संस्कृति मंत्रालय
हिमाचल रणसिंघा, हिमाचल काष्ठ नक्काशी शिल्प और हिमाचल हस्तनिर्मित गलीचा को मिला जीआई टैग
प्रविष्टि तिथि:
15 JUN 2026 4:14PM by PIB Shimla
शिमला: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय, यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता व्यक्त करता है कि हिमाचल प्रदेश के तीन पारंपरिक उत्पादों — हिमाचल रणसिंघा, हिमाचल काष्ठ नक्काशी शिल्प और हिमाचल हस्तनिर्मित गलीचा — को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पादों के रूप में पंजीकृत किया गया है। यह मान्यता हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इन जीआई पंजीकरणों को नाबार्ड एचपीआरओ द्वारा स्थानीय उत्पादक समूहों, कारीगर समूहों और अन्य हितधारकों के सहयोग से सुगम बनाया गया। इस पहल का उद्देश्य इन पारंपरिक उत्पादों की विशिष्ट पहचान की रक्षा करना, उनकी बाजार पहचान को सुदृढ़ करना तथा उनसे जुड़े कारीगरों और समुदायों को बेहतर दृश्यता एवं मूल्य प्राप्ति का लाभ सुनिश्चित करना है।
हिमाचल रणसिंघा एक पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो हिमाचल प्रदेश के सांस्कृतिक, धार्मिक और अनुष्ठानिक जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। हिमाचल काष्ठ नक्काशी शिल्प अपनी जटिल डिजाइनों, रूपांकनों और पारंपरिक नक्काशी तकनीकों के माध्यम से राज्य की समृद्ध कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करता है। हिमाचल हस्तनिर्मित गलीचा राज्य की विशिष्ट हस्तनिर्मित वस्त्र परंपरा को दर्शाता है और कारीगर परिवारों तथा बुनकर समुदायों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
जीआई टैग से इन पारंपरिक कौशलों के संरक्षण, उत्पादों के नामों के दुरुपयोग और नकल की रोकथाम तथा वास्तविक हिमाचली उत्पादों की मजबूत पहचान बनाने में सहायता मिलेगी। यह बेहतर ब्रांडिंग, बाजार पहुंच और उपभोक्ता पहचान को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे कारीगरों और उत्पादक समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों में वृद्धि होगी।
नाबार्ड एचपीआरओ ने जीआई आवेदन प्रक्रिया में हितधारकों के समन्वय, पारंपरिक ज्ञान और उत्पादन प्रक्रियाओं के दस्तावेजीकरण, संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय तथा सफल पंजीकरण के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग की सुविधा प्रदान की। इन उत्पादों को जीआई उत्पादों के रूप में मिली मान्यता स्थानीय विरासत के संरक्षण और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने में सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित करती है।
इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ. विवेक पठानियां , मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय, ने कहा कि इन तीन हिमाचली उत्पादों का जीआई पंजीकरण राज्य की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने और पारंपरिक कारीगरों के लिए स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड उत्पादक समूहों और कारीगर समुदायों को मूल्य श्रृंखला विकास, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क, क्षमता निर्माण और जीआई पंजीकरण के उपरांत सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. पठानियां ने आगे श्री कुशल दीप, उप महाप्रबंधक, और श्री हिमांशु बालियान, सहायक प्रबंधक, नाबार्ड एचपीआरओ के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने इन उत्पादों के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समन्वय, फॉलो-अप और हितधारक सहयोग में उनका योगदान इस उपलब्धि को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण रहा।
यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक शिल्प और विरासत उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर और उससे आगे बढ़ावा देने में और अधिक गति प्रदान करेगी। नाबार्ड एचपीआरओ जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के लिए जागरूकता सृजन, अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकरण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, कौशल विकास और बाजार संवर्धन जैसे पंजीकरण-उपरांत हस्तक्षेपों के लिए हितधारकों के साथ निकट समन्वय में कार्य करता रहेगा।
(रिलीज़ आईडी: 2273021)
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