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वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए 'वायबिलिटी प्लान 2.0' को मंजूरी दी


संशोधित तीन-वर्षीय रूपरेखा का उद्देश्य सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है

प्रविष्टि तिथि: 05 MAY 2026 7:17PM by PIB Delhi

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग को संस्थागत बनाने और गवर्नेंस सुधारों को मजबूत करने के लिए, वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के लिए एक तीन-वर्षीय 'वायबिलिटी प्लान' शुरू किया था। यह रूपरेखा आरआरबी के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार लाने और मॉनिटरिंग तंत्र को सुदृढ़ करने में सहायक रही है। वित्तीय क्षेत्र की उभरती चुनौतियों और निरंतर निगरानी की आवश्यकता को देखते हुए, डीएफएस ने अब वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक की अगली तीन-वर्षीय अवधि के लिए संशोधित 'वायबिलिटी प्लान 2.0' को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य आरआरबी की वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्द्धा क्षमता को बढ़ाना है।

वायबिलिटी प्लान 2.0 में प्रदर्शन के 30 मापदंडों का एक निर्धारित सेट शामिल है, जो मुख्य रूप से चार स्तंभों— ऑपरेशनल एक्सीलेंस (परिचालन उत्कृष्टता), एसेट क्वालिटी (परिसंपत्ति गुणवत्ता), प्रॉफिटेबिलिटी (लाभप्रदता) और ग्रोथ (विकास) पर आधारित है। इन चार स्तंभों के प्रमुख महत्वपूर्ण मानकों में सीआरएआर, ऋण-जमा अनुपात, डिजिटल एडॉप्शन, एनपीए लेवल्स, रिकवरी परफॉर्मेंस, प्रॉफिटेबिलिटी रेश्यो और भारत सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में प्रदर्शन शामिल हैं।

संक्षेप में, वायबिलिटी प्लान 2.0 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के समग्र स्थिति एवं कार्यक्षमता का मूल्यांकन और निगरानी के लिए एक संतुलित एवं व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है। इस पहल से सभी 28 आरआरबी में वित्तीय स्थिरता मजबूत होने और परिचालन दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगी कि आरआरबी ग्रामीण ऋण विस्तार, डिजिटल समावेश और वित्तीय पहुंच की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बने रहें।

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पीके/केसी/डीवी


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