स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम


संसदीय समिति की सिफारिशों के बाद महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अनुसंधान सुधार एवं मजबूत नैतिक निगरानी लागू की गई

सरकार ने नैदानिक अनुसंधान सुधारों को लागू किया और बेहतर सुरक्षा एवं नैतिक निगरानी के साथ एचपीवी टीकाकरण का विस्तार किया

विशेषज्ञों की सिफारिशों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण देने के बाद देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एईएफआई सुरक्षा निगरानी के अंतर्गत 14 वर्षीय लड़कियों के लिए निःशुल्क गार्डसिल-4 टीकाकरण के साथ राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया

एचपीवी टीकाकरण स्वैच्छिक लेकिन माता-पिता की सहमति अनिवार्य; यू-विन प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 4:31PM by PIB Delhi

एचपीवी वैक्सीन परीक्षणों पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की 72वीं रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाइयों को समिति ने संज्ञान में लिया गया जिसे इसकी 81वीं रिपोर्ट में दर्शाया गया है। सरकार ने पिछले दशक में कई स्वास्थ्य अनुसंधान नियामक सुधार किए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:

1. नई औषधियां और नैदानिक ​​परीक्षण नियम (एनडीसीटीआर), 2019 ने नैदानिक ​​परीक्षणों और नई औषधियों के लिए एक व्यापक नियामक संरचना प्रस्तुत किया और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया। इन नियमों के अंतर्गत जैव चिकित्सा अनुसंधान की समीक्षा करने वाली नैतिकता समितियों का स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है।

2. भारत में सभी नैतिक समितियों का ऑनलाइन पंजीकरण करने के लिए स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने नैतिक पोर्टल और सुगम पोर्टल बनाया है। नैतिक दिशा-निर्देशों एवं विनियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए इनकी संरचना और कार्यों की समीक्षा की जाती है। साथ ही, डीसीजीआई ने पहले प्रतिभागी के नामांकन से पहले सभी नैदानिक ​​परीक्षण अध्ययनों को नैदानिक ​​परीक्षण रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआई) के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया है।

3. परीक्षण से पहले वैज्ञानिक एवं नैतिक समीक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है। नैतिक समितियों को बेहतर निगरानी करने की आवश्यकता है, जिसमें जोखिमों को कम करने के लिए अनुसंधान प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा शामिल है।

4. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 2017 में जैव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय नैतिक दिशानिर्देशों को अपडेट किया, जिसमें वैज्ञानिक वैधता सुनिश्चित करने, मजबूत नैतिकता समिति की समीक्षा, जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों, सुरक्षा निगरानी और पर्यवेक्षण तथा प्रतिभागियों की अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता निर्धारित की गई ताकि अनुसंधान प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपायों को लागू किया जा सके, जिनमें कमजोर प्रतिभागी भी शामिल हैं।

5. स्वास्थ्य मंत्रालय की स्क्रीनिंग समिति की मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को स्वास्थ्य अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोगों को पर्याप्त रूप से विनियमित करने के लिए संशोधित किया गया है।

चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए राज्य सरकारें स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ स्वतंत्र रूप से समझौता ज्ञापन भी करती हैं।

देश में 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत 28 फरवरी, 2026 को की गई। प्रारंभिक कार्य में विश्व के वैज्ञानिक निकायों की सिफारिशों को ध्यान में रखा गया जिसमें जिनमें टीकाकरण पर रणनीतिक सलाहकार समूह (एसएजीई), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) शामिल हैं। इस योजना को लागू करने से पहले सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श किया गया, एनटीएजीआई से मार्गदर्शन प्राप्त किया गया और देश के सभी 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चिकित्सा और पैरामेडिकल कर्मचारियों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में गार्डसिल-4 वैक्सीन की एकल खुराक निःशुल्क प्रदान की जाती है, जिनमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), उप-जिला अस्पताल (एसडीएच)/जिला अस्पताल (डीएच) और सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) शामिल हैं। चिकित्सा अधिकारियों की उपस्थिति में टीकाकरण किया जा रहा है और टीकाकरण स्थलों को 24x7 प्रबंधन केंद्रों से जोड़ा गया है ताकि टीकाकरण के बाद अगर कोई प्रतिकूल घटनाओं (एईएफआई) हो तो उसका त्वरित प्रबंधन किया जा सके। इसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है और लाभार्थी यू-विन प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करा सकते हैं। टीकाकरण स्वैच्छिक है और चिकित्सा अधिकारियों को किसी भी प्रतिकूल घटना से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। एचपीवी टीकाकरण अभियान के संचालन संबंधी दिशानिर्देश सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रेषित किए गए हैं।

यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एके


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