विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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तकनीकी संप्रभुता हासिल करने और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रगति को दिशा देने के लिए भारत को महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व करना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉस एंजिल्स में वर्चुअल रूप से आयोजित अखिल-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन को संबोधित किया; इस सम्मेलन में वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं, उद्यमियों, निवेशकों और शोधकर्ताओं सहित आईआईटी के पूर्व छात्रों के नेटवर्क ने भाग लिया

प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से वैश्विक नवप्रवर्तक तक, डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अद्भुत यात्रा का वर्णन किया

भारतीय प्रवासी, विशेष रूप से आईआईटी के पूर्व छात्रों की भूमिका पर जोर देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें भारत और वैश्विक नवाचार इको-सिस्‍टम के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और क्वांटम प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक लचीलेपन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण बताया

भारत के अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्षेत्र नवाचार को गति दे रहे हैं, जबकि नए शिक्षा मॉडल तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को शक्ति प्रदान कर रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 26 APR 2026 2:05PM by PIB Delhi

नई दिल्ली, 26 अप्रैल: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत से महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि आने वाले दशकों में तकनीकी क्षमता ही राष्ट्रीय शक्ति को परिभाषित करेगी।

लॉस एंजिल्स में वर्चुअल रूप से आयोजित पैन-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर नवाचार का निर्माता, डिजाइनर और वैश्विक चालक बनना होगा।

मंत्री महोदय आईआईटी के पूर्व छात्रों के प्रतिष्ठित नेटवर्क के सदस्यों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे, जिसमें वैश्विक प्रौद्योगिकी जगत के नेता, उद्यमी, शोधकर्ता और निवेशक शामिल थे। इस सम्मेलन में भारतीय प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्य भी एकत्रित हुए, जिनमें उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप संस्थापक और विश्व भर में नवाचार इको-सिस्‍टम में योगदान देने वाले वरिष्ठ पेशेवर शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2047 तक विकसित भारत के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अपने विकास के सफर में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भविष्य के विकास की नींव हैं। उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम के विस्तार, जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति और डीप-टेक स्टार्टअप्स के उदय को भारत की बढ़ती क्षमताओं के संकेतक के रूप में उद्धृत किया।

भारतीय प्रवासी समुदाय, विशेष रूप से आईआईटी के पूर्व छात्रों की भूमिका पर जोर देते हुए, उन्होंने उन्हें भारत और वैश्विक नवाचार इको-सिस्‍टम के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने निवेश, मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग और नीतिगत भागीदारी के माध्यम से उनके योगदान को रेखांकित किया, जो भारत के विकास पथ को लगातार मजबूत कर रहा है।

मंत्री महोदय ने भारत के तकनीकी नेतृत्व को मजबूत करने में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया, जिनके पूर्व छात्र वैश्विक निगमों का नेतृत्व कर रहे हैं, अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा दे रहे हैं और सार्वजनिक नीतियों को आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब ध्यान विकास के अगले आयाम की पहचान करने पर केंद्रित होना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और क्वांटम प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच गहन सहयोग के साथ-साथ शिक्षा और संस्था निर्माण के नए मॉडलों की आवश्यकता पर बल दिया।

दिल्ली-एनसीआर स्थित ऋषिहुड विश्वविद्यालय में सज्जन अग्रवाल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के शुभारंभ के बारे में बताते हुए उन्होंने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि कैसे वैश्विक भारतीय समुदाय भारत में संस्थानों के निर्माण में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों द्वारा समर्थित ऐसी पहलें, वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों और उद्यमिता से जुड़ी शिक्षा के माध्यम से भारत के तकनीकी आधार को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

मजबूत साझेदारी का आह्वान करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का विकास सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग जगत और वैश्विक भारतीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों से ही संभव होगा। उन्होंने आईआईटी के पूर्व छात्रों को मार्गदर्शन देने, अनुसंधान और गहन प्रौद्योगिकी में निवेश करने और भारतीय संस्थानों के साथ सहयोग करने में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, भारत न केवल 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य प्राप्त करेगा, बल्कि वैश्विक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

फोटो: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लॉस एंजिल्स में आयोजित पैन-आईआईटी पूर्व छात्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित करते हुए

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पीके/केसी/केएल/वीके


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