपराधिक न्याय व्यवस्था को इस शक्ति से परिचित कराया जाए और इस डेटा को वास्तविक ताकत में परिवर्तित किया जाए।

गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले पांच वर्षों तक आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि डेटा को एक्शनेबल रूप दिया जाए, विभिन्न डेटाबेस को एक-दूसरे से जोड़ा जाए, डेटा एनालिसिस की मजबूत पद्धतियां विकसित की जाएं तथा युवाओं को जोड़कर क्राइम कंट्रोल के अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि NCRB और BPRD रिकॉर्ड रखने वाली संस्था से आगे बढ़कर इंटेलिजेंस-ड्रिवन क्राइम प्रिवेंशन संस्था में बदल रही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि चार वर्ष पहले NCRB में मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो की शुरुआत की गई थी। आज के सम्मेलन के बाद यह ब्यूरो डेटा के उपयोग की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इसके माध्यम से हम न केवल अपराधियों को सजा दिलाने में सफल होंगे, बल्कि अपराध घटित होने से पहले ही उसे रोकने में भी सक्षम होंगे। उन्होंने कहा, अपराध नियंत्रण के दो आयाम हैं — अपराध करने के बाद अपराधी को पकड़कर न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर सजा सुनिश्चित करना, जिससे समाज में डर का माहौल बने, तथा दूसरा — अपराध होने से पहले ही उसे रोकना। अब हमें क्राइम पैटर्न, रिपीट ऑफेंडर्स तथा अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय अपराधिक नेटवर्क को पहचानकर रोकने पर विशेष ध्यान देना होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नई आपराधिक न्याय संहिताओं का उद्देश्य स्पष्ट है कि देश के किसी भी कोने में अपराध दर्ज होने पर तीन वर्ष के अंदर अपराधी को दोषी सिद्ध कर सुप्रीम कोर्ट तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के साथ मिलकर लंबित मामलों को कम करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है। श्री शाह ने कहा कि सायंकालीन अदालतों की स्थापना और हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित आपराधिक मामलों के निपटान के लिए नई व्यवस्था पर भी काम चल रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि देरी किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। हमें वैज्ञानिक आधार पर चालान तैयार करने होंगे, अभियोजन एजेंसियों का अनुसरण करना होगा और अदालतों का पूर्ण सहयोग करना होगा।

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श्री अमित शाह ने कहा कि NCRB को उसी विजन के साथ कार्य करना चाहिए जिस उद्देश्य से इसे स्थापित किया गया था। उन्होंने BPR&D और NCRB की सराहना करते हुए कहा कि इनके बिना देश में अपराध नियंत्रण संभव नहीं है। NCRB के अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके पुरुषार्थ के लिए बधाई देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में NCRB की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। श्री शाह ने फिंगरप्रिंट ब्यूरो को भी आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए अत्यंत उपयोगी उपकरण बताया। उन्होंने कहा कि आज की कॉफ्रेंस में डेटा संग्रह की शुद्धतम पद्धति, अपराध स्थल से साक्ष्यों का संग्रहण एवं संरक्षण, डेटा की सुरक्षा और पुलिस थानों से NAFIS में त्वरित खोज जैसे व्यावहारिक विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री के द्वारा आज इन चार महत्वपूर्ण एप्लीकेशन का शुभारंभ हुआ है

  1. NCRB-अभिज्ञान
  1. CrPI एप्लीकेशन
  1. ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0
  1. ई-फ़ॉरेंसिक्स 2.0

NCRB-अभिज्ञान - यह एक मोबाइल एप्लिकेशन है जो ऑन-फील्ड पुलिस को सर्टिफाइड फिंगरप्रिंट स्कैनर की सहायता से किसी भी स्थान से संदिग्ध व्यक्ति के फिंगरप्रिंट को नेशनल डेटाबेस में सर्च करने की सुविधा देता है। यह फील्ड पुलिसिंग को अधिक सक्षम और त्वरित बनाता है।

CrPI एप्लीकेशन - इस सिस्टम में फेस, आइरिस और DNA मैचिंग का एकीकरण किया जा रहा है। यह मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक तकनीक पहचान की विश्वसनीयता बढ़ाती है, मैनुअल एरर घटाती है और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाती है। इसका प्रमुख उपयोग रिपीट ऑफेंडर्स और CCTV-आधारित पहचान में है। अब तक 2,190 CrPI यूनिट्स वितरित और 5.53 लाख से अधिक एनरोलमेंट हुए हैं।

ई-फ़ॉरेंसिक्स 2.0 - यह देश की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और जांच एजेंसियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है। इसकी प्रमुख सुविधाओं में फोरेंसिक परीक्षण हेतु केस प्राप्ति व डिजिटल ट्रैकिंग, नमूनों का पंजीकरण, लैब वर्कफ़्लो, रिपोर्ट निर्माण, रिपोर्ट की डिजिटल उपलब्धता और चेन ऑफ कस्टडी का सुदृढ़ीकरण शामिल है।

ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 - यह प्लेटफॉर्म पुलिस, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच डिजिटल समन्वय स्थापित करता है, ताकि अपराधी की पहचान के बाद उसे समयबद्ध सजा भी सुनिश्चित हो सके।

ये चारों ऐप्स मिलकर क्या करेंगे:-

NAFIS और CrPI अपराधी की पहचान करते हैं à CCTNS और Cri-MAC जांच को जोड़ते हैं à

ई-फ़ॉरेंसिक्स साक्ष्य को मजबूत करता है à ई-प्रॉसिक्यूशन दोषसिद्धि तक पहुँचाता है।

यानी ये पुलिसिंग, फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन, प्रॉसिक्यूशन मैनेजमेंट और क्रिमिनल आइडेंटिफिकेशन को एक इंटीग्रेटेड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) की संपूर्ण डिजिटल श्रृंखला में पिरोते हैं, जिससे डेटा को निर्णय में और फिंगरप्रिंट को न्याय में बदला जा सके।

 

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RK/RR/PR/PS


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