विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

हिमालय में वायु गुणवत्ता संबंधी जोखिमों पर नज़र रखने वाले शोधकर्ताओं ने स्वच्छ वायु से प्रदूषित वायु की ओर बढते बदलाव की पहचान की

प्रविष्टि तिथि: 17 JUN 2026 4:41PM by PIB Delhi

शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन से पता चला है कि हिमालय के दूरस्थ और अब तक अपेक्षाकृत स्वच्छ माने जाने वाले क्षेत्र भी अब वायु प्रदूषण से अछूते नहीं रहे हैं। अध्ययन में वायु गुणवत्ता पर इसके मापनीय प्रभाव तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की संभावना सामने आई है।

गैर-मीथेन हाइड्रोकार्बन (एनएमएचसी) ईंधन के उपयोग, वाहनों और अन्य मानवजनित गतिविधियों से उत्सर्जित होने वाली प्रतिक्रियाशील गैसों का एक समूह है, जो ओजोन और द्वितीयक एरोसोल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका पता लगाना और क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता पर इनके प्रभावों तथा मानव स्वास्थ्य पर संभावित असर का मूल्यांकन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुनस्यारी ऐसा विशिष्ट वातावरण प्रदान करता है, जहां पर्यटन सहित स्थानीय मानवजनित गतिविधियों तथा क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषकों के परिवहन का  गैर-मीथेन हाइड्रोकार्बनों (एनएमएचसी)  के वितरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने वर्ष 2022-2023 के दौरान पूरे एक वर्ष तक हिमालयी ऊंचाई पर स्थित पर्यटन स्थल मुनस्यारी में गैर-मीथेन हाइड्रोकार्बन (एनएमएचसी) का मापन किया।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट मौसमी प्रवृत्तियां देखीं। सर्दियों और मानसून के दौरान एनएमएचसी का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा, जबकि वसंत और शरद ऋतु में इसकी सांद्रता उल्लेखनीय रूप से अधिक पाई गई। अध्ययन से यह भी पता चला कि एलपीजी और डीजल जैसे ईंधनों का उपयोग, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन तथा स्थानीय निर्माण गतिविधियां इस दूरस्थ क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख स्रोत हैं। विशेष रूप से बेंजीन और ज़ाइलीन जैसे सुगंधित हाइड्रोकार्बनों का द्वितीयक प्रदूषकों, विशेषकर ओजोन, के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान पाया गया। क्षोभमंडल में ओजोन जलवायु और मानव स्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

चित्र 1. (बाएं) हिमालय में नमूना स्थल की स्थिति और मौसम विज्ञान तथा (दाएं) एक उच्च ऊंचाई वाले ग्रामीण स्थल (मुनस्यारी) पर देखे गए एनएमएचसी के द्वितीयक कार्बनिक एरोसोल (एसओए) निर्माण क्षमता में मौसमी बदलाव

क्षेत्रीय तुलना से पता चलता है कि मुनस्यारी में एनएमएचसी का स्तर हिमालय के एक अन्य उच्च ऊंचाई वाले स्थल नैनीताल की तुलना में अधिक है, हालांकि यह निकटवर्ती शहरी क्षेत्रों, जैसे हल्द्वानी और दिल्लीमें दर्ज स्तरों से अभी भी कम है।

इन निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि मानवजनित प्रदूषण अब हिमालय के दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है। यद्यपि वर्तमान में तत्कालिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम हैं, लेकिन बेंजीन के दीर्घकालिक संपर्क से कैंसर का जोखिम निर्धारित सुरक्षा सीमाओं से अधिक पाया गया है। यह अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, इसलिए इन संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों के लिए निरंतर निगरानी तथा लक्षित प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1007/s11356-026-37694-z

***

पीके/केसी/आईएम/जीआरएस


(रिलीज़ आईडी: 2274186) आगंतुक पटल : 86
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Tamil