वस्त्र मंत्रालय
सरकार ने परिधान और तैयार वस्त्रों के निर्यात के लिए आरओएससीटीएल योजना के विस्तार की अधिसूचना जारी की
प्रविष्टि तिथि:
01 APR 2026 5:17PM by PIB Delhi
वस्त्र मंत्रालय ने परिधान/वस्त्रों और तैयार वस्त्रों के निर्यात के लिए राज्य एवं केंद्रीय करों एवं शुल्कों पर छूट (आरओएससीटीएल) योजना को 30 सितंबर 2026 तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा 16वें वित्त आयोग चक्र के लिए योजना की स्वीकृति मिलने तक, जो भी पहले हो, बढ़ा दिया है। यह विस्तार मौजूदा दिशा-निर्देशों में बिना किसी बदलाव के किया गया है।
7 मार्च 2019 से लागू आरओएससीटीएल योजना का मकसद उन सभी अंतर्निहित राज्य एवं केंद्रीय करों एवं शुल्कों पर छूट प्रदान करना है, जो किसी अन्य योजना के तहत नहीं आते हैं, ताकि भारत के परिधान एवं तैयार वस्त्रों के निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में इजाफा हो सके। यह योजना निर्यात पर शून्य कर के सिद्धांत पर आधारित है, जो निर्यातित उत्पादों में अंतर्निहित अप्रतिदेय करों की छूट सुनिश्चित करती है। यह योजना वस्त्र निर्यात क्षेत्र के लिए एक प्रमुख सहायता तंत्र के रूप में कार्य करती रहती है, जिससे खास तौर पर लघु एवं मध्यम उद्यम निर्यातकों को लाभ होता है, जो इसके लाभार्थियों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
इसके साथ ही, सरकार ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (आरओडीटीईपी) योजना को भी 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक जारी रखा है। इससे उन वस्त्र उत्पादों को लाभ मिलेगा, जो आरओएससीटीएल के तहत नहीं आते, जिनमें आईटीसी (एचएस) के अध्याय 61, 62 और 63 के अंतर्गत नहीं आने वाले उत्पाद भी शामिल हैं।
परिधान और तैयार वस्त्रों के लिए आरओएससीटीएल और अन्य वस्त्र उत्पादों के लिए आरओडीटीईपी योजना को जारी रखने से वस्त्र मूल्य श्रृंखला में व्यापक सहायता मिलती है। ये उपाय खास तौर पर लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए, निर्यात क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करते हैं और निर्यातकों के लिए नीतिगत निरंतरता के तहत वैश्विक वस्त्र व्यापार में भारत की स्थिति को बनाए रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।
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पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2247962)
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