खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग संयुक्त सचिव ने पीएमएफएमई योजना पर मीडिया से बातचीत में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में हासिल उपलब्धियों का उल्लेख किया

प्रविष्टि तिथि: 22 MAY 2026 5:29PM by PIB Delhi

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री देवेश देवल ने नई दिल्ली के पंचशील भवन में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के कार्यान्वयन और उपलब्धियों पर मीडिया से बातचीत की। बातचीत में उद्यमिता, ग्रामीण आजीविका, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के बाजार एकीकरण पर योजना के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया गया।

केंद्र सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तौर पर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए पीएमएफएमई योजना आरंभ की थी। योजना का उद्देश्य भारत के असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करना था जो देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लगभग 25 लाख खाद्य प्रसंस्करण उद्यम शामिल हैं जो अपंजीकृत और अनौपचारिक हैं। इस क्षेत्र को पहले ऋण, आधुनिक प्रौद्योगिकी, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों और संगठित बाजार पहुंच से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ता था। खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का उन्नयन अपशिष्ट में कमी लाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। पर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए समर्पित संस्थागत समर्थन सीमित रहा है। इसी को देखते हुए इस केंद्र प्रायोजित योजना को विशेष रूप से सूक्ष्म उद्यमों की चुनौतियों का समाधान करते हुए, समूहों और सहकारी समितियों की क्षमता का लाभ उठाकर इस क्षेत्र के उन्नयन, औपचारिककरण और सतत विकास को गति प्रदान करने के लिए तैयार किया गया। केंद्र प्रायोजित योजना पीएमएफएमई को 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान कार्यान्वयन के लिए अनुमोदित किया गया था जिसे सितंबर 2026 तक विस्तारित किया गया है।

यह योजना एक जिला एक उत्पाद - ओडीओपी दृष्टिकोण को क्रियान्वित करती है , जिससे खरीद , साझा सेवाओं और बाजार संपर्क में व्यापक लाभ मिलता है और ग्रामीण खाद्य प्रसंस्करण प्रणाली सुदृढ़ होती है। योजना के अंतर्गत अब तक 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 726 जिलों में 137 विशिष्ट उत्पादों की पहचान की गई है, जो सुनिश्चित करता है कि पारंपरिक और स्वदेशी उत्पादों को लक्षित समर्थन और बाजार पहचान मिले।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय इन उद्देश्यों के लिए, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की स्थापना और उन्नयन के लिए निम्नलिखित वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता सेवाओं के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के साथ साझेदारी में इस योजना को कार्यान्वित कर रहा है।

पीएमएफएमई योजना के प्रमुख घटक

  • ऋण-सब्सिडी: व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की स्थापना या उन्नयन के लिए 35 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रूपये)।
  • किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आदि को साझा अवसंरचनात्‍मक ढांचे स्थापित करने या उसे उन्नत बनाने के लिए 35 प्रतिशत ऋण सब्सिडी (अधिकतम 3 करोड़ रूपये)।
  • कार्यशील पूंजी और छोटे औजारों की खरीद के लिए खाद्य प्रसंस्करण में लगे प्रत्येक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्य को 40 हजार रुपये की आरंभिक पूंजी प्रदान की जाती है।
  • क्षमता विकास: इसके अंतर्गत संरचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिसमें व्यक्तिगत और समूह आवेदकों के लिए ईडीपी प्रशिक्षण और सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण कार्य में लगे स्वयं सहायता समूह के बीज पूंजी (किसी उद्यमी या स्टार्टअप को व्यवसाय शुरू करने के लिए मिलने वाला शुरुआती धन या बीज पूंजी) लाभार्थियों के लिए प्रशिक्षण शामिल है।
  • इनक्यूबेशन केंद्र: प्रसंस्करण, प्रशिक्षण, परीक्षण और उद्यमिता विकास के लिए स्थानीय केंद्रों के रूप में सामान्य इनक्यूबेशन केंद्र की स्थापना और सुदृढ़ीकरण।
  • ब्रांडिंग और मार्केटिंग: किसान उत्पादक संगठनों/स्वयं सहायता समूहों/सहकारी समितियों/क्षेत्रीय - राज्य स्तरीय विशेष उद्यम/राज्य एजेंसियों (जैसे एसआरएलएम या राज्य स्तरीय विभाग) के समूहों को उनके मौजूदा या प्रस्तावित ब्रांडों को विकसित और प्रचारित करने के लिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान। ट्रेडमार्क पंजीकरण, उत्पाद मानकीकरण, पैकेजिंग सामग्री, ई-कॉमर्स और व्यापार संवर्धन में ओडीओपी ब्रांडों के लिए सहायता।
  • निरंतर मार्गदर्शन और व्‍यावहारिक सहायता : पंजीकरण, आवेदन जमा करने, अनुपालन और मानकीकरण से लेकर औपचारिक प्रक्रिया के हर चरण में आवेदकों के मार्गदर्शन के लिए राज्य और जिला स्तर पर समर्पित रिसोर्स पर्सन-संसाधन व्यक्तियों को तैनात किया गया है।

