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सीएजी रिपोर्ट में राजस्व प्रबंधन सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत; जीएसटी प्रणाली में सुधार की व्यापक संभावनाएं उजागर

प्रविष्टि तिथि: 20 MAR 2026 9:53PM by PIB Raipur

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India) द्वारा 31 मार्च 2023 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए तैयार छत्तीसगढ़ राज्य के राजस्व संबंधी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन को आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। संविधान के अनुच्छेद 151 के अंतर्गत तैयार इस रिपोर्ट में राज्य की राजस्व व्यवस्था, वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) प्रणाली तथा प्रवर्तन तंत्र में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।


रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में छत्तीसगढ़ शासन की कुल प्राप्तियां ₹93,877.13 करोड़ रहीं, जिसमें राज्य का स्वयं का राजस्व ₹48,370.54 करोड़ (52 प्रतिशत) दर्ज किया गया। इसमें ₹33,122.30 करोड़ कर राजस्व तथा ₹15,248.24 करोड़ गैर-कर राजस्व शामिल है, जबकि केंद्र सरकार से ₹45,506.59 करोड़ प्राप्त हुए।


लेखापरीक्षा में यह भी सामने आया कि राज्य के विभिन्न विभागों में ₹8,585.80 करोड़ की राजस्व बकाया राशि लंबित है, जिसमें से ₹4,371.29 करोड़ पांच वर्ष से अधिक समय से वसूली की प्रतीक्षा में है।


रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक वे-बिल प्रणाली (Electronic Way Bill System) की कार्यप्रणाली से संबंधित है। लेखापरीक्षा में पाया गया कि प्रणाली में कई तकनीकी एवं निगरानी संबंधी कमियां हैं, जिनके कारण निरस्त पंजीकरण वाले करदाताओं, रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों तथा संदिग्ध लेन-देन करने वालों को भी ई-वे बिल जारी करने की अनुमति मिलती रही। यहां तक कि एक ही चालान के लिए एक से अधिक ई-वे बिल बनाए जाने के मामले भी सामने आए।


लेखापरीक्षा में 29 मामलों में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई, जिनमें ₹20.34 करोड़ के संभावित कर प्रभाव का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा बिना वास्तविक माल परिवहन के ई-वे बिल जारी कर ₹2.94 करोड़ की अनियमित इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) का हस्तांतरण किए जाने के मामले भी सामने आए हैं।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर चोरी की रोकथाम के लिए विभागीय प्रवर्तन गतिविधियां अपेक्षित स्तर पर प्रभावी नहीं रहीं। जांच में पाया गया कि कर एवं दंड की वसूली के समायोजन में 8 से लेकर 1981 दिनों तक की देरी हुई।


वस्तु एवं सेवा कर भुगतान तथा रिटर्न दाखिल करने की निगरानी पर की गई विषय-विशिष्ट अनुपालन लेखापरीक्षा में 641 मामलों में विसंगतियां चिन्हित की गईं। इनमें से 184 मामलों में ₹297.36 करोड़ के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जबकि विभाग अब तक ₹2.46 करोड़ की ही वसूली कर पाया है।


इसके अतिरिक्त 33 करदाताओं के मामलों की विस्तृत जांच में ₹79.18 करोड़ के राजस्व प्रभाव से जुड़ी 23 अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें से ₹41.87 करोड़ की वसूली की जा चुकी है।


रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में अनुपालन, निगरानी तथा प्रवर्तन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि राजस्व हानि को रोका जा सके और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके।


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(रिलीज़ आईडी: 2243205) आगंतुक पटल : 7
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