मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएच-एंड-डी) के मत्स्य पालन विभाग के केन्द्रीय सचिव ने दौरा किया


आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित एमपीईडीए-आरसीसीए ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर तथा आईसीएआर-सीएमएफआरआई समुद्री मत्स्य ब्रूडस्टॉक एवं हैचरी

प्रविष्टि तिथि: 04 JUN 2026 10:29PM by PIB Delhi

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएच-एंड-डी) के मत्स्य पालन विभाग के केन्द्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित एमपीईडीए-आरसीसीए के पेनियस मोनोडॉन ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर तथा आईसीएआर-सीएमएफआरआई के समुद्री मत्स्य ब्रूडस्टॉक एवं हैचरी का दौरा किया। उन्होंने जलीय कृषि क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण ब्रूडस्टॉक के विकास तथा उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज के उत्पादन से संबंधित पहलों की समीक्षा की। दौरे के दौरान डॉ. लिखी ने वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, किसानों और कर्मचारियों के साथ बात-चीत की तथा चल रहे अनुसंधान, ब्रूडस्टॉक विकास पहलों और भारत के झींगा जलीय कृषि क्षेत्र के विकास को समर्थन देने वाली परिचालन गतिविधियों की जानकारी ली। बातचीत के दौरान, कमजोर बाजार संपर्क, उत्पादन सामग्री एवं बिजली की उच्च लागत तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता जैसी चुनौतियों की पहचान की गई। केन्द्रीय सचिव ने मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) तथा राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करें।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001P22U.jpg

स्थापित ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर (बीएमसी) से भारत के झींगा जलीय कृषि क्षेत्र को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह केन्द्र उच्च गुणवत्ता वाले, खास बीमारियों से मुक्त (एसपीएफ) पेनियस मोनोडॉन (ब्लैक टाइगर झींगा) ब्रूडस्टॉक के उत्पादन और आपूर्ति को सक्षम बनाएगा। यह पहल आयातित ब्रूडस्टॉक पर निर्भरता कम करने, बेहतर जैव-सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा झींगा पालन में उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

वर्ष 2025–26 के दौरान भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात ने ₹73,890.46 करोड़(8.45 अरब अमेरिकी डॉलर) के रिकॉर्ड स्तर को प्राप्त किया है। इस अवधि में 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया, जो भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की वैश्विक मांग में निरंतर वृद्धि और क्षेत्र के स्थिर विकास को दर्शाता है। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) देश से समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और ब्रूडस्टॉक के विकास, प्रमाणन एवं अनुरेखण प्रणालियों, अवसंरचना विकास तथा हितधारकों के क्षमता निर्माण के माध्यम से इस क्षेत्र को सहयोग प्रदान करता है। हैचरी विकास, आधुनिक जलीय कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने संबंधी एमपीईडीए की पहलों ने भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात को बढ़ाने, मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने और भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

यह दौरा जलीय कृषि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण ब्रूडस्टॉक और मत्स्य बीज उत्पादन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रमुख पहलों को रणनीतिक दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह अत्याधुनिक सुविधाओं का जमीनी स्तर पर मूल्यांकन, प्रजातियों के विविधीकरण में प्रगति की समीक्षा और क्षेत्र-स्तरीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए हितधारकों के साथ सीधे जुड़ाव को सक्षम बनाता है। यह यात्रा मत्स्य पालन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा घरेलू मत्स्य उत्पादक और समुद्री खाद्य निर्यातक राज्य है, जिसका देश के जलीय कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में राज्य का कुल जलीय कृषि उत्पादन 55.39 लाख टन रहा। विस्तृत समुद्री तटरेखा, विकसित जलीय कृषि अवसंरचना तथा प्रसंस्करण एवं निर्यात इकाइयों की मजबूत उपस्थिति के कारण यह राज्य समुद्री एवं जलीय कृषि उत्पादों के निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। राज्य को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत पर्याप्त सहायता प्राप्त हुई है, जिसके तहत ₹2,324.17 करोड़ के कुल निवेश को स्वीकृति प्रदान की गई है। पीएमएमएसवाई के अंतर्गत मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए आंध्र प्रदेश ने बुनियादी ढ़ांचा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल किया है। विशाखापत्तनम (2), विजयनगरम, काकीनाडा, तिरुपति और अनकापल्ली में कुल ₹126.91 करोड़ की लागत से छह आधुनिक एकीकृत मत्स्य अवतरण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे मत्स्य अवतरण एवं प्रबंधन सुविधाओं में सुधार होगा। इसके अतिरिक्त, पुदिमडाका, बुडगतलापालेम और कोठापटनम में कुल ₹1,137.20 करोड़ के निवेश से तीन मत्स्य बंदरगाहों का विकास किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य समुद्री अवसंरचना और परिचालन दक्षता को मजबूती प्रदान करना है। साथ ही, बापटला में ₹88.08 करोड़ की लागत से एक एकीकृत एक्वा पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, इन पहलों के अंतर्गत राज्य में ₹1,352.19 करोड़ का संचयी निवेश किया जा रहा है, जो मत्स्य अवसंरचना के आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए केंद्रित प्रयासों को दर्शाता है। इसके अलावा, मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) के अंतर्गत राज्य में 9 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनमें कुल ₹259.28 करोड़ का निवेश शामिल है। भारत सरकार ने पीएमएमएसवाई के माध्यम से आंध्र प्रदेश में 4 लाख से अधिक लाभार्थियों की आजीविका में भी मदद किया है, जिससे मत्स्य क्षेत्र के समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा मिला है।

