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दूरसंचार विभाग (डीओटी)की तकनीकी शाखा, दूरसंचार अभियांत्रिकी केन्द्र ने उन्नत उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियों और सेवा गुणवत्ता मानकीकरण पर कार्यशाला का आयोजन किया


कार्यशाला में सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के  प्रमुख हितधारकों ने भारत के भविष्य के उपग्रह पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा की

यह चर्चा स्पेक्ट्रम उपयोग और उपग्रह-सक्षम 5जी/6जी नेटवर्क पर केंद्रित रही

प्रविष्टि तिथि: 18 JUN 2026 4:46PM by PIB Delhi

दूरसंचार विभाग (डीओटी) के तकनीकी शाखा दूरसंचार अभियांत्रिकी केन्द्र (टीईसी) ने आज नई दिल्ली स्थित टीईसी मुख्यालय में "उन्नत उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियां और सेवा गुणवत्ता मानकीकरण" विषय पर एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

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प्रमुख प्रतिभागियों में इन-स्पेस (IN-SPACe), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए), आईआईटी दिल्ली, और एनजीएसओ (एनजीएसओ- गैर-भूस्थिर कक्षा) एवं जीएसओ (जीएसओ - भूस्थिर कक्षा) उपग्रह ऑपरेटर जैसे अमेज़न कुइपर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस लिमिटेड, वनवेब इंडिया कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, नेल्को लिमिटेड, ह्यूजेस कम्युनिकेशंस इंडिया और अन्य के प्रतिनिधि शामिल थे।

इस कार्यक्रम ने एक बड़े सहयोगात्मक मंच के रूप में कार्य किया, जिसने सरकारी निकायों, नियामक प्राधिकरणों, शिक्षा जगत, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और व्यापक उपग्रह पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाने का काम किया।

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कार्यशाला के एजेंडे के केंद्र में गैर-स्थलीय नेटवर्क (एनटीएन), उपग्रह-एकीकृत 5G और 6G प्रणालियां, कुशल स्पेक्ट्रम प्रबंधन, तथा उपग्रह और स्थलीय (टेरेस्ट्रियल) नेटवर्क के बढ़ते अभिसरण (कन्वर्जेंस) पर गहन चर्चा हुई।

अमेज़न कुइपर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस लिमिटेड, वनवेब इंडिया कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड और स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड सहित प्रमुख एनजीएसओ (एनजीएसओ) उपग्रह ऑपरेटरों ने विकसित होते उपग्रह ब्रॉडबैंड परिदृश्य, तैनाती की चुनौतियों और कनेक्टिविटी के विस्तार के उद्देश्य से किए जा रहे तकनीकी नवाचारों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल थे:

  • उपग्रह संचार में उभरते रुझान
  • उपग्रह प्रणालियों का स्थलीय 5जी और 6जी नेटवर्क के साथ एकीकरण
  • स्पेक्ट्रम साझाकरण मॉडल और इंटरऑपरेबिलिटी ढांचा
  • उपग्रह ब्रॉडबैंड में वैश्विक विकास और तैनाती के अनुभव
  • सेवा गुणवत्ता (क्यूओएस) और उपयोगकर्ता अनुभव गुणवत्ता (क्यूओई) के दृष्टिकोण
  • उपग्रह-सक्षम कनेक्टिविटी में अवसर और चुनौतियां

टीईसी ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाने, मानकों को संरेखित करने और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए हितधारकों के साथ ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से नियमित संवाद बेहद जरूरी है।

कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं से भारत के डिजिटल संचार ढांचे के विकास, भविष्य के सेवा गुणवत्ता मानकों के निर्धारण तथा एक सुदृढ़ और समावेशी उपग्रह संचार पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

टीईसी के बारे में

दूरसंचार अभियांत्रिकी केन्द्र (टीईसी) भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) की तकनीकी शाखा है। टीईसी भारत में दूरसंचार उपकरणों और नेटवर्क के लिए तकनीकी मानकों, विशिष्टताओं और अनुरूपता मूल्यांकन आवश्यकताओं का निर्धारण करता है, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी, गुणवत्ता और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूपता सुनिश्चित हो सके।

टीईसी आईटीयू-टी और आईटीयू-आर जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है, और वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय कार्य समूहों (नेशनल वर्किंग ग्रुप्स) का समन्वय करता है।

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