सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सरकार, सामाजिक संगठन और तकनीकी क्षेत्र के शीर्ष लोग श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए भारत का पहला एकीकृत जीवन-चक्र सहायता मॉडल बनाने के लिए एकजुट हुए

प्रविष्टि तिथि: 12 MAR 2026 4:51PM by PIB Delhi

भारत में समावेशी विकास और सुलभता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) ने श्रवणबाधित व्यक्तियों के सशक्तिकरण और अवसरों को गति देने के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी की है। 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली में सचिव श्रीमती वी. विद्यावती, अपर सचिव सुश्री मनमीत कौर नंदा, डीईपीडब्लूडी के निदेशक प्रदीप ए. और आईएसएलआरटीसी के निदेशक श्री कुमार राजू की उपस्थिति में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) एक सहयोगात्मक राष्ट्रीय ढांचे की शुरुआत का प्रतीक है जो बधिर और कम सुनने वाले लोगों के लिए व्यापक और स्थायी सहायता प्रणाली के निर्माण हेतु सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है। इस साझेदारी का उद्देश्य सशक्तिकरण के एकीकृत जीवन-चक्र मॉडल का नेतृत्व करना है जो श्रवणबाधित व्यक्तियों को प्रारंभिक हस्तक्षेप और शिक्षा से लेकर कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक समावेशन तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करता है। संस्थागत विशेषज्ञता, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक संपर्क को समन्वित करके, यह पहल एक ऐसा प्रणालीगत परिवर्तन लाने का प्रयास करती है जो देश भर में श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए पहुंच में सुधार करे, अवसरों का विस्तार करे और उनकी गरिमा और स्वतंत्रता को मजबूत करे।

इच्छुक संगठनों का गठबंधन प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सुलभता और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में विविध विशेषज्ञता रखने वाले संगठनों का एक समूह है। इसमें यूनिकी (गोपालकृष्णन फाउंडेशन फॉर द डेफ), ब्ली टेक इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, ट्रेनिंग एंड एजुकेशनल सेंटर फॉर हियरिंग इम्पेयर्ड (टीच), विनविनया फाउंडेशन, बडी4स्टडी इंडिया फाउंडेशन, वीक्रॉप टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (आईएसएलआरटीसी) शामिल हैं। डीईपीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर, यह गठबंधन सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों हेतु अभिनव हस्तक्षेपों को डिजाइन और कार्यान्वित करने के लिए काम करेगा।

यह सहयोग जागरूकता पैदा करने, सुलभता और सहायक प्रौद्योगिकियों का विस्तार करने, प्रारंभिक पहचान और शैक्षिक सहायता को मजबूत करने, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने, छात्रवृत्ति प्रदान करने, भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने और डिजिटल सामग्री विकसित करने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। नीतिगत समर्थन को तकनीकी समाधानों और समुदाय-प्रेरित पहलों के साथ जोड़कर, इस साझेदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रवण बाधित व्यक्ति सामाजिक और आर्थिक जीवन में पूर्ण और आत्मविश्वास से भाग ले सकें। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल सार्वजनिक-निजी-नागरिक समाज सहयोग का एक प्रगतिशील उदाहरण है, जहां प्रत्येक भागीदार समावेश की जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए विशेष ज्ञान और संसाधनों का योगदान देता है। डिजिटल नवाचार, प्रशिक्षण प्रणालियों और सामुदायिक नेटवर्क का लाभ उठाकर, इस साझेदारी से ऐसे व्यापक मॉडल तैयार होने की उम्मीद है जिनसे शहरी और ग्रामीण भारत में श्रवण बाधित व्यक्तियों को लाभ मिल सके।

इस रणनीतिक सहयोग के माध्यम से, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग एक समावेशी भारत के निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रहा है, जहाँ प्रत्येक दिव्यांगजन को सुलभता, अवसर और सहभागिता प्राप्त हो। यह पहल एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी, शिक्षा और साझेदारी मिलकर दिव्यांगजनों के लिए सशक्तिकरण, सम्मान और समान अवसर के मार्ग प्रशस्त करने और बाधाओं को दूर करने का कार्य करते हैं।

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पीके/केसी/जेएस


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