विशाखापत्तनम में आईसीएआर-सीएमएपआरआई का क्षेत्रीय केंद्र समुद्री मछली पालन से जुड़े अनुसंधान और विस्तार का एक प्रमुख केंद्र है। यह केंद्र संसाधनों का आकलन, समुद्री जल में खेती, जैव-विविधता संरक्षण और मछली पालन के विकास जैसे कामों में लगा हुआ है। यहां आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जैसे कि समुद्री फिनफिश हैचरी, केज फार्मिंग सिस्टम, रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर यूनिट, लाइव फीड लैब और अनुसंधान पोत सहायता की सुविधा। यह केंद्र व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री प्रजातियों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले ब्रूडस्टॉक और बीज उत्पादन की तकनीकें विकसित करने पर ध्यान देता है। इसकी गतिविधियों में प्रजनन और हैचरी के तरीकों को मानक बनाना, टिकाऊ एक्वाकल्चर को बढ़ावा देना, स्टॉक का आकलन, इकोसिस्टम-आधारित मछली पालन प्रबंधन और किसानों की क्षमता बढ़ाना शामिल है। इस तरह यह देश में एक मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री खेती के विकास में सहायता प्रदान करता है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान भारत का समुद्री उत्पादों का निर्यात ₹73,890.46 करोड़(8.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। निर्यात की मात्रा 19.72 लाख मीट्रिक टन रही है, जो भारतीय समुद्री भोजन की बढ़ती वैश्विक मांग और लगातार हो रही बढ़ोतरी को दर्शाता है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत एमपीईडीए ने इस विकास में अहम भूमिका निभाई है। इसने गुणवत्तापूर्ण बीज और ब्रूडस्टॉक सहायता, सर्टिफिकेशन और ट्रेसेबिलिटी सिस्टम, अवसंरचना विकसित करने और पूरी मूल्य श्रृंखला में क्षमता निर्माण के निर्यात-उन्मुख विकास को बढ़ावा दिया है। इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, विशाखापत्तनम में आईसीएआर-सीएमएफआरआई का क्षेत्रीय केन्द्र समुद्री मत्स्य पालन, समुद्री खेती और जैव विविधता संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक प्रमुख अनुसंधान और विस्तार केंद्र के रूप में काम कर रहा है। मरीन फिनफिश हैचरी, केज फार्मिंग प्रणाली और लाइव फ़ीड प्रयोगशालाओं जैसी आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह केंद्र गुणवत्तापूर्ण ब्रूडस्टॉक और बीज उत्पादन के लिए तकनीकें विकसित करता है और मानकीकृत करता है। साथ ही, यह सतत एक्वाकल्चर को बढ़ावा देता है और किसानों का सहयोग प्रदान करता है, जिससे एक मजबूत, उच्च-गुणवत्ता वाले और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री क्षेत्र की नींव मजबूत होती है।

***

पीके/केसी/पीकेपी


(रिलीज़ आईडी: 2269172) आगंतुक पटल : 122
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English