स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
122 किलोग्राम वजन की महिला मरीज में उच्च जोखिम वाली जीवनरक्षक एओर्टिक डिसेक्शन सर्जरी एम्स जोधपुर में सफलतापूर्वक सम्पन्न
प्रविष्टि तिथि:
21 MAY 2026 5:37PM by PIB Jaipur
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग द्वारा तीव्र एओर्टिक डिसेक्शन, अत्यधिक मोटापा तथा अनेक गंभीर सह-रोगों से पीड़ित एक महिला मरीज की अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक आपातकालीन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।
डॉ. सुरेन्द्र पटेल, अतिरिक्त प्रोफेसर ने बताया कि 57 वर्षीय महिला मरीज का वजन 122 किलोग्राम था तथा वह अत्यधिक मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित थी, जिसके कारण उसे प्रतिदिन रात्रि में BiPAP सपोर्ट की आवश्यकता पड़ती थी। मरीज पिछले दो महीनों से सीने में दर्द एवं सांस लेने में तकलीफ से परेशान थी। श्रीगंगानगर एवं बीकानेर में प्रारंभिक उपचार के बाद उसकी स्थिति की गंभीरता एवं उच्च जोखिम को देखते हुए उसे एम्स जोधपुर रेफर किया गया।
एम्स जोधपुर में रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. पवन गर्ग द्वारा CT स्कैन जांच के माध्यम से मरीज में तीव्र एओर्टिक डिसेक्शन का निदान किया गया। यह एक जानलेवा स्थिति होती है जिसमें तत्काल सर्जरी आवश्यक होती है। सर्जरी के दौरान एसेन्डिंग एओर्टा एवं हेमिआर्च रिप्लेसमेंट डैक्रॉन ग्राफ्ट की सहायता से किया गया। इस प्रक्रिया में सर्कुलेटरी अरेस्ट तकनीक का उपयोग किया गया, जिसमें मस्तिष्क को छोड़कर शरीर के अन्य हिस्सों में रक्त प्रवाह को अस्थायी रूप से रोका जाता है। इस दौरान शरीर का तापमान लगभग 20–24 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जाता है ताकि महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा की जा सके। मरीज के एओर्टिक वाल्व को बदलने के बजाय सफलतापूर्वक संरक्षित एवं रिपेयर किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि एओर्टिक डिसेक्शन सर्जरी स्वयं में हृदय शल्य चिकित्सा की सबसे उच्च जोखिम वाली आपातकालीन प्रक्रियाओं में से एक है, जिसमें मृत्यु एवं जटिलताओं की संभावना अत्यधिक होती है। इस मरीज में अत्यधिक मोटापा, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एवं अन्य सह-रोगों के कारण सर्जरी और भी अधिक चुनौतीपूर्ण थी। मरीज का आकार सामान्य ऑपरेशन टेबल में समाहित नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण विशेष साइड-आर्म सपोर्ट की व्यवस्था करनी पड़ी। इसके अतिरिक्त मरीज की गर्दन छोटी होने के कारण एनेस्थीसिया के दौरान एयरवे सुरक्षित करना एवं इंट्यूबेशन करना भी अत्यंत कठिन था।
इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व डॉ. सुरेन्द्र पटेल ने किया तथा उनकी टीम में डॉ. आलोक कुमार शर्मा, डॉ. अनुरुद्ध माथुर एवं रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. बजरंग और डॉ. विक्रम शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. राकेश कुमार, डॉ. मनोज कमल एवं डॉ. गुरुसरण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल कौशिक ने इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से निदान की पुष्टि की तथा यह सुनिश्चित किया कि मरीज के एओर्टिक वाल्व को सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जा सके।
इस उच्च जोखिम वाली सर्जरी की सफलता में एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। अत्यधिक मोटापे एवं ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण मरीज के एयरवे एवं वेंटिलेशन प्रबंधन में गंभीर चुनौतियां थीं। मरीज को ऑपरेशन के अगले दिन एक्सट्यूबेट कर दिया गया, लेकिन इसके बाद भी लगभग दो सप्ताह तक उसे निरंतर नॉन-इनवेसिव रेस्पिरेटरी सपोर्ट एवं BiPAP सहायता की आवश्यकता रही। डॉ. मनोज कमल के नेतृत्व में एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम द्वारा की गई सतर्क एवं विशेषज्ञ देखभाल ने मरीज की सफल रिकवरी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विभाग ने CTVS विभाग के सभी रेजिडेंट डॉक्टरों, परफ्यूजनिस्ट श्री कमलेश तथा CTVS ऑपरेशन थिएटर एवं CTVS ICU के नर्सिंग अधिकारियों के योगदान की भी सराहना की।
ऑपरेशन के बाद अत्यधिक मोटापे के कारण डायफ्राम ऊपर उठ जाने से मरीज को गंभीर श्वसन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण लंबे समय तक ऑक्सीजन एवं रेस्पिरेटरी सपोर्ट की आवश्यकता रही। अपेक्षित रूप से मरीज को लगभग 20 दिनों तक ICU एवं अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। सभी चुनौतियों के बावजूद मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के अस्पताल से डिस्चार्ज हुई।
डॉ. आलोक कुमार शर्मा, अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, CTVS ने बताया कि विभाग द्वारा अब तक 10 जटिल एओर्टिक सर्जरी एवं हेमिआर्च रिपेयर सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं तथा इनके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला अत्यधिक मोटापे एवं अनेक सह-रोगों के कारण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, जिसे कार्डियक सर्जन, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, परफ्यूजनिस्ट एवं नर्सिंग टीम के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक प्रबंधित किया गया।
प्रोफेसर डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी, कार्यकारी निदेशक, एम्स जोधपुर ने इस उच्च जोखिम वाले मरीज के सफल उपचार के लिए पूरी (CTVS) विभाग की टीम को बधाई दी तथा उन्नत कार्डियक एवं एओर्टिक सर्जरी में विभाग की बढ़ती विशेषज्ञता की सराहना की।
एओर्टिक डिसेक्शन क्या है?
एओर्टिक डिसेक्शन एक जानलेवा स्थिति है जिसमें शरीर की मुख्य धमनी एओर्टा की अंदरूनी परत में चीरा या फटाव हो जाता है। इस फटाव के माध्यम से रक्त एओर्टा की परतों के बीच प्रवेश कर जाता है, जिससे एओर्टा फट सकती है, गंभीर आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है, मस्तिष्क एवं अन्य अंगों तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो सकती है, अंग विफलता या अचानक मृत्यु भी हो सकती है।
इसके सामान्य लक्षण हैं:
• अचानक तेज सीने, पीठ या पेट में दर्द
• सांस लेने में तकलीफ
• बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी
• उच्च रक्तचाप
• स्ट्रोक या लकवा
• पेशाब में अचानक कमी या रुकावट
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक तेज सीने या पीठ में दर्द हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि समय पर निदान एवं आपातकालीन सर्जरी से जीवन बचाया जा सकता है।
मोटापा नियंत्रण एवं हृदय स्वास्थ्य जागरूकता
विशेषज्ञों ने बताया कि मोटापा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग एवं एओर्टिक बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ा देता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थितियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक उपाय:
• शरीर का वजन नियंत्रित रखना
• नियमित व्यायाम करना
• कम तेल, नमक एवं शक्कर वाला संतुलित आहार लेना
• नियमित रूप से रक्तचाप एवं रक्त शर्करा की जांच करवाना
• तंबाकू से परहेज एवं शराब का सीमित सेवन करना
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(रिलीज़ आईडी: 2263820)
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