आज तक, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी (किसी ऋण पर मिलने वाली वित्तीय सहायता जो सीधे ऋण खाते से जुड़ जाती है) घटक के तहत कुल 1,96,270 व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सहायता प्रदान की गई है, जिनमें से 40 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिला उद्यमी हैं । 4 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों के लिए बीज पूंजी सहायता स्वीकृत की गई है। इस योजना के तहत क्षमता विकास कार्यक्रम में 1,72,870 लाभार्थियों और अन्य हितधारकों को भी सम्मिलित किया गया है।

मंत्रालय के अुनसार इस योजना के तहत 80 इनक्यूबेशन केंद्रों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 31 केंद्र पहले ही कार्यान्वित हो गए है ताकि प्रौद्योगिकी को अपनाने, नवाचार और उद्यमिता विकास को बढ़ावा दिया जा सके। इससे हजारों उत्पादकों और उद्यमियों को सामूहिक रूप से लाभ मिलेगा।

ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता के तहत, 32 प्रस्तावों और 40 एक जिला एक उत्पाद ब्रांडों को स्‍वीकृति प्रदान की गई, जिससे बाजरा आधारित उत्पादों, जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग- भौगोलिक संकेतक वाले उत्पादों, अचार, मखाना उत्पादों, मसालों, डेयरी और बेकरी उत्पादों सहित 200 से अधिक खाद्य उत्पाद आरंभ किए गए है। कुल 1,164 सूक्ष्म उद्यमों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता से प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने बताया कि मंत्रालय ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस  के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिककरण समर्थित उद्यमों को जैम पोर्टल पर शामिल होने और बाजार सहायता प्रदान करने में सुविधा हो।

एफपीआई के संयुक्त सचिव ने मीडिया को संबोधित करते हुए, कहा:

पीएमएफएमई योजना भारत के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण पारितंत्र को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरी है। यह योजना सूक्ष्म उद्यमों को वित्त, औपचारिकीकरण, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन और आधुनिक बाजार संपर्कों तक पहुंच प्रदान करती है। यह योजना महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाने के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखला में लगभग 5,88,810 व्यक्तिगत उद्यमों के लिए रोजगार सृजन कर रही है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ बना रही है

मंत्रालय ने बताया कि सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों (पीएमएफएमई) के लाभार्थियों ने विश्व खाद्य भारत, आहार और सियाल इंडिया सहित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में सक्रियता से भाग लिया है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार पहुंच और अपने उत्पाद प्रदर्शित करने में मदद मिली है। विश्व खाद्य भारत 2025 के दौरान, प्रधानमंत्री द्वारा 26 हजार लाभार्थियों को 778 करोड़ रुपये की ऋण-आधारित सब्सिडी जारी की गई। इस आयोजन में 100 से अधिक पीएमएफएमई लाभार्थी स्टालों ने भाग लिया, जबकि पीएमएफएमई मार्केटप्लेस से जुड़े क्यूआर-कोड सक्षम डिजिटल डिस्प्ले द्वारा लगभग 250 पीएमएफएमई उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इन पहलों द्वारा मंत्रालय सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करता है और घरेलू और वैश्विक बाजार पहुंच के लिए व्यापार-से-व्यापार (बी2बी) बैठकों को सुगम बनाता है। लाभार्थियों की कई सफलता की कहानियों में योजना के लाभ और प्रभाव स्पष्ट हैं, जिन्हें मंत्रालय नियमित रूप से अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करता है।

मंत्रालय ने बताया कि पीएमएफएमई योजना से देश भर में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और उद्यमियों की बढ़ती संख्या भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण पंजीकरण प्राप्त कर रही है और बेहतर खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और पैकेजिंग मानक अपना रही हैं। इस योजना से स्थानीय रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है, जिससे खाद्य प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखला में लगभग 5,88,810 व्यक्तियों के लिए आजीविका के अवसर उपलब्ध हुए हैं। जमीनी स्तर पर प्रसंस्करण, संरक्षण और मूल्यवर्धन अवसंरचनात्मक ढांचे को सुदृढ बनाकर इस योजना से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान  कम करने, ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के अवसर बढ़ाने और स्थानीय आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने में मदद मिली है। मंत्रालय ने कहा कि पीएमएफएमई योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों, विशेष रूप से महिला नेतृत्व वाले और समुदाय आधारित उद्यमों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे सतत और समावेशी उद्यमिता द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को उल्लेखनीय सुदृढ़ता मिल रही है।

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